त्यागी और महान संतों के दर्शन के लिए, आखिर क्यों तपस्वी आश्रम पहुंचते हैं भक्त
- 1694
- June 23, 2023
श्रीधाम वृंदावन में त्यागी, तपस्वी और महान संतों के दर्शन के लिए भक्त लालायित रहते हैं। श्री बांके बिहारी जी, राधा बल्लभ के दर्शन करते हैं, मगर उनकी कोशिश रहती है
श्रीधाम वृंदावन में त्यागी, तपस्वी और महान संतों के दर्शन के लिए भक्त लालायित रहते हैं। श्री बांके बिहारी जी, राधा बल्लभ के दर्शन करते हैं, मगर उनकी कोशिश रहती है कि वृंदावन में त्यागी और महान संतों के दर्शन करके अपने जीवन को धन्य बनाएं। वृंदावन में कई आश्रम आज भी हैं जो पौराणिक परंपराओं का निर्वहन करते हैं। यहां पर त्यागी, तपस्वी और महान संत कठोर से कठोर साधना करते हैं। हर समय प्रभु की भक्ति में लीन रहते हैं। प्राचीन समय में जैसे हमारे ऋषि, संत गण कुटिया बनाकर रहते थे, उसी प्रकार से वह कुटिया में रहते हैं। वृंदावन में परिक्रमा मार्ग पर श्याम कुटी के निकट तपस्वी आश्रम है, जहां पर पूज्य संतों के दर्शन होते हैं। इसलिए बड़ी संख्या में भक्त यहां संतो के दर्शन करने के लिए पहुंचते हैं।
आज भी कुटिया बनाकर रहते हैं संत
भले ही आज आधुनिकता की दौड़ हो, तमाम सुख सुविधाएं हों, मगर बहुत सारे ऐसे साधक और भक्त हैं, जो आज भी त्यागी और महान संतों के दर्शन के लिए लालायित रहते हैं, उनकी कोशिश होती है कि किसी भी तरह से पूज्य त्यागी, तपस्वी और महान संतो के दर्शन हो सके, जिससे वह अपना जीवन धन्य बना सकें। वृंदावन में परिक्रमा मार्ग पर स्थित तपस्वी आश्रम पूज्य संतों के कठोर साधना का केंद्र बिंदु बना हुआ है। जहां पर बड़े-बड़े आश्रम बन गए, ऐसी, कूलर पंखे लगे हुए हैं, सुविधाएं भरपूर हैं, वहीं पर इन सुविधाओं से दूर तपस्वी आश्रम में त्याग और तपस्या की पराकाष्ठा देखने को मिलती है। संतगण कुटिया बनाकर रहते हैं, कहीं पर आपको पक्का दिखाई नहीं देगी। मिट्टी में ही उनका बिस्तर लगता है, भजन कीर्तन भी वहीं पर करते हैं। प्रसाद आदि भी कच्चे चूल्हे पर होता है। इसलिए आज भी त्यागी और महान संतों के दर्शन करने के लिए भक्त तपस्वी आश्रम पहुंचते हैं।

सिर्फ सब्जी और फल खाकर रहते हैं संत
परिक्रमा मार्ग स्थित तपस्वी आश्रम में मौनी बाबा की साधना देखते ही बनती है। महाराज जी ने करीब 20 वर्ष से अन्न ग्रहण नहीं किया है, वह सिर्फ कच्ची सब्जी और फल ही ग्रहण करते हैं। सुबह 10 बजे के करीब पूजन आदि करने के बाद कद्दू, मूली, गाजर शिमला मिर्च आदि जो भी सब्जी उन्हें मिलती है, उसे वह ग्रहण करते हैं। कुछ फल आदि मिल जाता है तो महाराज जी ले लेते हैं, वैसे कोई लालसा नहीं रहती है। महाराज जी कागज पर लिखकर बताते हैं कि अधिक पका हुआ भोजन भक्ति में बाधक होता है, शरीर में आलस्य बना रहता है। इसलिए वह सिर्फ कच्ची सब्जी ही ग्रहण करते हैं।

अग्नि में तपते हैं और देश धर्म के लिए समर्पित रहते हैं
ऐसा नहीं कि हमारे पूज्यनीय संत, महात्मा सिर्फ भजन कीर्तन पूजा पाठ में ही व्यस्त रहते हैं, आज ही बहुत सारे संत महात्मा हैं जो कठोर साधना करते हैं और देश धर्म के लिए समर्पित रहते हैं। भारत माता के प्रति उनका इतना अनुराग है कि पल भर में प्राण न्योछावर करने से भी वह पीछे नहीं हटेंगे। इसीलिए त्यागी और महान संतों के दर्शन के लिए तपस्वी आश्रम में भक्तों की भीड़ लगी रहती है। यहां भीषण गर्मी में पूज्य संत महाराज अग्नि में तपते हैं। करीब 18 वर्ष तक अग्नि में तप कर उन्हें तपस्वी की उपाधि मिलती है। प्रत्येक वर्ष उनकी साधना कठोर होती जाती है। चारों तरफ अग्नि का घेरा होता है, वह धीरे धीरे बढ़ता जाता हैं। मई और जून की भीषण गर्मी जिसमें शरीर झुलस जाता है, ऐसे में संत अग्नि में तपस्या करते हैं।

सौभाग्यशाली को मिलता है यहां का प्रसाद
तपस्वी आश्रम में बहुत ही सौभाग्यशाली को यहां प्रसाद मिलता है। संत गण आज भी यहां चूल्हे पर ही प्रसाद बनाते हैं। अपने हाथों से मोटी मोटी टिक्कर, सब्जी, दाल आज का प्रसाद बनता है। ठाकुर जी को भोग लगाने के बाद फिर यही प्रसाद संत और भक्तगण ग्रहण करते हैं। बहुत सौभाग्यशाली होते हैं, जिन्हें यहां संतों के हाथ से बना प्रसाद मिलता है। इसलिए त्यागी और महान तपस्वी संतो के बीच में प्रसाद ग्रहण करके जीवन को लोग कृतार्थ बनाना चाहते हैं। उनकी कोशिश होती है की संत के हाथ की बनी एक टिक्कर भी उन्हें मिल जाए उनका जीवन धन्य हो जाए।

परिक्रमा मार्ग पर है आश्रम, बहुत आसानी से पहुंच सकते हैं
यदि आप भी त्यागी और महान संतो के दर्शन करना चाहते हैं तो तपस्वी आश्रम पहुंचकर दर्शन कर सकते हैं। तपस्वी आश्रम का पता बहुत सहज है, इससे आपको पहुंचने में कोई दिक्कत नहीं होगी। वृंदावन में परिक्रमा मार्ग पर टटिया स्थान से आगे बढ़ते हैं तो फूलडोल बिहारी आश्रम मिलेगा। यहां से आगे पानी घाट चौराहा मिलेगा, यहां से 200 मीटर आगे श्याम कुटी मिलेगी, यहीं से मात्र चार कदम आगे ही तपस्वी आश्रम आपको दिख जाएगा। यहां आपको त्यागी और महान संतों के दर्शन हो सकेंगे। दूसरा रास्ता भी है। आप पानी गांव की तरफ से आते हुए वृंदावन के अंदर परिक्रमा मार्ग पर पहुंचेंगे तो मोर कुटी से थोड़ा आगे यह आश्रम पड़ेगा। इस प्रकार आप दोनों रास्ते से तपस्वी आश्रम पहुंच सकते हैं।


Related Items
जय भोलेनाथ के साथ यदि बाबा ने मुस्कुरा दिया तो पूरी हो जाती है मनोकामना अक्षय पात्र में दो मिनट में बन जाता है 50 संतों का प्रसाद jay bholenaath ke saath yadi baaba ne muskuraaya to, pooree ho jaatee hai manokaamana, aksh paatr mein do minat mein ban jaata hai 50 santon ka prasaad
अटारी पर बैठी राधा रानी, दर्शन करते समय इन बातों का जरूर रखें ध्यान ataaree par baithee raadha raanee, darshan karate samay in baaton ka jaroor rakhen dhyaan