गुरु पूर्णिमा कैसे करें गुरु का पूजन, जिससे हो जीवन का उद्धार

आषाढ़ पूर्णिमा का दिन हिंदू समाज के लिए बहुत महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि इस दिन सनातनी अपने गुरु का बहुत विधि विधान से पूजन करते हैं।

आषाढ़ पूर्णिमा का दिन हिंदू समाज के लिए बहुत महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि इस दिन सनातनी अपने गुरु का बहुत विधि विधान से पूजन करते हैं। पूरे देश में यह पर्व बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है विदेश में भी रह रहे सनातनी इस पर्व को धार्मिक उल्लास के साथ मनाते हैं। गुरु पूर्णिमा के दिन बहुत सारे लोगों के सामने यह समस्या रहती है कि वह अपने गुरु के स्थान पर नहीं पहुंच पाते कारोबार और नौकरियों के कारण उनकी व्यस्तता रहती है। इसलिए गुरु पूर्णिमा पर हमें कैसे गुरु का पूजन करना चाहिए, जिससे जीवन का उद्धार हो सके। आइए, जानते हैं...

व्यास पूजन के साथ प्रारंभ करें पूजा

हितैषी बाबा के अनुसार गुरु पूर्णिमा पर हम सब वेद व्यास जी का पूजन करते हैं। चार वेद, 18 पुराण, छह शास्त्र की रचना कर गुरु वेद व्यास जी पूरे ब्रह्मांड के गुरु के रूप में प्रसिद्ध हो गए।  महर्षि वेद व्यास जी भगवान के 24 अवतारों में से एक हैं। इसलिए घर पर सबसे पहले व्यास जी का पूजन करें। साथ ही इस दिन ब्रह्मा, विष्णु और महेश के साथ सतगुरु का पूजन करना चाहिए। क्योंकि त्रिदेव हमारे जीवन में गुरु के रूप में ही हैं। सतगुरु में हम त्रिदेव के रूप को देखते हैं। तीन जुलाई को गुरु पूर्णिमा के दिन प्रातः नित्य क्रिया से निवृत्त होने के बाद गंगाजल से स्नान करना चाहिए। फिर पूजा  स्थल को बहुत सुंदर से सजाना चाहिए। यदि आपके पास आपकी गुरुदेव महाराज का कोई चित्र तो उन्हें पूजन स्थल पर रखना चाहिए। व्यास पूजन त्रिदेव पूजन के साथ ही अपने गुरु का पूजन करना चाहिए। गुरु से यह प्रार्थना करनी चाहिए कि हमें सदैव सदमार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करते रहें। साथ ही जीवन में भक्ति मार्ग बना रहे।  

अंतर्मन में करें ध्यान, उपस्थित होंगे गुरु भगवान

प्राचीन समय में बिना गुरु के जीवन निरर्थक माना जाता था। मगर धीरे-धीरे जैसे आधुनिकता बढ़ती गई, लोग गुरु से दूर होते चले गए। आज लोग बड़े-बड़े शहरों में हैं, मल्टीनेशनल कंपनियों में कारोबार करते हैं, बड़ा कारोबार है, मगर गुरु पूर्णिमा पर गुरु पूजन में उपस्थित नहीं हो पाते हैं, अपने गुरु का दर्शन नहीं कर पाते। बहुत से ऐसे लोग हैं, जिन्होंने तो अपना गुरु ही नहीं बनाया। हालांकि, सनातनी हैं तो जीवन में गुरु बहुत जरूरी हैं। पूज्य हितैषी बाबा ने कहा कि जिन्होंने जीवन में गुरु नहीं बनाया वो निराश न हों। ऐसे लोग तीन जुलाई को गुरु पूर्णिमा के दिन पूजा स्थल पर बैठें। अंतर्मन में अपने गुरु का स्मरण करें। भगवान को अपना गुरु मानकर उनका पूजन करें। पुष्प, चंदन, प्रसाद अर्पित करके आरती करें।  ब्राह्मणों को दान दक्षिणा दें गुरु पूजन का पूरा पुण्य मिलेगा।