गिर्राज महाराज की तलहटी में अर्पण करके तन मन धन भजन गाने वाला यह साधक आखिर कौन है, भजन पर झूम उठता है पूरा ब्रज

ब्रजभक्ति रस से भरा हुआ है,और भक्ति का रस जब उमड़ता है तो फिर सीधे ठाकुरजी साक्षात्कार होता है। ऐसे ही गिर्राज महाराज जी की तलहटी में भजन गाने वाले भक्त महावीर जी के साथ भी होता है

ब्रज भक्ति रस से भरा हुआ है, और भक्ति का रस जब उमड़ता है तो फिर सीधे ठाकुर जी से साक्षात्कार होता है। ऐसे ही गिर्राज महाराज जी की तलहटी में भजन गाने वाले भक्त महावीर जी के साथ भी होता है, जब वह गोवर्धन महाराज जी के नीचे बैठकर भजन गाते हैं तो फिर मानों पूरा ब्रज झूम उठता है। उनके भजन, भाव और उनकी भक्ति में ऐसा रस उमड़ता है कि जैसे लगता है कि महावीर जी साक्षात ठाकुर जी से बात कर रहे हों। पूरा माहौल भाव विभोर हो जाता है, जो भी व्यक्ति उनके नजदीक से होकर निकलता है वह बिना उनके पास बैठे हुए नहीं रहता। अर्पण करके तन मन धन, चलो चले रे गोवर्धन भजन तो ब्रज ही नहीं पूरी दुनिया में सुना जा रहा है। आइए आप सब को भी परिक्रमा का आनंद दिलाते हैं, कौन है महावीर जी उनके बारे में भी जानते हैं।

गोवर्धन महाराज की करीब सात कोसी परिक्रमा है। यह मथुरा जिले के गोवर्धन तहसील में स्थित है। यहां विशालकाय पहाड़ है। द्वापर युग में बताया जाता है कि एक बार इंद्र को घमंड हुआ और उन्होंने ब्रज पर मूसलधार बारिश करा दी। इस पर भगवान श्री कृष्ण ने अपने ग्वाल वालों के साथ कनिष्ठ उंगली पर गोवर्धन को धारण कर लिया और इंद्र का घमंड चूर कर दिया, तभी से ऐसी मान्यता है कि जो भी गोवर्धन महाराज का पूजन करता है उसकी मनोकामना जरूर पूरी होती है। इसीलिए बड़ी संख्या में भक्तगण गोवर्धन महाराज की परिक्रमा लगाते हैं।

     गूंजता रहता है महावीर जी का भजन

गोवर्धन महाराज की तलहटी में ही भक्त महावीर जी का भजन गूंजता है। महावीर जी को बचपन से ही भजन गाने का शौक था। 10 वर्ष की उम्र में ही वह भजन गाने लगे थे। भजन के माध्यम से गोवर्धन महाराज जी की राधा रानी और ठाकुर जी की स्तुति किया करते थे। उनका भजन लोगों को बहुत कर्ण प्रिय लगता है, जो भी भक्त एक बार भजन सुन लेता तो वह महावीर जी का मुरीद हो जाता। महावीर जी के नित्य भजन से पूरी तलहटी गूंजती है। 

         इस भजन से छा गए, खूब हुई चर्चा

वैसे तो महावीर जी प्रतिदिन अन्यौर गांव के निकट गिर्राज महाराज जी की तलहटी में भजन गाया करते थे। मगर एक वर्ष पहले उन्होंने एक पुराना भजन अर्पण करके तन मन धन चलो चले रे गोवर्धन सुनाया तो यह आवाज पूरी तलहटी में गूंज गई।  जो भी भक्तगण परिक्रमा लगाने आता मानों उसके कानों में आवाज गूंजने लगती। बहुत सारे भक्त आवाज को सुनने के लिए व्याकुल हो जाते हैं, उन्हें तड़प होती कि आखिर ये आवाज तलहटी में कहां गूंज रही है। मगर उन्हें नहीं पता था कि तलहटी के नीचे एक साधारण से धोती कुर्ता पहने हुए डफली बजाते हुए महावीर जी ये भजन गा रहे हैं, उनके पास पहुंचते ही भक्त व्याकुल हो जाते थे। आंखों से आंसू आना शुरू हो जाता था। ऐसा लगता था जैसे साक्षात भक्त और भगवान का मिलन हो रहा है। महावीर जी जब यह भजन गाते हैं तो उनकी आंखें बंद हो जाती है। डफली बजाते हुए जैसे लगता कि साक्षात ठाकुर जी से साक्षात्कार हो रहा है। इसलिए उन्हें अपनी सुध बुध का भी पता नहीं रहता है। 


विदेशी भक्त भी है मुरीद, भजन पर खूब झूमते हैं

महावीर जी के कंठ में ठाकुर जी की इतनी कृपा है कि उनके भजन को जो एक बार सुन लेता है वह बार-बार सुनना चाहता है विदेशी भक्त भी महावीर जी के भजन को सुनने के लिए आतुर रहते हैं। भले ही उन्हें ब्रज और हिंदी समझ में ना आए, मगर वह भाव के रंग में रंग जाते हैं। महाराज जी जो भजन गाते हैं उनके साथ दो विदेशी महिलाएं होती है। एक भक्ति रस में झूमती हैं तो दूसरी बांसुरी बजाती है। उनके बांसुरी बजाने के अंदाज और भाव को देखकर भक्त भी आश्चर्यचकित हो जाते हैं, उन्हें ऐसा लगता है कि मानों कोई भारतीय महिला भक्ति के रंग में रंगी हुई है। इसीलिए भजन के समय भक्तों की अपार भीड़ लग जाती है।

पूरी दुनिया में छा गए महावीर जी, भाव से भर गया हर कोई

अर्पण करके तन मन धन चलो चले रे गोवर्धन भजन से महावीर जी पूरी दुनिया में छा गए। भारत, अमेरिका, जापान, इंग्लैंड, रूस दुबई आदि जिन देशों में भी भारतीय रहते हैं, वह भजन को जरूर सुनते हैं, उन्हें 20 साल पुराना गोवर्धन याद आ जाता है जब गोवर्धन में परिक्रमा मार्ग पर परिक्रमा लगाया करते थे और उनके कानों में यह भजन जाया करता था। जिस प्रकार से महावीर जी को मां सरस्वती ने कंठ दिया है, उससे यह भजन पूरे ब्रज में गुंजायमान हो जाता है।  इसीलिए हर कोई इस भजन को सुनकर व्याकुल हो जाता है। यदि आप भी गोवर्धन महाराज की परिक्रमा करने जा रहे हैं तो दानघाटी से आगे बढ़ेंगे तो आपको अन्यौर गांव मिलेगा। गांव से थोड़ा सा आगे ही अंदर की परिक्रमा मार्ग में आपको महावीर जी सुबह 10:00 बजे से भजन गाते हुए मिल जाएंगे। करीब 3 से 4 घंटे तक भजन गाते हैं। बहुत सारे भजन उनके खुद के रचित हैं। बहुत सारी पुरानी पदावली दोहा हैं, जिन्हे वो सुनाते हैं।