इन संत के हाथ से एक बार जिसने भी पाई सब्जी बदल गया उसका जीवन

प्रेम और भक्ति की नगरी वृंदावन में सेवा भी अनूठी है, जहां भक्त और साधक सेवा के लिए लालायित रहते हैं, वहीं संत भी सेवा में पीछे नहीं रहते हैं। बहुत सारी कुटियों में संत अलग अलग तरह

प्रेम और भक्ति की नगरी वृंदावन में सेवा भी अनूठी है, जहां भक्त और साधक सेवा के लिए लालायित रहते हैं, वहीं संत भी सेवा में पीछे नहीं रहते हैं। बहुत सारी कुटियों में संत अलग अलग तरह से भक्तों की सेवा करते हैं। कहीं पर प्रसाद तो कहीं पर जल और कहीं पर अल्पाहार की व्यवस्था रहती है। मगर वृंदावन में तो ऐसे संत हैं जो सब्जियों की सेवा करते हैं। भक्तों को सब्जी का दान करते हैं। ऐसा बताया जाता है कि उनके हाथ से एक बार जिसने भी सब्जी ले ली उसका जीवन कृतार्थ हो जाता है। उसके जीवन के तमाम संकट कट जाते हैं। आइए ऐसे ही पूज्य महाराज महामंडलेश्वर मोर कुटी पीठाधीश्वर परमेश्वर दास त्यागी महाराज जी का दर्शन करते हैं, जो भक्तों पर प्रेम और भाव तो लुटाते ही हैं, साथ ही सब्जी का दान भी करते हैं।

            परिक्रमा मार्ग पर है आश्रम 

श्रीधाम वृंदावन में जब आप परिक्रमा लगाएंगे तो आपको पानी घाट से आगे परिक्रमा मार्ग पर ही मोर कुटी का दर्शन हो जाएगा। विशाल परिसर में फैली ये मोर कुटी सेवा के लिए समर्पित है। महामंडलेश्वर पूज्य परमेश्वर दास त्यागी मोर कुटी के पीठाधीश्वर हैं। आप बाल संत हैं। बचपन से ही घर, परिवार, मोह  माया को त्याग कर संत बन गए थे। इसलिए आपके चेहरे का तेज और भाव देखते ही बनता है। महाराज जी की गौशाला में 50 से अधिक गौ माताएं भी हैं, जिनकी सेवा संत और साधक करते हैं।

            इस प्रकार शुरू की सब्जी की सेवा

पूज्य परमेश्वर दास त्यागी महाराज जी बताते हैं कि एक बार उनके आश्रम में एक बुजुर्ग माताजी आईं। उन्होंने महाराज जी से कहा कि उन्हें रोटी खानी है, मगर वो सूखी रोटी नहीं खा सकती हैं। इसलिए कहा आश्रम में यदि मट्ठा हो तो दे दिया जाए, उससे वह रोटी खा लेंगी। पूज्य महाराज जी ने सवाल किया कि क्या तुम्हारे घर पर सब्जी नहीं बनी है। बुजुर्ग महिला की आंखों में आंसू आ गए। उन्होंने कहा कि यदि सब्जी बनी होती तो मैं यहां आश्रम में मट्ठा क्यों मांगने आती? महाराज जी ने माताजी के चेहरे का भाव भांप लिया। उन्होंने बुजुर्ग माताजी को मट्ठा दिया और फिर निर्णय लिया जरूरतमंद भक्तों को वह सब्जी बांटने का काम करेंगे। करीब दो वर्ष से महाराज जी ने सब्जी बांटने का क्रम शुरू कर दिया। पूज्य महाराज जी अपने शिष्य हरिओम दास उर्फ पायलट बाबा के साथ सब्जी मंडी पहुंच जाते हैं और वहां से ढेर सारी हरी सब्जियां लाकर आश्रम के पास रख देते हैं। और फिर आसपास के भक्तगण को सब्जी बांटने का काम करते हैं। पूज्य महाराज जी का कहना है कि जीवन में जो भी अच्छा कार्य संभव हो उसे जरूर करना चाहिए। थोड़े से प्रयास से यदि किसी भी व्यक्ति को आत्म संतुष्टि मिलती है तो उसे तो अवश्य करना चाहिए। इससे बड़ा पुण्य और कोई भी नहीं हो सकता है।

    सब्जी लेने के लिए उमड़ पड़ते हैं भक्त

मोर कुटी में जब सब्जी बांटी जाती है तो उसे लेने के लिए भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ती है। कुटिया के आसपास तमाम ऐसे भक्तगण रहते हैं जो सब्जी आदि नहीं खरीद सकते, उन्हें महाराज जी जरूर सब्जी देते हैं और  आशीर्वाद देते हैं कि परिवार धन-धान्य से संपन्न हो। बहुत से संत भी सब्जी लेने आते हैं, जिससे वह कुटिया में अच्छे से प्रसाद ग्रहण कर सकें। पूज्य महाराज जी के शिष्य पायलट बाबा का कहना है कि थोड़े से प्रयास से बहुत सारे लोगों का भला हो जाता है। उनके घर पर सब्जियां बन जाती है, इससे  प्रसन्नता की और क्या बात हो सकती है। सब्जी में आलू, भिंडी, करेला, तरोई, पपीता, कद्दू, हरी, मिर्च, पालक, टिंडा आदि बांटा जाता है।