भांडीरवन जहां दूध जैसा हो जाता है जल, स्नान करने से संतान की जरूर होती है प्राप्ति bhaandeeravan jahaan doodh jaisa ho jaata hai jal, snaan karane se nishchit roop se praapt hota hai

अधिकांश लोगों को यह मालूम है कि लोग जानते हैं की भगवान श्रीकृष्ण का विवाह रुक्मणि (raadha raanee aur bhagavaan shreekrshn ka vivaah nahin hua.जी के साथ हुआ है। मगर, गर्ग संहिता में साफ दिया है

अधिकांश लोगों को यह मालूम है कि राधा रानी और भगवान श्रीकृष्ण का विवाह नहीं हुआ। (raadha raanee aur bhagavaan shreekrshn ka vivaah nahin hua) लोग जानते हैं की भगवान श्रीकृष्ण का विवाह रुक्मणि जी के साथ हुआ है। मगर, गर्ग संहिता में साफ दिया है कि राधा रानी और भगवान श्री कृष्ण का विवाह हुआ है। भांडीरवन (bhandirvan) में पूरे विधि विधान से साक्षात ब्रह्मा जी ने उपस्थित होकर विवाह कराया है। भांडीरवन (bhandirvan) एक ऐसा स्थान है जहां कुंए का जल यदि आपने आचमन कर लिया तो पूरे तीर्थों का पुण्य एक साथ मिल जाता है। साल में एक बार सोमवती अमावस्या के दिन भांडीरवन (bhandirvan) स्थित कुंए का जल दूध जैसा हो जाता है। ऐसी मान्यता है कि इस जल्द से स्नान करने पर सभी मनोकामना पूर्ण होती हैं और संतान की जरूर प्राप्ति होती है। इसीलिए सोमवती अमावस्या के दिन यहां आस्था का सैलाब उमड़ पड़ता है। भांडीरवन में ही बलराम जी ने विश्राम किया था आज भी वह स्थान है जहां पर बलराम जी ने अपना मुकुट रखा था। दूर-दूर से आए भक्तगण यहां चूल्हे पर प्रसाद भी बनाते हैं। ऐसी मानता है कि चूल्हे पर प्रसाद बनाने से मनौती जरूर पूर्ण होती है।


वत्सासुर का किया था वध

भांडीरवन (bhandirvan) में यमुनाजी के निकट भगवान श्रीकृष्ण ने वत्सासुर नामक राक्षस का वध किया था। ऐसा बताया जाता है कि भगवान श्रीकृष्ण गोचरण कर रहे थे, तभी कंस द्वारा भेजा गया वत्सासुर गायों के बीच में आ गया। कंस ने वत्सासुर को भगवान श्रीकृष्ण के वध के लिए भेजा था। इसलिए राक्षस बछड़े का रूप बनाकर गायों के बीच में आ गया था। मगर भगवान श्रीकृष्ण ने उसे पहचान लिया। उन्होंने गऊ माता और गऊ पालकों की रक्षा के लिए वत्सासुर का वध कर दिया।  

भगवान श्रीकृष्ण सभी तीर्थों को बुला लिया

वत्सासुर का वध करने के बाद सभी गोपालको ने भगवान श्रीकृष्ण से दूरी बना ली। उनका कहना था कि श्रीकृष्ण ने बछड़े की हत्या की है, इसलिए उन्हें गौ हत्या लगी है। भले ही राक्षस बछड़े के भेष में आया हो, मगर वो था तो बछड़ा ही। इस पर भगवान श्रीकृष्ण से गोपालको ने कहा कि उन्हें सभी तीर्थों पर जाकर स्नान करना होगा। तब वह पवित्र होंगे और उसके बाद तभी उनके साथ खेलेंगे। भगवान श्रीकृष्ण ने कहा कि यदि वह सभी तीर्थों को एक ही स्थान पर बुला लें तो। इस पर भगवान श्रीकृष्ण के सभी सखा आश्चर्यचकित हो गए। भगवान श्री कृष्ण की बंसी से भांडीरवन में ही कुंए का निर्माण किया। उस कुंए को वेणु कूप के नाम से जाना जाता है। और भगवान श्रीकृष्ण के निवेदन पर सभी तीर्थ यहां पर आ गए। भगवान श्रीकृष्ण ने उसी कुंए में स्नान किया और उसके बाद ग्वाल बाल, सखा सब उनके साथ खेलने को तैयार हो गए। इसलिए ऐसी मान्यता है कि जो भी उस कुंए में स्नान कर लेता है उसकी सारी मनोकामना पूर्ण होती है।

 

कुंए का जल हो जाता है दूध जैसा

ऐसा बताया जाता है कि साल में एक बार सोमवती अमावस्या के दिन जिस कुंए का निर्माण भगवान श्रीकृष्ण ने बंसी से किया था। उसका जल एकदम दूध जैसा हो जाता है। इसलिए सोमवती अमावस्या के दिन यहां पर बहुत बड़ा मेला लगता है। देश भर से भक्तगण इस मेले में शामिल होने के लिए आते हैं और उसके जल से स्नान करते हैं। 84 कोसी परिक्रमा मार्ग से लेकर करीब एक किमी अंदर भांडीरवन तक भक्तों का सैलाब दिखाई देता है। ऐसा बताया जाता है कि जिन स्त्रियों को संतान नहीं होती है, वह यदि कुंए के जल से स्नान कर लेती हैं उन्हें संतान की प्राप्ति जरूर होती है। साथ ही कोई भी मनोकामना लेकर सच्चे मन से आता है तो वो जरूर पूर्ण होती है।

मनौती के लिए बनाते हैं सातिया

भांडीरवन (bhandirvan) में कुंए के एकदम ठीक बने मंदिर में श्रद्धालुगण सातिया भी बनाते हैं। ऐसा बताया जाता है कि यहां सातिया मनौती के लिए बनाई जाती है। बहुत सारे भक्त अपनी मनौती लेकर आते हैं और सातिया बनाते हैं। और वह प्रार्थना करके जाते हैं कि मनौती पूर्ण होने पर दोबारा वो आएंगे और फिर सातिया बनाएंगे और पूजन अर्चन करेंगे। इसलिए गऊ माता के गोबर से बहुत सारी सातिया भी आपको देखने को मिल जाएंगी।

ऐसे पहुंचे भांडीरवन, आपको होगी सुविधा

भांडीरवन (bhandirvan) मथुरा जिले के मांट तहसील में स्थित है। मथुरा से करीब 25 किलोमीटर की दूरी पर यह है। वृंदावन से करीब 15 किलोमीटर दूरी पर यह स्थान पड़ेगा। मथुरा स्टेशन से वृंदावन होते हुए पानी गांव और मांट होते हुए भांडीरवन पहुंचा जा सकता है। यदि नोएडा और दिल्ली की तरफ से आ रहे हैं तो हाईवे के माध्यम से भांडीरवन पहुंचा जा सकता है। यह 84 कोसी परिक्रमा से करीब एक किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इसलिए भांडीरवन पहुंचने के लिए छोटे वाहन भी मिल सकते हैं। यदि आप अपने वाहन से नहीं आए हैं तो बैटरी रिक्शा, ऑटो टेंपो भी ले सकते हैं। यहां पार्किंग की भी सुविधा है।