पीली पोखर में आखिर राधा रानी ने क्यों धोई थी मेहंदी
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- April 30, 2023
ब्रज राधा रानी और कन्हैया की कथाओं से भरा पड़ा है। ऐसी कथाएं हैं जिनसे आज भी तमाम लोग अपरिचित हैं। बरसाना में पीली पोखर की भी ऐसी कथा है, जिसे तमाम लोग नहीं जानते हैं।
ब्रज राधा रानी और कन्हैया की कथाओं से भरा पड़ा है। ऐसी कथाएं हैं जिनसे आज भी तमाम लोग अपरिचित हैं। बरसाना में पीली पोखर की भी ऐसी कथा है, जिसे तमाम लोग नहीं जानते हैं। पीली पोखर में राधा रानी ने मेहंदी धुली थी। उसके बाद वह अपने घर पहुंची थीं। आज भी बरसाना में विशाल पोखर मौजूद है और पोखर में जो जल है वह मेहंदी के रंग की तरह एकदम हरा है। आइए जानते हैं कि आखिर राधा रानी ने पोखर में हाथ क्यों धुला था।

राधा रानी ऐसे पहुंची नंदगांव
द्वापर युग में एक बार राधा रानी खेलते खेलते नंदगांव पहुंच गईं थी। गांव के पास ही उन्हें भगवान श्रीकृष्ण मिल गए। वो, राधा रानी को अपने घर लेकर पहुंच गए। राधा रानी संकोच बस मना नहीं कर सकीं और वह कन्हैया घर पहुंच गईं। यहां उन्हें बहुत आदर सत्कार के साथ बिठाया गया।

मोहनी सूरत देख मोहित हुईं यशोदा मैया
राधा रानी की मोहिनी सूरत को देखकर यशोदा मैया मोहित हो गईं। भाव विभोर होकर ऐसा लगा कि मानों सारा प्यार दुलार वह राधा रानी पर न्योछावर कर देंगी। इसलिए उन्होंने राधा रानी को अपने पास बिठाया। उनके सुंदर मुखड़े को देखकर एकटक निहारती रह गईं। माता यशोदा मन ही मन सोचती रह गईं काश यह हमारे घर की बहूरानी बन जाती तो कितना अच्छा होगा। इसी भाव विह्वल में होकर यशोदा मैया ने राधा रानी का शृंगार किया और हाथों में मेहंदी रचा दी। राधा रानी का खूब स्वागत सत्कार किया। जब काफी देर हुई तो राधा रानी को लगा कि उन्हें घर जाना चाहिए, तब राध रानी यशोदा मैया से आज्ञा लेकर बरसाने की ओर निकल पड़ीं।

रास्ते में मेहंदी की आई याद, पोखर में हाथ धुला
राधा जी जब बरसाना की ओर लौटने लगीं तो अचानक उन्हें याद आया कि उनके हाथ में मेहंदी लगी है और उनका श्रंगार किया गया है। उनके मन में सवाल उठा कि यदि इस हालत में वह बरसाना अपने घर जाएंगी तो उनके माता-पिता उनसे पूछेंगे। फिर वो क्या जवाब देंगे। इसलिए उन्होंने शृंगार हटा दिया और रास्ते में ही एक पोखर मिली उसमें उन्होंने अपने मेहंदी वाले हाथ को धुल लिया। मेहंदी धुलते ही पोखर का पूरा पानी हरा हो गया। आज करीब 5.500 हजार वर्ष से भी अधिक का समय बीत गया मगर फिर भी पोखर का जल एकदम हरा है। जबकि आसपास के पोखर का जल मटमैला और नीला है। यह देखकर लोगों को आश्चर्य होता है कि आखिर इतने वर्षों बाद भी पोखर का जल क्यों हरा है? जबकि कई बार पोखर के जल को खाली कराया जा चुका है।

स्नान करने से मनौती होती है पूरी
ऐसी मान्यता है कि जो भी पोखर में स्नान करता है राधा रानी उसकी सारी मनौती पूर्ण करती हैं। इसीलिए बड़ी संख्या में लोग पोखर में स्नान करते हैं, तमाम लोग जल का आचमन करके आशीर्वाद लेते हैं। यह पोखर बरसाना में निर्जन स्थान पर है जहां चारों ओर पेड़ पौधे और हरियाली है। स्थान को देखकर ऐसा लगता है कि जैसे मानों कोई संत और ऋषि यहां तपस्या में लीन हो। यहां बैठकर बहुत सारे भक्तगण साधना में लीन हो जाते हैं। भाव से राधा रानी के नाम का जाप करते हैं।

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