प्रेमानंद महाराज का इस प्रकार कर सकते हैं दर्शन, प्रश्न भी पूछने का मिलेगा मौका

राधा रानी के अनन्य भक्त प्रेमानंद गोविंद शरण महाराज के दर्शन के लिए इस समय हर कोई लालायित रहता है उनकी कोशिश होती है कि बस एक बार किसी भी तरह से प्रेमानंद महाराज जी के दर्शन हो जाए

राधा रानी के अनन्य भक्त प्रेमानंद गोविंद शरण महाराज के दर्शन के लिए इस समय हर कोई लालायित रहता है। उनकी कोशिश होती है कि बस एक बार किसी भी तरह से प्रेमानंद महाराज जी के दर्शन हो जाए। इसलिए वृंदावन में केलीकुंज स्थित महाराज जी के आश्रम में देश के कोने कोने से भक्त पहुंचते हैं। क्रिकेटर विराट कोहली अपनी पत्नी और फिल्म अभिनेत्री अनुष्का शर्मा व बेटी के साथ महाराज जी का दर्शन कर आशीर्वाद ले चुके हैं। उसके बाद से और अधिक क्रेज बढ़ता चला जा रहा है। महाराज जी के दर्शन के लिए परिक्रमा मार्ग पर शाम 6 बजे से ही भक्तों के आने का क्रम शुरू हो जाता है। पूरी रात भक्त जगते हैं और सुबह करीब 2 बजे उन्हें आश्रम में प्रवेश मिल पाता है फिर 4:15 से महाराज जी का सत्संग शुरू हो जाता है। आइए आपको बताते हैं आप किस प्रकार से महाराज जी का दर्शन कर सकते हैं और उनसे अपने प्रश्न पूछ सकते हैं।

बचपन से ही अधायत्म से रहा जुड़ाव

प्रेमानंद महाराज जी का बचपन का नाम अनिरुद्ध पांडेय था। आप कानपुर के रहने वाले हैं। बचपन से ही महाराज जी का जुड़ाव अध्यात्म की ओर था। पढ़ाई के समय ही वह धार्मिक पुस्तकें पढ़ते रहते थे। परिवार में दादा जी और पिताजी भी संन्यासी रहे। इसलिए किशोरावस्था में ही प्रेमानंद जी विरक्त की ओर बढ़ने लगे थे। कुछ वर्षों तक उन्होंने बनारस में रहकर त्याग और तपस्या की। फिर वृंदावन चले आए। यहां पर कठोर त्याग और साधना की। कई कई दिनों तक महाराज जी को प्रसाद नहीं मिलता था। मगर उनका मन तनिक भी विचलित नहीं हुआ। महाराज जी सिर्फ भक्ति में रमे रहते थे। इसी प्रकार एक दिन राधा जी की कृपा हुई और फिर प्रेमानंद महाराज जी जन-जन के हृदय में व्याप्त हो गए।

दर्शन के लिए कोई रजिस्ट्रेशन नहीं होता है

क्रिकेटर विराट कोहली और उनकी पत्नी फिल्म अभिनेत्री अनुष्का शर्मा के वृंदावन आकर प्रेमानंद महाराज जी के दर्शन करने के बाद से भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा। हजारों की संख्या में भक्त प्रतिदिन वृंदावन पहुंचकर केलीकुंज में दर्शन करने लगे। इससे देश भर के तमाम भक्तों को यह जानने की उत्सुकता पैदा हो गई कि प्रेमानंद महाराज जी का दर्शन कैसे किया जा सकता है? सबसे पहली बात की महाराज जी के दर्शन के लिए कोई रजिस्ट्रेशन नहीं है। आप सहज और साधारण तरीके से जैसे संत का दर्शन करते हैं, उसी प्रकार से महाराज जी का दर्शन कर सकते हैं। 

रात 12 बजे से दर्शन के लिए लगती है लाइन

प्रेमानंद महाराज जी के दर्शन के लिए रात 12:00 बजे से भक्तों की लंबी कतार लग जाती है। हालांकि, बहुत सारे भक्तगण शाम को पांच, छह बजे से ही केलीकुंज के बाहर परिक्रमा मार्ग पर एकत्र होने लगते हैं। मगर, महाराज जी के शिष्यगण उनसे बार-बार निवेदन करते हैं कि महाराज जी का दर्शन बहुत ही साधारण तरीके से होता है। इसलिए बेवजह वह परेशान न हों। रात 12 बजे आराम से केलीकुंज आ सकते हैं। हालांकि महाराज जी से साक्षात्कार करने के लिए भक्तगण रात में ही जुटना प्रारंभ कर देते हैं। उनके मन में यह आशंका बनी रहती है कि यदि थोड़ी सी भी चूक हुई तो महाराज जी के दर्शन से वंचित रह जाएंगे।  इसलिए भक्त रात में थोड़ी मुश्किल उठाकर भी दर्शन करना चाहते हैं


रात दो बजे से एंट्री, तीन बजे आते हैं महाराज जी

केलीकुंज के बाहर महाराज जी के दर्शन के लिए भक्तों की लगी भीड़ भजन कीर्तन करती हुई नजर आती है। रात 9 बजे से ही बहुत सारे भक्त भजन कीर्तन  करना शुरू कर देते हैं। रात 2 बजे भक्तों की एंट्री शुरू हो जाती है। उन्हें केलीकुंज स्थित आश्रम में प्रवेश दिया जाता है। हालांकि, आश्रम में 150 से 200 भक्तों की ही बैठने की व्यवस्था है। इसलिए पंक्ति में लगे हुए भक्तों को क्रमबद्ध तरीके से प्रवेश कराया जाता है, जहां अधिक संख्या हो जाती है, वहां उन्हें रोक दिया जाता है। तड़के 3 बजे ही प्रेमानंद महाराज जी आते हैं और वह आश्रम में प्रवेश करते हैं। 


सुबह 4.15 बजे से प्रारंभ हो जाता है सत्संग

फिर सुबह 4:15 बजे से महाराज जी का सत्संग प्रारंभ हो जाता है। पहले राधा नाम का जाप होता है, इस कीर्तन में जब सभी भक्त एकदम मुग्ध हो जाते हैं तो फिर महाराज जी प्रवचन के लिए आते हैं। सुबह करीब 6 बजे तक महाराज जी का प्रवचन लगातार चलता है। कोई कथा और प्रसंग को लेकर महाराज जी नित्य आगे बढ़ते हैं। इसके बाद मंगला आरती होती है, नौका विहार, पूजन आदि होता है। कुछ देर बाद महाराज जी फिर स्थान पर आते हैं और भक्तों के प्रश्नों का उत्तर देते हैं।

प्रश्न पूछने के लिए यह है प्रक्रिया

देशभर से आए हुए भक्तों के अंदर सबसे बड़ी जिज्ञासा रहती है कि वह महाराज जी से अपने मन की बात पूछ सकें। इसीलिए वह पहले से ही अपने मन में कोई न कोई प्रश्न लेकर आते हैं। मगर जिस दिन आप दर्शन करने आते हैं, उसी दिन सीधे तौर पर आप महाराज जी से प्रश्न नहीं पूछ सकते हैं। आपको इसके लिए एक या दो दिन पहले सुबह 9 बजे से आश्रम में रजिस्ट्रेशन कराना पड़ेगा। केली कुंज आश्रम में जाकर अपना नाम पता और अपना प्रश्न लिखवाना पड़ेगा। उसके बाद अगले दिन आपका नंबर आएगा। इसके लिए बकायदा कार्यालय से आपको सूचित किया जाता है, फिर आप महाराज जी के पास पहुंचकर अपने प्रश्न पूछ सकते हैं।

सत्संग में इन नियमों का करना  होता है पालन

प्रेमानंद महाराज जी के सत्संग में शामिल होने के लिए कड़े नियमों का भी पालन करना होता है। आप सत्संग के दौरान करीब 2 घंटे तक अपना मोबाइल नहीं चालू कर सकते हैं। यदि आप लगातार दो घंटे बैठने की स्थिति में हैं तभी आपको महाराज जी के सामने बैठने का मौका मिल सकेगा। क्योंकि महाराज जी के शिष्य पहले ही आपसे बकायदा पूछताछ कर लेते हैं। यदि कहीं आपका स्वास्थ्य गड़बड़ है या बैठने में दिक्कत है तो आपको मना कर दिया जाएगा। इससे अन्य भक्तों को कोई दिक्कत न हो। सत्संग में खासकर छोटे बच्चे को लेकर नहीं बैठने दिया जाता है। वह बाहर लगी स्क्रीन पर महाराज जी के साथ सत्संग सुन सकते हैं। क्योंकि छोटे बच्चे करीब दो घंटे तक लगातार नहीं बैठ सकते हैं।

सुबह आते समय भी होते हैं दर्शन

यदि आप सत्संग में शामिल नहीं हो पाते हैं और आप करीब 2 घंटे तक लगातार नहीं बैठ पाते हैं तो आप तड़के 3:00 बजे प्रेमानंद महाराज जी के दर्शन कर सकते हैं। महाराज जी प्रेम मंदिर के निकट स्थित एक अपार्टमेंट से पैदल निकलते हैं तब आप उनके दर्शन कर सकते हैं। अपार्टमेंट के बाहर भी बहुत सारे भक्त महाराज जी से दर्शन करते हैं और उसके बाद केलीकुंज आश्रम से करीब 200 मीटर पहले ही परिक्रमा मार्ग पर लंबी कतार भक्तों की लग जाती है। इससे पहले भक्त महाराज जी के लिए रंगोली आदि तैयार कर लेते हैं और महाराज जी का दर्शन करते हैं। तड़के तीन बजे जब महाराज जी निकलते हैं तो हाथ जोड़ते हुए सभी का अभिवादन स्वीकार करते हैं। उस समय महाराज जी का आभामंडल देखते ही बनता है।  इसलिए एक बार फिर आप सब जान लीजिए कि महाराज जी के दर्शन के लिए कोई रजिस्ट्रेशन नहीं होता है। सिर्फ आम भक्तों की ही तरह आप भी रात में 12:00 बजे के करीब केलीकुंज आश्रम के बाहर खड़े होकर दर्शन कर सकते हैं। यदि आपको अंदर प्रवेश मिल जाएगा तो सत्संग में भी शामिल हो जाएंगे।