जय भोलेनाथ के साथ यदि बाबा ने मुस्कुरा दिया तो पूरी हो जाती है मनोकामना अक्षय पात्र में दो मिनट में बन जाता है 50 संतों का प्रसाद jay bholenaath ke saath yadi baaba ne muskuraaya to, pooree ho jaatee hai manokaamana, aksh paatr mein do minat mein ban jaata hai 50 santon ka prasaad

प्रेम और भक्ति की नगरी पूज्य संतों की नगरी है।यहां एक से बढ़कर एक त्यागी और तपस्वी संत हैं, जिनके दर्शन मात्र से ही जीवन धन्य हो जाता है।और सारी मनोकामना पूर्ण हो जाती है

प्रेम और भक्ति की नगरी वृंदावन पूज्य संतों की नगरी है। यहां एक से बढ़कर एक त्यागी और तपस्वी संत हैं, जिनके दर्शन मात्र से ही जीवन धन्य हो जाता है। और सारी मनोकामना पूर्ण हो जाती है। वृंदावन में परिक्रमा मार्ग पर ऐसे ही पूजनीय संत जय भोले बाबा का दर्शन किसी चमत्कार से कम नहीं है। यदि जय भोले कहते हुए बाबाजी ने मुस्कुरा दिया तो फिर आपकी मनोकामना जरूर पूर्ण होती है। बाबाजी के अंदर इतनी शक्ति है कि एक छोटे से पात्र में भी 50 लोगों को प्रसाद ग्रहण करा देते हैं।

दोस्तों संतो की इस यात्रा में एक से एक विलक्षण संतो के दर्शन हुए। त्याग और तपस्या से परिपूर्ण पूज्य संतों का आशीर्वाद वंदनीय है। वृंदावन में परिक्रमा मार्ग पर लंबे जटाधारी बड़े कद के संत का दर्शन अभिभूत करने वाला है। पूज्य संत महाराज 24 घंटे परिक्रमा मार्ग पर भ्रमण करते रहते हैं। लंबी कद काठी देखकर ऐसा लगता है मानों साक्षात भोलेनाथ अवतरित हो गए हैं। जय भोलेनाथ का स्मरण करते रहते हैं। यदि कोई भक्त भाव से आ गया। बाबा जी के मुंह से जय भोलेनाथ निकल गया तो फिर बाबाजी का आशीर्वाद मिल जाता है। फिर, सभी मनोकामना पूर्ण हो जाती है। हालांकि, यह आशीर्वाद बड़े भाव से मिलता है। 


खुले आसमान के नीचे रहते हैं बाबा 

हर समय जय भोले का उद्घोष करने वाले बाबा खुले आसमान के नीचे रहते हैं। करीब 30 वर्ष हो गए बाबा जी किसी आश्रम, मठ, मंदिर और कोठी में आश्रय नहीं लेते हैं। भीषण गर्मी पड़ जाए तो किसी वृक्ष के नीचे थोड़ा विश्राम कर लेते हैं। कड़ाके की ठंड में भी बाबा खुले आसमान के नीचे लेट जाते हैं। जय भोलेनाथ बाबा का कहना है कि मठ, मंदिर और महल सब यहीं रह जाने हैं। इसलिए उन्होंने कभी कोशिश नहीं की कि मठ आदि का निर्माण कराया जाए। बहुत सारे भक्त उन्हें मिले और उन्होंने आग्रह भी किया कि बाबा जी आपके लिए अच्छा सा आश्रम बना दें, लेकिन बाबा जी ने साफ मना कर दिया। 


छोटे से पात्र में भर देते हैं 50 संतों का पेट

जय भोले बाबा के पास एक अक्षय पात्र है। छोटा सा तवे और कढ़ाई की तरह है। इसी पात्र में बाबाजी करीब 50 संतों का प्रसाद बना देते हैं। बाबा जी का कहना है कि उनमें इतनी शक्ति है कि मात्र छोटे से पात्र में 50 से भी अधिक संत और भक्त प्रसाद ग्रहण कर लेते हैं। कई बार यमुना जी के किनारे बाबा जी जब भजन आदि करते हैं तो उनके पास संतगण आ जाते हैं। फिर बाबा जी बड़े भाव से संतों को प्रसाद ग्रहण कराते हैं। बाबा जी बाजार से आटा, नमक, तेल आदि लेकर आते हैं। टिक्कर और 
टमाटर आदि की चटनी बनाकर सभी संतो को प्रसाद ग्रहण कराते हैं। एक छोटे से पात्र में 50 लोगों का भोजन बनते देख हर कोई आश्चर्य में पड़ जाता है।


तीर्थ स्थलों का पैदल करते हैं दर्शन

जय भोलेनाथ बाबा पैदल ही तीर्थ स्थलों का दर्शन करते हैं। बाबाजी केदारनाथ, बद्रीनाथ बाबा और अमरनाथ आदि स्थानों का दर्शन करने प्रतिवर्ष जाते हैं, बाबा जी पैदल ही दर्शन के लिए निकल पड़ते हैं। पहाड़ों पर बर्फ में भी बाबा जी पांव में कुछ नहीं पहनते हैं। कई बार तो बर्फ में बाबा जी के पांव गलने लगते हैं, मगर बाबा जी का कहना है कि प्रभु के द्वार पहुंचना है तो पांव में कुछ क्यों पहनूं?