सावन में क्यों चढ़ाते हैं भोलेनाथ पर जल, इसके पीछे क्या है मान्यता

सावन में भगवान भोलेनाथ को जल चढ़ाने के लिए कांवड़ियों का जत्था निकल पड़ा है। मेरठ हरिद्वार हाइवे हर हर बम बम के जयकारों से गूंज उठा है। हरिद्वार में हर जगह भोले के भक्त दिखाई दे रहे हैं। 

सावन में भगवान भोलेनाथ को जल चढ़ाने के लिए कांवड़ियों का जत्था निकल पड़ा है। मेरठ हरिद्वार हाइवे हर हर बम बम के जयकारों से गूंज उठा है। हरिद्वार में हर जगह भोले के भक्त दिखाई दे रहे हैं। पूरा हरिद्वार शिवमय हो गया है। कांवड़ियों में अथाह आस्था का सैलाब देखने को मिल रहा है। भोले के भक्तों में भक्ति का सैलाब देखते ही बनता है। लगातार बारिश होने के बावजूद भी शिवभक्त के कदम रुक नहीं रहे हैं। आइए, जानते हैं कि सावन में क्यों क्यों चढ़ाते हैं भोलेनाथ पर जल, क्या है इसके पीछे मान्यता?

कई पौराणिक कथाएं हैं कांवड़ की 

हिंदी के 12 महीनों में सावन का महीना भगवान भोलेनाथ को सबसे प्रिय है। सावन में जलाभिषेक को लेकर और कावड़ को लेकर तमाम पौराणिक कथाएं हैं। ऐसा बताया जाता है परम शिवभक्त रावण में भी भगवान भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए कावड़ यात्रा की थी और उन्हें जल चढ़ाया था। त्रेतायुग में मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम ने स्वयं रामेश्वरम भगवान की पूजा अर्चना की और उन्हें जलाभिषेक किया था। भगवान परशुराम के भी कावड़ और जलाभिषेक की कथाएं वर्णित हैं। इसलिए सावन के महीने में कांवड़ चढ़ाने की परंपरा अनादि काल से चली आ रही है।

शीतलता प्रदान करने के लिए भी करते हैं जलाभिषेक

समुद्र मंथन के समय समुद्र से निकले विष को भगवान भोलेनाथ ने विषपान कर लिया था। यदि भगवान भोलेनाथ विष को अपने कंठ में नहीं उतारते तो पूरी सृष्टि का विनाश हो जाता है। इसलिए भगवान भोलेनाथ ने लोक कल्याण के लिए विष को अपने गले में उधार लिया था। इसी के बाद से उन्हें नीलकंठ भी कहा जाने लगा। विष अपने गले में उतारने से भगवान भोलेनाथ के गले में तेजी से जलन होने लगी। इसलिए सभी देवी देवताओं ने भगवान भोलेनाथ को जल अर्पित किया जिससे उन्हें शीतलता प्रदान हुई। इसके बाद से भगवान भोलेनाथ को जल अर्पित किया जाता है, जिसे जलाभिषेक कहते हैं।

भगवान भोलेनाथ की होती है कृपा

आगे की कथाओं में यह स्पष्ट हो गया कि सावन के महीने में भोलेनाथ पर क्यों चढ़ाते हैं जल, इसके पीछे क्या है मान्यता। हां, 
पौराणिक मान्यता के अनुसार विष पीने के बाद से भगवान भोलेनाथ के कंठ में काफी जलन होने लगी थी। चूंकि सावन बारिश का महीना है। जिससे शीतलता बनी रहती है। इसलिए सावन का महीना भगवान भोलेनाथ को बहुत प्रिय है। सावन के महीने में प्रत्येक सोमवार जो भी व्यक्ति व्रत रखता है भगवान भोलेनाथ की पूजा अर्चना करता है और उन्हें जल अर्पित करता है भगवान भोलेनाथ उसकी सभी मनोकामना पूरी करते हैं। 

बहुत सरल है शिव की भक्ति

भगवान भोलेनाथ की भक्ति बहुत सरल है। उन्हें प्रसन्न करने के लिए बहुत अधिक सामग्री की जरूरत नहीं होती है। भगवान भोलेनाथ जल, पुष्प, बेलपत्र, दूब, धतूरा, दूध आदि चढ़ाने से ही प्रसन्न हो जाते हैं। इसीलिए जो भी सच्चे मन से भगवान भोलेनाथ की पूजा करता है उन पर वह असीम कृपा करते हैं। आप सभी को पता चल गया होगा कि सावन में भगवान भोलेनाथ को क्यों चढ़ाते हैं जल, इसके पीछे क्या है मान्यता?

इन बातों का रखना चाहिए विशेष ध्यान

सावन के महीने में इन बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए

=प्रत्येक सोमवार को व्रत रखें और शिव मंदिर में जलाभिषेक जरूर करें

=कांवड़ नंगे पैर लेकर चलना चाहिए

=कांवड़ को कहीं नीचे नहीं रखना चाहिए, बांस बल्ली और किसी साफ सुथरे स्थान पर रख सकते हैं

=मन में सात्विक विचार बनाएं रखें, सदैव भोलेनाथ का स्मरण करते रहें

=लहसुन, प्याज आदि का प्रयोग एकदम न करें