इस जगह गोपियों ने की थी पूजा, फिर कृष्ण के साथ किया महारास

भगवान श्रीकृष्ण को पाने के लिए गोपिकाएं तमाम जतन किया करती थीं। इसलिए श्रीकृष्ण को अपना पति बनाने के लिए उन्होंने मां कात्यानी का पूजन भी किया था।

भगवान श्रीकृष्ण को पाने के लिए गोपिकाएं तमाम जतन किया करती थीं। इसलिए श्रीकृष्ण को अपना पति बनाने के लिए उन्होंने मां कात्यानी का पूजन भी किया था। वृंदावन में राधाबाग में माता कात्यानी का मंदिर स्थित है। गोपियों ने राधा रानी के साथ यमुना नदी के किनारे मां कात्यानी की बालू से प्रतिमा बनाई थी। फिर सभी ने मिलकर मां से प्रार्थना की कि हे मां मुझे वरदान दो कि अगले जन्म में भगवान श्रीकृष्ण उनके पति के रूप में आए। इसे देखते हुए भगवान श्रीकृष्ण ने कार्तिक मास में शरद पूर्णिमा के दिन महारास का आयोजन किया। इसमें भगवान श्रीकृष्ण ने अपने ही तरह के अनेकों रूप बना लिए। इस तरह  श्रीकृष्ण ने सभी गोपियों के साथ महारास किया। ऐसा बताया जाता है कि यह सब मां कात्यायनी के आशीर्वाद से संभव हो सका। इसीलिए जो भी श्रद्धालु वृंदावन आते हैं। वह अपनी मनोकामना पूर्ण करने के लिए मां कात्यायनी देवी के दर्शन करते हैं। सच्चे मन से जिसने भी मां का पूजन किया तो उसकी  मनोकामना जरूर पूर्ण होती है। 

अनन्य भक्त गोपियों की पूर्ण की मनोकामना

गोपियां भगवान श्रीकृष्ण की अनन्य भक्त थीं। वह हर समय कन्हैया के ध्यान में ही मुग्ध रहती थीं। एक बार सभी गोपियों के मन में आया कि भगवान श्रीकृष्ण को वह पति के रूप में वरण करें। इसके लिए उन्होंने मां कात्यायनी के पूजन का निर्णय लिया। नवरात्र के छठवें दिन मां कात्यायनी की पूजा होती है। ऐसी मान्यता है कि सच्चे मन से जिसने भी मां कात्यायनी की पूजा की तो मां उनकी मनोकामना पूर्ण करती हैं। इसलिए सभी सखियां राधा रानी के साथ यमुना जी के किनारे पहुंच गईं। वहां पर उन्होंने बालू से  मां कात्यायनी की प्रतिमा बनाई। फिर यमुना जी में 41 दिनों तक लगातार मां की तपस्या की। राधा रानी और गोपियों की तपस्या से भगवान श्रीकृष्ण प्रसन्न हो गए। इसलिए कार्तिक मास में शरद पूर्णिमा के दिन महारास में सभी को अलौकिक भक्ति का दर्शन कराया। सभी गोपियों के साथ भगवान श्रीकृष्ण ने नृत्य करके उन्हें अलौकिक भक्ति का आनंद प्रदान किया।


संत को आया सपना, बनवा दिया भव्य मंदिर

गोपियों ने भगवान श्रीकृष्ण की द्वापर युग में भक्ति की थी। इसके बाद से यह स्थान विलुप्त सा हो गया था। किसी को यह नहीं पता था कि मां कात्यायनी का स्थान कहां पर है। मंदिर के प्रबंधक राजेंद्र शर्मा ने बताया कि हिमालय में तपस्या कर रहे संत केशवानंद महाराज को एक दिन स्वप्न आया। स्वप्न में उन्हें बताया गया कि वृंदावन में मां कात्यानी का मंदिर है, वहां पर जाकर मंदिर का जीर्णोद्धार कराओ। केशवानंद तपस्वी थे और इसलिए वह वृंदावन चल पड़े। 1923 में केशवानंद वृंदावन पहुंचे। मगर उन्हें यह नहीं पता था कि माता रानी का स्थान कहां पर है? इसलिए उन्होंने 11 वर्ष तक कठोर तपस्या की इसके बाद उन्हें फिर सपना आया, जिसमें पता चला की मां कात्यायनी का स्थान तीन ओर से यमुना जी घिरा हुआ है। फिर केशवानंद महाराज ने मंदिर का निर्माण कराया।

मां का बना है भव्य भवन, रमणीय है यह स्थल

राजेंद्र शर्मा बताते हैं कि केशवानंद महाराज ने राधाबाग में मां कात्यायनी का भवन का निर्माण कराया। मंदिर विशाल परिसर में है। मंदिर के प्रवेश करते ही विशाल भवन का दर्शन हो जाता है। चारों तरफ आपको संगमरमर से बनी दीवारे और फर्श दिखाई देंगी। मां एक भव्य भवन में विराजमान हैं। बड़ी संख्या में श्रद्धालु प्रतिदिन माता रानी के दर्शन करते हैं। मंदिर में आपको प्राचीन कलाकृतियां भी देखने को मिलेंगी। विशाल यज्ञशाला भी है। तालाब में कमल खिलता हुआ दिखाई देगा। मछली और कछुए भी यहां पर हैं। मंदिर में साफ सफाई देखते ही बनती है। यह एक रमणीय स्थल है।

मां भक्तों की मनोकामना करती हैं  पूर्ण 

मंदिर के प्रबंधक राजेंद्र शर्मा बताते हैं कि जो भी माता रानी के दरबार में आता है मां उसकी मनोकामना जरूर पूर्ण करती हैं। उन्होंने बताया कि भगवान श्री कृष्ण को अपने पति के रूप में पाने के लिए गोपियों ने मां कात्यायनी की पूजा की थी। इसलिए जो भी कन्या सुयोग वर के लिए मां की पूजा करती है तो उसकी मनोकामना जरूर पूर्ण होती है। नवरात्र के समय मंदिर में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ता है। साथ ही अन्य समस्याओं के निवारण के लिए भी मंदिर परिसर में जाप और महायज्ञ होता है। 

 इस प्रकार पहुंच सकते हैं मंदिर

मां कात्यायनी देवी का मंदिर उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले के वृंदावन में स्थित है। मथुरा रेलवे स्टेशन से करीब 20 किमी दूरी पर है। वृंदावन में यह मंदिर यमुना जी से तीन ओर से घिरा हुआ है। यह स्थान राधाबाग के नाम से जाना जाता है। वृंदावन में परिक्रमा मार्ग पर टटिया स्थान से लेकर अटल्ला चुंगी तक किसी भी मार्ग से मंदिर जा सकते हैं। टटिया स्थान से अंदर सीधा रास्ता मां कात्यानी देवी मंदिर के लिए पहुंचता है। इसके बाद परिक्रमा मार्ग पर पानी घाट तिराहा मोड़ अटल्ला चुंगी आदि स्थानों से भी मंदिर पहुंचा जा सकता है। यदि  आप सुबह छह बजे मंदिर जाते हैं तो चार पहिया वाहन से आराम से पहुंच सकते हैं। इसके बाद आठ बजे ट्रैफिक शुरू होने पर चार पहिया वाहन रोक दिए जाते हैं।