बरसाने की सखियां आखिर नंद गांव कन्हैया को बुलाने के लिए क्यों पहुंचती हैं
- 183
- April 30, 2023
भारतवर्ष एक अद्भुत देश है। यहां धर्म संस्कृति का ऐसा गठजोड़ है जो दुनिया में कहीं पर भी देखने को नहीं मिलती है। यहां की संस्कृति जीवन शैली एक परंपरा है, जो जीवन को जीवंत बना देती है
भारतवर्ष एक अद्भुत देश है। यहां धर्म संस्कृति का ऐसा गठजोड़ है जो दुनिया में कहीं पर भी देखने को नहीं मिलती है। यहां की संस्कृति जीवन शैली है, एक परंपरा है, जो जीवन को जीवंत बना देती है। इसीलिए दुनिया के किसी भी देश में ऐसा रंग, उत्साह और उल्लास देखने को नहीं मिलता है, जैसा भारतवर्ष में देखने को मिलता है। इसलिए भारत वर्ष को तीज और त्योहारों का देश कहा जाता है। इसलिए ब्रज में होली का उत्सव देखते ही बनता है। होली के समय बरसाना की सखियां नंद गांव कन्हैया को बुलाने पहुंचती हैं। कन्हैया के साथ ही उनके शाखाओं को भी आमंत्रित करती हैं, आइए जानते हैं इस अनूठी परंपरा के बारे में...
ब्रज में होली की शुरुआत बसंत पंचमी से प्रारंभ हो जाती है। यहां बसंत पंचमी के दिन होलिका रखी जाती है। होलिका का पूजन होता है और उसके बाद से होली का उत्सव शुरू हो जाता है। ब्रज में पूरे 40 दिन होली का उत्सव मनाया जाता है।

कन्हैया को होली खेलने के लिए करती हैं आमंत्रित
होली से करीब एक हफ्ते पूर्व बरसाने की गोपिकाएं कन्हैया को आमंत्रित करने के लिए नंदगांव जाती हैं। बरसाने की सखियां सोलह श्रंगार करके नंदगांव पहुंचती है। बरसाने से नंदगांव की दूरी करीब 12 किलोमीटर है। सभी सखियां कन्हैया के भजन कीर्तन करते हुए सज संवर कर नंदगांव पहुंच जाती हैं। यहां पर नंद भवन में पहुंचकर कान्हा को आमंत्रित करती हैं और कहती हैं कि तुम लट्ठमार होली खेलने हमारे बरसाने में जरूर आना। साथ ही अपने सखाओं को भी लेकर आना। इस पर कन्हैया तैयार हो जाते हैं और फिर वह लट्ठमार होली खेलने अपने सखाओं के साथ बरसाना पहुंचते हैं।

भक्ति रस में डूब जाते हैं सब, खूब गाते हैं फाग
बरसाने से नंद गांव पहुंची सखियां भक्ति रस में डूब जाती है। नंदगांव में भव्य आयोजन किया जाता है। फाग आयोजित होता है। जहां पर समाज कीर्तन होता है। पूरे नंदगांव के लोग बैठते हैं और वो फाग गाते हैं। बरसाने से पहुंची हुई सखियां नृत्य करती हैं और कन्हैया की भक्ति में पूरी तरह से रंग जाती है। यहां समाज बरसाने की सखियों को बड़े ही आदर सत्कार के साथ बैठाता है और फिर नंदगांव के सखा सखियों से कहते हैं कि वह निमंत्रण को स्वीकार कर रहे हैं। होली खेलने जरूर आएंगे।

बरसाने से नंदगांव का रंग देखते ही बनता है
इस दौरान बरसाने से लेकर नंद गांव तक होली का गजब का उत्साह रहता है। पूरा बरसाना और नंदगांव अबीर गुलाल के रंग में रंगा रहता है। सखियां सोलह श्रंगार किए हुए मधुर मधुर चाल से नंदगांव पहुंचती हैं। वहीं पर ढोल नगाड़े के साथ उनका स्वागत किया जाता है, पूरे बरसाने को सजाया जाता है। जगह-जगह पताका लगाई जाती है फूल और पतंगों से बरसाना और नंदगांव को सजाया जाता है। यहां की खूबसूरती देखते ही बनती है।

Related Items