अनन्य भक्ति से प्रगट हुए श्री बांके बिहारी जी, फिर दुनिया ने देखा चमत्कार

वृंदावन भगवान श्री कृष्ण की बाल लीला स्थली है, यहां कन्हैया ने अनेक लीलाएं की है। इसीलिए वृंदावन कन्हैया की भक्ति में डूबा रहता है और यहां की रज अमृत्तुल्य है।

वृंदावन भगवान श्री कृष्ण की बाल लीला स्थली है, यहां कन्हैया ने अनेक लीलाएं की है। इसीलिए वृंदावन कन्हैया की भक्ति में डूबा रहता है और यहां की रज अमृत्तुल्य है। यहां भगवान श्रीकृष्ण श्री बांके बिहारी के रूप में विराजमान हैं। देश ही नहीं बल्कि दुनिया भर से तमाम भक्त श्री बांके बिहारी लाल के दर्शन के लिए आते हैं। प्रतिदिन लाखों भक्त श्री ठाकुर बांके बिहारी जी का दर्शन कर अपने जीवन को धन्य बनाते हैं। श्री बांके बिहारी लाल का प्राकट्य भी अद्भुत है। वह स्वयं ही नहीं प्रकट हुए बल्कि अनन्य भक्ति में लीन महान संगीतकार स्वामी हरिदास जी की भक्ति से प्रसन्न होकर प्रकट हुए हैं, इसीलिए श्री बांके बिहारी के प्रति लोगों की आस्था और बढ़ती चली गई। जनमानस में यह फैल गया कि अगर आप निष्कपट, निश्चल और भाव से भक्ति करते हैं तो जरूर प्रभु किसी ना किसी रूप में आपको दर्शन देंगे, जैसा कि स्वामी हरिदास जी को भगवान श्री कृष्ण ने श्री बांके बिहारी के रूप में दर्शन दिया है आइए, श्री बांके बिहारी मंदिर के बारे में संपूर्ण जानकारी करते हैं और कैसे मंदिर पहुंचा जाए इसके बारे में भी आपको जानकारी देते हैं। 

बांके बिहारी मंदिर में उमड़ा आस्था का सैलाब

वृंदावन के राजपुर गांव में 1480 में स्वामी हरिदास जी का जन्म हुआ था। वह भगवान श्री कृष्ण के अनन्य भक्त थे। बचपन से ही वह कन्हैया की भक्ति में लीन रहा करते थे पूरे वृंदावन में उनकी भक्ति की चर्चा धीरे-धीरे होने लगी थी। बालावस्था में ही उन्होंने घर बार सब त्याग दिया और कृष्ण की भक्ति में लीन हो गए। उस समय वृंदावन निकुंज बनो से घिरा रहता था चारों तरफ लता और पता रहती थी। वनों से ढका हुआ वृंदावन कृष्ण की अनंत भक्ति में डूबा रहता था। स्वामी हरिदास जी ने यमुना किनारे निधिवन में अपना स्थान जमाया। भजन और संगीत के माध्यम से उन्होंने भगवान श्री कृष्ण की भक्ति शुरू कर दी। संगीत के माध्यम से पूरे समय भगवान श्री कृष्ण की भक्ति में डूबे रहते थे। निधिवन वह स्थान है यहां भगवान श्री कृष्ण ने महारास रचाया है। आज भी मान्यता है कि भगवान श्री कृष्ण प्रतिदिन निधिवन में रास रचाते हैं। 

श्री बांके बिहारी जी का भावपूर्ण दर्शन

बिहारी जी के रूप में दिया दर्शन

आखिरकार एक दिन स्वामी हरिदास जी की भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान श्री कृष्ण ने बांके बिहारी के रूप में उन्हें दर्शन दिया। यह अद्भुत और अलौकिक दर्शन देख कर स्वामी हरिदास जी अभिभूत हो गए। उन्हें लगा कि मानो उनके जीवन की तपस्या पूरी हो गई।  वह प्रसन्नता में  भाव विभोर होकर नृत्य करने लगे। उसके बाद बाके बिहारी जी को निधिवन से यमुना जी के किनारे ही मंदिर में स्थापित किया गया ।वर्तमान में यही मंदिर ठाकुर श्री बांके बिहारी मंदिर के रूप में सारी दुनिया में प्रसिद्ध है। ऐसी मान्यता है जो भी बिहारी जी के दर्शन सच्चे मन से करता है उसकी सभी मनोकामना बिहारी जी पूर्ण करते हैं।

श्री बांके बिहारी जी के दर्शन को लालायित भक्त

स्वामी हरिदासजी के पास शयन करने आ जाते थे बिहारी जी

स्वामी हरिदास जी पर बिहारी जी की असीम कृपा थी। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जाता है कि कई बार स्वामी हरिदास जी के पास आकर भगवान श्रीकृष्ण शयन कर लिया करते थे। एक बार ऐसे ही बाल स्वरूप कन्हैया स्वामी हरिदास जी के पास आकर शयन करने लगे। जब स्वामी जी ने पूछा कौन है तो फिर झट से कन्हैया वहां से चले गए और उनकी मुरली वहीं पर रह गई जब मंदिर खोला गया तो देखा गया कि बिहारी जी के हाथ से मुरली गायब थी। लोगों ने सोचा की बिहारी जी की मुरली चोरी हो गई हे। गोसाई मुरली खोजने लगे, तभी स्वामी हरिदास जी के पास मुरली मिल गई। लोगों ने जब पूछा तो स्वामी हरिदास जी ने बताया कि एक छोटा बालक उनके पास आकर सोया था, शायद उसी की मुरली होगी। यह देखकर हर कोई आश्चर्य में पड़ गया। 

श्री बांके बिहारी मंदिर में उमड़ा आस्था का सैलाब

यमुनाजी के किनारे विराजमान हैं बिहारीजी

ठाकुर बांके बिहारी जी का मंदिर यमुना जी से 500 मीटर की दूरी पर स्थित है, आज से 100 साल पहले यमुना जी बिहारी जी के एकदम मंदिर से निकट होकर निकलती थी। मगर धीरे-धीरे आबादी बढ़ती गई और यमुना जी की दूरी भी बढ़ गई। परिक्रमा मार्ग से करीब 100 मीटर की दूरी पर बिहारी जी का मंदिर है। हालांकि, मंदिर पहुंचने के लिए कई रास्ते हैं, जिससे भक्तगण सुविधाजनक तरीके से बिहारी जी के दर्शन कर सकते हैं। मुख्य द्वार मंदिर का यमुना जी के किनारे परिक्रमा मार्ग से मंदिर के लिए जाता है। इसके अलावा अटल्ला चुंगी, टटिया स्थान, इस्कान मंदिर आदि से भी होकर बिहारी जी मंदिर के लिए रास्ता जाता है।

श्री बांके बिहारी जी का मनोहारी दर्शन

बिहारीजी के दर्शन करते समय रखें सावधानी

यदि आप बिहारी जी के दर्शन करने के लिए जा रहे हैं तो कुछ सावधानी जरूर रखें । सबसे पहले आप वजनदार कोई भी सामान ना ले जाए, बड़ा बैग झोला, थैला आदि सब धर्मशाला,  होटल या किसी आश्रम में रखकर ही जाए। चश्मा लगाकर बिल्कुल ना जाएं क्योंकि वहां बंदर तुरंत चश्मा लेकर भाग जाते हैं, इससे आपको दिक्कत हो सकती है। यदि बहुत जरूरत है तो चश्मे को किसी डोरी आदि से कसकर बांध लें। जिससे बंदर लेकर भाग ना जाए। साथ ही भक्तों का सैलाब उमड़ने के चलते वहां धक्का-मुक्की होती है उससे थोड़ा सा बचकर रहें अगर परिक्रमा लगाते हैं और बिहारी जी का दर्शन करना चाहते हैं तो नंगे पैर होकर जाएं तो सुविधा होगी। क्योंकि आपके पदवेश उतरवा लिए जाते हैं, जिससे आपको दर्शन के बाद उन्हें ढूंढने में दिक्कत होती है।