वृंदावन की परिक्रमा का ये है महत्व, इन स्थानों का दर्शन जरूर कीजिए

सनातन धर्म में परिक्रमा का बहुत महत्व है। देश में जहां पर भी धार्मिक स्थल है, वहां कहीं ना कहीं परिक्रमा के माध्यम से भक्तों को जोड़ने का प्रयास किया जाता है। ऐसे ही वृंदावन धाम है

सनातन धर्म में परिक्रमा का बहुत महत्व है। देश में जहां पर भी धार्मिक स्थल है, वहां कहीं ना कहीं परिक्रमा के माध्यम से भक्तों को जोड़ने का प्रयास किया जाता है। ऐसे ही वृंदावन धाम है। यहां की परिक्रमा की भी बड़ी महिमा है। चार कोसी परिक्रमा लगाने मात्र से ही सारे कष्ट दूर हो जाते हैं। देश ही नहीं विदेश से भी भक्त वृंदावन की परिक्रमा लगाने आते हैं, आश्चर्य की बात है की विदेशी भक्त नियमित सुबह वर्षों से यहां परिक्रमा लगा रहे हैं, भजन कीर्तन करते हुए उनकी टोलियां जब निकलती हैं तो पूरा वृंदावन परिक्रमा मार्ग भक्ति से सराबोर हो जाता है। हालांकि, नियमित परिक्रमा में वृंदावन की कोई टोली नहीं दिखाई देती है। इससे पता चलता है की विदेशी सनातन की ओर तेजी से आकर्षित होते जा रहे हैं। 

परिक्रमा में मिलता है अक्षय पुण्य

वृंदावन में परिक्रमा मार्ग भक्तों को अनुपम भक्ति से जोड़ता है। एक तरफ बिहारी जी का भावपूर्ण दर्शन होता है तो दूसरी तरफ यमुना मैया का दर्शन होता है। बिहारी जी के मंदिर के निकट से यदि परिक्रमा प्रारंभ करते हैं तो यमुना मैया के भी दर्शन होते हैं। फिर युगल घाट, इमलीतला, लाल बाबा की कुटिया होते हुए परिक्रमा केसी घाट निकल जाती है। केसी घाट काफी मनोरम और सुंदर है। इसलिए कुछ देर बैठ कर यमुना जी को आप निहार सकते हैं। उनका पूजन, उनका ध्यान कर सकते हैं। फिर यहां से आगे की परिक्रमा प्रारंभ होती है। परिक्रमा में जगह-जगह मंदिर और दिव्य स्थान है, जहां दर्शन करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। 

कीर्तन में झूम उठिए, भक्ति रस का मिलेगा आनंद

केसी घाट पर थोड़ा रुकने के बाद फिर आप परिक्रमा प्रारंभ करिए और श्री ओम नमः शिवाय गौशाला की ओर बढ़ चलिए। परिक्रमा में भजन कीर्तन में एकदम झूम उठिए। क्योंकि परिक्रमा का अवसर बार-बार नहीं मिलता। राधा रानी और ठाकुर जी में पूरी तरह से ध्यान लगाइए। परिक्रमा लगाते समय घर, परिवार, संसार सभी का चिंतन छोड़ दीजिए। बस श्री बांके बिहारी की मनोहारी छवि अपनी आंखों में बसा लीजिए और इसी के साथ परिक्रमा पूर्ण कीजिए। देखिए परिक्रमा का पूरा लाभ आपको मिलेगा। सुदामा कुटी पहुंचते ही आप वहां पर जरूर प्रणाम कीजिए। सुदामा कुटी संतों की सेवा के लिए जानी जाती है। यहां पर संतो को रहने, प्रसाद, दवा आदि की फ्री सुविधा है। इसलिए बड़ी संख्या में यहां संत रहते हैं। अवसर मिले तो यहां संतों के दर्शन जरूर करें। क्योंकि कई ऐसे तत्व ज्ञानी संत हैं जो भक्ति और साधना में लीन रहते हैं।

लता, पता का भी जरूर करें दर्शन

सनातन की मान्यता है कि कण-कण में ईश्वर का वास है। इसलिए वृंदावन में परिक्रमा लगाते समय लता पता का भी दर्शन जरूर करिए। कुछ जगहों पर आपको मोर दिखाई दे जाते हैं तो हाथ जोड़कर उन्हें प्रणाम करिए। क्योंकि हमारे ठाकुर जी का वास लता, पता, पेड़, पौधे हर जगह है। इसलिए सभी में ठाकुर जी की छवि निहारते हुए उनका दर्शन करते रहिए। सुदामा कुटी से आगे जगन्नाथ मंदिर मिलेगा। यहां पर भी आप दंडवत प्रणाम करिए। आप टटिया स्थान पर जाइए यह स्थान और पवित्र भक्ति का एक केंद्र है। आज भी सच्ची, सरल भक्ति देखना हो तो टटिया स्थान जरूर पहुंचे। यह आज भी निकुंज भक्ति का प्रमुख केंद्र है। इसलिए हर जगह आपको रज ही रज दिखाई देगी। आपको प्रसाद भी यहां पर रज में बैठकर करना पड़ेगा। मगर भाव और भक्ति का ऐसा रस दुनिया में कहीं नहीं मिलेगा जैसा टटिया स्थान में मिलता है। शाम के समय यहां पर समाज होती है, कीर्तन और निकुंज भक्ति का दर्शन होता है। 

एक एक कण अमृत है, व्यर्थ मत कीजिए

वृंदावन का एक-एक कण और एक एक छण अमृत है। इसलिए किसी भी तरह से उसे व्यर्थ मत जाने दीजिए। हर छण बस ठाकुर जी का ही ध्यान लगाइए, टटिया स्थान से आगे बढ़ते हुए आप फूलडोल बिहारी महाराज जी के चैतन्य कुटी पहुंच जाएंगे। यहां से आप पानी घाट और फिर निकुंज वन पहुंच जाएंगे। विशाल परिसर में फैला निकुंज वन भक्ति का प्रमुख केंद्र है। यह पूज्य विजय कौशल महाराज जी का स्थान है। इसके बाद आप श्याम कुटी, मोर कुटी, वशिष्ठ आश्रम, विरक्त आश्रम होते हुए अटल्ला पहुंच जाएंगे। सभी जगह सम भक्ति रखिए और परिक्रमा में राधे राधे करते हुए आगे बढ़ते रहिए। फिर आप अटल्ला से इस्कॉन चौराहा होते हुए आप केली कुंज पहुंच जाइए। यह पूज्य हित प्रेमानंद महाराज जी की भक्ति का केंद्र है। तड़के चार बजे यदि परिक्रमा लगाते हैं तो पूज्य प्रेमानंद महाराज जी का प्रवचन भी होता है। यहां से आप इस्कॉन गोशाला होते हुए बिहारी मंदिर पहुंच जाइए और ठाकुर बिहारी जी के दर्शन कीजिए। हालांकि, यहां भक्तों का सैलाब उमड़ा रहता है। मगर, एक क्षण बिहारी जी को निहारने के बाद आप मंदिर परिसर में यदि थोड़ा स्थान मिल जाए तो ध्यान जरूर लगाएं। परिक्रमा मार्ग पर इन बातों का ध्यान रखने से आपको अच्छा पुण्य की प्राप्ति होगी।