राम रोटी बाबा की जिसने भी खाई रोटी, उसके जीवन का हो गया उद्धार

वैसे तो कहा गया है कि संत का आशीर्वाद ही काफी होता है मगर राम रोटी बाबा की रोटी का प्रसाद जिसने भी ग्रहण किया उसके जीवन का उद्धार हो जाता है। बहुत सौभाग्यशाली लोगों को राम रोटी बाबा

वैसे तो कहा गया है कि संत का आशीर्वाद ही काफी होता है मगर राम रोटी बाबा की रोटी का प्रसाद जिसने भी ग्रहण किया उसके जीवन का उद्धार हो जाता है। बहुत सौभाग्यशाली लोगों को राम रोटी बाबा की रोटी का प्रसाद प्राप्त होता है। गोवर्धन में परिक्रमा मार्ग पर दानघाटी से करीब 500 मीटर की दूरी पर राम रोटी बाबा की कुटिया है। यहीं पर बाबाजी संतों और भक्तों के लिए प्रसाद तैयार करते हैं। देशभर से आए हुए  संतो को बड़े ही आदर भाव के साथ प्रसाद ग्रहण कराया जाता है। 

20 वर्ष पहले शुरू की थी सेवा 

गोवर्धन में करीब 20 वर्ष पहले राम रोटी बाबा ने संतों की सेवा शुरू की थी। बताया जाता है कि बाबा जी पहले फौज में थे। मगर उनका मन भक्ति में ही रमा। इसलिए सब कुछ छोड़कर गोवर्धन में आ गए और गिरिराज महाराज जी की तलहटी में रहने लगे। एक दिन बाबाजी को महसूस हुआ कि देशभर से आने वाले संत गोवर्धन में भ्रमण करते रहते हैं। परिक्रमा लगाते हैं, मगर उनके प्रसाद की कोई व्यवस्था नहीं है। इसलिए बाबा जी ने पहले दो चार संतो को प्रसाद ग्रहण कराने का निर्णय लिया। बाबा जी ने स्वयं आटा, दाल, चावल और सब्जी की व्यवस्था की और अपने हाथों से चार पांच संतो के लिए प्रसाद तैयार किया। उन्हें बड़े भाव से प्रसाद ग्रहण कराया। धीरे-धीरे बाबाजी राम रोटी के नाम से प्रसिद्ध हो गए। बाबाजी का यह कहना है की यह राम की रोटी है, इसमें उनका कुछ नहीं बस वह तो एक माध्यम हैं।

बड़े भाव से ग्रहण कराते हैं प्रसाद

राम रोटी बाबा बड़े भाव से संतों को प्रसाद ग्रहण कराते हैं। बाबा तड़के तीन बजे जग जाते हैं और प्रसाद की व्यवस्था शुरू कर देते हैं। सुबह के समय चावल दाल सब्जी आदि प्रसाद बनाया जाता है। शाम के समय रोटी की तैयारी शुरू हो जाती है। करीब 500 संत प्रतिदिन राम रोटी का प्रसाद ग्रहण करते हैं। शाम पांच बजे गरमा गरम प्रसाद तैयार हो जाता है। रोटी,दाल, चावल और सब्जी प्रसाद में रहता है। लंबी पंगत लगती है और संतों को प्रसाद ग्रहण कराया जाता है। बहुत सारे भक्त प्रसाद के समय संतों के लिए मिठाई फल आदि लेकर आते हैं और उन्हें ग्रहण कराते हैं। 

सब कुछ करते हैं गिर्राज महाराज

गोवर्धन में परिक्रमा मार्ग पर दान घाटी के निकट प्रतिदिन 500 के करीब संतो और भक्तों को प्रसाद प्राप्त होता है। इतनी बड़ी तैयारी में बहुत सारे संत और भक्त जुटते हैं, जो राम रोटी बाबा की कुटिया में सेवा देते हैं। कई सरकारी कर्मचारी भी हैं, जो नौकरी समाप्त होने के बाद शाम को सेवा के लिए आ जाते हैं। राम रोटी बाबा कहते हैं की उन्हें कुछ भी पता नहीं रहता इतनी बड़ी संख्या में प्रसाद की कैसे व्यवस्था होती है? सबकुछ गिर्राज महाराज और राधा रानी की कृपा से होता है। बस उनका प्रयास रहता है कि उनकी कुटिया से कोई भूखा ना लौटे। सामर्थ्य के अनुसार वह सभी की सेवा करते हैं।


प्रसाद के लिए संत और विदेशी पर्यटक भी लालायित रहते हैं

राम रोटी बाबा के प्रसाद के लिए संत से लेकर विदेशी पर्यटक भी लालायित रहते हैं। वृंदावन स्थित श्री मलूक पीठाधीश्वर राजेंद्र दास महाराज जब भी गोवर्धन आते हैं तो राम रोटी बाबा की कुटिया में आकर प्रसाद जरूर ग्रहण करते हैं। बड़े ही सहज और सरल भाव से राजेंद्र दास बाबा परिक्रमा मार्ग पर बैठ जाते हैं और प्रसाद ग्रहण करते हैं। उनके साथ तमाम भक्त भी होते हैं, जिन्हें प्रसाद का अवसर प्राप्त होता है। साथ ही विदेशी पर्यटक भी राम रोटी का प्रसाद लेने आते हैं। बहुत से ऐसे भक्त हैं जो रोटी का प्रसाद लेकर विदेश यानि अमेरिका, जापान इंग्लैंड जाते हैं। वहां प्रेम पूर्वक प्रसाद ग्रहण करते हैं।