दुनिया भर में प्रसिद्ध है प्रेम मंदिर ताजमहल भी इसके आगे फेल है
- 214
- June 6, 2023
उतर प्रदेश के मथुरा जिले के वृंदावन में स्थित प्रेम मंदिर सारी दुनिया में प्रसिद्ध है। प्रेम और भक्ति के लिए प्रसिद्ध इस मंदिर की कलाकृतियां देखते ही बनती है।
उतर प्रदेश के मथुरा जिले के वृंदावन में स्थित प्रेम मंदिर सारी दुनिया में प्रसिद्ध है। प्रेम और भक्ति के लिए प्रसिद्ध इस मंदिर की कलाकृतियां देखते ही बनती है। मंदिर में भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप का कई जगह दर्शन होता है। कुरुक्षेत्र के मैदान में अर्जुन को श्रीमद्भगवत गीता का संदेश देते हुए रथ,
गोचारन और गोवर्धनधारी का दर्शन तो अद्भुत है। ऐसे लगता है कि मानों प्रतिमाएं बोल देंगी। प्रेम मंदिर पूज्य कृपालु महाराज जी की असीम भक्ति, त्याग और साधना का प्रतीक है। मंदिर के निर्माण में पूज्य महाराज जी ने पूरा समर्पण लगा दिया है। इसलिए वृंदावन जो भी आता है वह प्रेम मंदिर का दर्शन जरूर करता है। आइए जानते हैं, क्या क्या खास बात प्रेम मंदिर में, किस प्रकार आप मंदिर पहुंच सकते हैं...
प्रेम और भक्ति की अनूठी मिसाल
प्रेम मंदिर छटीकरा रोड से तीन किमी दूरी पर स्थित है। मंदिर का निर्माण पूज्य जगद्गुरु कृपालु महाराज ने कराया था। यह मंदिर राधा और कृष्ण की प्रेम और भक्ति को समर्पित है। प्राचीन सभ्यताओं में जिस प्रकार से कलाकृतियों का बेजोड़ दृश्य दिखाई देता है, उस कला के स्वरूप को लेते हुए आधुनिक तकनीकी का प्रयोग मंदिर निर्माण में किया गया है। यह मंदिर प्राचीन कला का एक नवीन उदाहरण है। इसलिए एक बार भी जिसकी नजर मंदिर पर पड़ती है तो वह एक टक निहारता ही रहता है। मंदिर के सुंदर दृश्य को अपनी आंखों से ओझल होने नहीं देना चाहता है। मंदिर का शिलान्यास पूज्य कृपालु महाराज ने 14 जनवरी वर्ष 2001 में किया था। यह मंदिर करीब 11 वर्ष में बनकर तैयार हो पाया था। करीब 54 एकड़ में यह फैला हुआ है। मंदिर के निर्माण में 100 करोड़ रुपए की लागत बताई जाती है। मंदिर का निर्माण राजस्थान और उत्तर प्रदेश के करीब एक हजार शिल्पकारों ने किया था।
मंदिर में आते ही पूरे ब्रज का हो जाता है दर्शन
प्रेम मंदिर आने के बाद पूरे ब्रज का दर्शन हो जाता है। लोग अलौकिक दुनिया में ही पहुंच जाते हैं। द्वापर युग में जिस प्रकार से भगवान श्रीकृष्ण ने लीला की थी, एकदम साक्षात उन्हीं लीलाओं का दर्शन मंदिर में होता है, जिसे देखकर भक्त अभिभूत हो जाते हैं, बहुत सारे भक्तों को यहां पर दर्शन करते समय रोते हुए देखा है जा सकता है। उनकी आंखों से प्रेम और भक्ति के आंसू छलक जाते हैं, प्रेम मंदिर में बाल स्वरूप कन्हैया का गौ माता को चराने ले जाने का दर्शन बहुत ही भाव से भरा है। ऐसे लगता है कि जैसे गौ माता दौड़ी चली आ रही हैं। कलाकारों ने प्रतिमाओं में जैसे लगता है जान ही डाल दी हो। यह सुंदर दृश्य सभी का मन मोह लेते हैं। साथ ही गोवर्धनधारी की लीला भी बड़ी मनोहारी है। भगवान श्रीकृष्ण अपने ग्वाल वालों के साथ गोवर्धन को एक उंगली पर उठाए हुए दिखाई देते हैं। साथ में एकजुट होकर ग्वाल बाल भी अपनी लाठियों से गोवर्धन को उठाए हुए हैं। यह दृश्य भी एकदम सजीव सा लगता है। कालिया नाग के मानमर्दन का दर्शन भी अभिभूत करने वाला है। कुरुक्षेत्र के मैदान में भगवान श्रीकृष्ण, अर्जुन को श्रीमदभगवत गीता का उपदेश देते दिखाई देते हैं, जिस रथ पर भगवान श्रीकृष्ण और अर्जुन सवार हैं, वह रथ तो एकदम आश्चर्य में डाल देता है। ऐसा लगता है कि रथ के घोड़े कुरुक्षेत्र के मैदान में दौड़ रहे हैं और भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन को साक्षात उपदेश दे रहे हैं। यह दृश्य कोई भी भूल नहीं पाता, जैसे लगता है कि किसी दूसरी दुनिया में आ गए हैं। महारास का दृश्य तो आंखों से ओझल नहीं होता है। बस, स्वर्गलोक जैसा नजर आता है। मंदिर परिसर विशाल क्षेत्र में फैला हुआ है, इसलिए भक्तों की संख्या अधिक होने के बाद भी उन्हें कोई अधिक दिक्कत नहीं होती है। दर्शन करने के लिए जगह जगह पर सुरक्षाकर्मी लगे हुए हैं, जो भक्तों की भीड़ को नियंत्रित करते हुए दिखाई देते हैं। इससे मंदिर की व्यवस्था पूरी तरह से चाक-चौबंद दिखती है।

कृपालु महाराज जी का नृत्य देख सभी हो जाते हैं अभिभूत
भले ही पूज्य कृपालु महाराज जी ब्रह्मलीन हों, मगर उनके प्राण मंदिर में ही बसते हैं। उन्होंने मंदिर निर्माण में प्राण प्रण समर्पित किया है, उससे पूज्य महाराज सर्वत व्याप्त हैं। मंदिर परिसर में फव्वारे के बीच में जब कृपालु महाराज जी चलचित्र के माध्यम से भजन और नृत्य करते हुए दिखाई देते हैं तो ऐसा लगता है कि मानों स्वर्गलोक में विचरण कर रहे हों, जिन भक्तों ने साक्षात पूज्य कृपालु महाराज जी का दर्शन किया है, वह तो अपने आप को रोक नहीं पाते, हाथ जोड़कर विनती करते रहते हैं कि, महाराज आपने अपना दर्शन देकर हम सबको अनुग्रहित कर दिया है। नई पीढ़ी के लोग तो यह सोचते हैं कि साक्षात कृपालु महाराज जी भजन करते हुए दिख रहे हैं, मानों उनसे वार्तालाप कर रहे हैं। ऐसा लगता है कि वह अपने प्रवचन की बारिश उन पर कर रहे हैं, सच मानिए यह दृश्य कल्पना से परे है, इसे देखकर तो लोगों के रोंगटे खड़े हो जाते हैं। लोग चौक जाते हैं कि पूज्य महाराज जी उनके आसपास ही कहीं पर हैं।

रंग बिरंगी रोशनी से दमक उठता है मंदिर
जिस प्रकार से मंदिर की सुंदरता और भव्यता है, उसी प्रकार से मंदिर में व्यवस्थाएं भी हैं, जिससे भक्तों को दर्शन करने में तनिक भी दिक्कत नहीं होती है। छटीकरा रोड पर विशाल परिसर में प्रेम मंदिर फैला हुआ है। मंदिर के विशाल गेट से प्रवेश होता है, जहां से भारी सामान आदि नहीं ले जा सकते हैं। मोबाइल आप स्वयं की सुरक्षा पर ले जा सकते हैं, जगह जगह पर मंदिर परिसर में गार्ड हैं, जो आपको मंदिर के बारे में बताते रहते हैं, प्रवेश द्वार से ही मंदिर में लीलाओं का दर्शन शुरू हो जाता है। मूर्तियां काफी दूर हैं, चारों तरफ रेलिंग से घिरी हुई हैं। इसलिए उन्हें कोई नुकसान नहीं पहुंचा पाता है। साथ ही मंदिर में खुला वातावरण है, जिससे सफोकेशन नहीं होता है। मंदिर परिसर में सीढ़ियां बनी हुई है, जहां पर बैठकर लोग अपनी पिक लेना नहीं भूलते हैं। शाम के समय मंदिर जब लाइटों से रोशन होता है तो उसकी छटा देखते ही बनती है। विभिन्न रंग की लाइट से मंदिर किसी राजे राजवाड़े के महल की तरह दमक उठता है।
इस प्रकार पहुंच सकते हैं प्रेम मंदिर
छटीकरा रोड स्थित प्रेम मंदिर पहुंचने के कई रास्ते हैं। इसलिए भक्तों को दिक्कत नहीं होती है। हालांकि, बड़े वाहनों का प्रवेश इस मार्ग पर वर्जित रहता है। इसलिए उन्हें मल्टीप्लेक्स पार्किंग और प्राइवेट पार्किंग में अपने वाहन खड़े करने होते हैं। खासकर शनिवार और रविवार को तो नियमों का पालन जरूर करना होता है। मंदिर पहुंचने के लिए सबसे सरल मार्ग बाहर से आने वालों के लिए दिल्ली आगरा कानपुर हाईवे है। इस मार्ग से छटीकरा होते हुए प्रेम मंदिर पहुंच सकते हैं। यहां से मात्र तीन किलोमीटर दूरी पर मंदिर है। हालांकि, मंदिर से एक किमी की दूरी पर आपके चार पहिया वाहन को रोक लिया जाएगा। वाहन को बिना पार्किंग में खड़ा किए आपको आगे बढ़ने नहीं दिया जाएगा। दूसरा रास्ता वृंदावन परिक्रमा मार्ग होते हुए इस्कॉन मंदिर चौराहे से बाई तरफ होकर भी मंदिर के लिए जाता है। यह सीधा मार्ग प्रेम मंदिर पहुंचा देगा। एक मार्ग अटल्ला चुंगी से ओवरब्रिज होते हुए जाता है। इसी से मथुरा से होते हुए भी मार्ग जाता है। दोनों रास्ते ओवरब्रिज पार करते हुए मंदिर की ओर बढ़ जाते हैं, एक तरफ प्रेम मंदिर तो दूसरी तरफ इस्कॉन मंदिर के लिए मार्ग मुड़ जाता है।

दर्शन आते समय इन बातों का जरूर रखें ध्यान
प्रेम मंदिर दर्शन आते समय प्रमुख बातों का जरूर ध्यान रखना चाहिए। एक तो चार पहिया वाहन आते समय छटीकरा रोड पर तमाम होटल बने हुए हैं तो आप उन होटलों में रुक सकते हैं और वहां अपने वाहन खड़े करके आराम से मंदिर में दर्शन कर सकते हैं। चूंकि वाहनों का वृंदावन शहर में प्रवेश वर्जित है और यदि हो भी जाए तो परिक्रमा मार्ग आदि पर हमेशा भीड़ रहती है। उससे आपको दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। प्रेम मंदिर चौराहे के पास यदि वाहन से निकल रहे हैं तो सीट बेल्ट जरूर लगाए रखें। क्योंकि तुरंत आपका चालान कट जाएगा। साथ ही मंदिर में दर्शन करने जाते हैं तो बड़े सामान लेकर ना जाएं, मोबाइल, पर्स आदि बिल्कुल सुरक्षित रखें।




Related Items
अटारी पर बैठी राधा रानी, दर्शन करते समय इन बातों का जरूर रखें ध्यान ataaree par baithee raadha raanee, darshan karate samay in baaton ka jaroor rakhen dhyaan