श्रीराम मंदिर निर्माण के लिए देवरहा बाबा ने क्या की थी भविष्यवाणी
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- June 15, 2023
अयोध्या में भव्य प्रभु श्रीराम मंदिर का निर्माण हो रहा है। हालांकि, इसके लिए हिंदुओं ने करीब 550 वर्ष का लंबा संघर्ष किया था। तमाम लोगों ने तो अपने प्राण तक न्यौछावर कर दिए।
अयोध्या में भव्य प्रभु श्रीराम मंदिर का निर्माण हो रहा है। हालांकि, इसके लिए हिंदुओं ने करीब 550 वर्ष का लंबा संघर्ष किया था। तमाम लोगों ने तो अपने प्राण तक न्यौछावर कर दिए। लंबे समय से चली आ रही कांग्रेस की सरकार में तो एक समय ऐसा भी लग रहा था कि मंदिर का निर्माण नहीं हो सकेगा। रामलला जी को टेंट में ही विराजमान होना पड़ेगा, मगर ब्रह्मऋषि व योगी सम्राट देवरहा बाबाजी ने भविष्यवाणी कर दी थी कि अयोध्या में प्रभु श्रीराम का मंदिर बनकर रहेगा। मंगलवार को वृंदावन में यमुना नदी के किनारे देवरहा बाबा आश्रम में चतुर्थ सम्प्रदाय के प्रमुख फूलडोल बिहारी जी महाराज ने कहा कि पूज्य देवरहा बाबा स्वप्न दृष्टा थे। वह भविष्य की बातों को जान लिया करते थे।

अशोक सिंघल से कर दी थी भविष्यवाणी
देवरहा बाबा जी के योगिनी एकादशी महोत्सव के अवसर पर फूलडोल बिहारी महाराज ने कहा की पूज्य देवरहा बाबा के साथ उनकी बातचीत होती थी। वह तपोनिष्ठ संत हैं। संत सदैव विद्यमान रहते हैं। वह ब्रह्मलीन होते हुए भी अपनी अलौकिक शक्ति से सभी की रक्षा करते हैं।
फूलडोल बिहारी महाराज ने कहा कि देवरहा बाबा हो रही गोहत्या को लेकर काफी चिंतित रहते थे। वह कहते थे कि किसी भी तरह से गोहत्या बंद होनी चाहिए। गौ माता में तो 33 कोटि देवी देवता का वास होता है, उन्हें जब कष्ट होता है तो पीड़ा होती है। फूलडोल महाराज ने कहा कि अयोध्या में भव्य श्रीराम मंदिर निर्माण को लेकर पूज्य देवरहा बाबा ने पहले ही भविष्यवाणी कर दी थी। विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष रहे अशोक सिंघल 1980 के दशक में बाबाजी के दर्शन करने आए थे। राम मंदिर निर्माण को लेकर वह कुछ चिंतित थे। पूज्य देवरहा बाबा ने अशोक सिंघल से कहा चिंता मत करो प्रभु श्रीराम जी का भव्य मंदिर बनेगा। उनकी वाणी सत्य साबित हुई और अयोध्या में प्रभु श्रीराम जी के भव्य मंदिर का निर्माण हो रहा है।

संकटों से मुक्ति का रास्ता बताते थे देवरहा बाबा
पूज्य श्रीराम प्रपन्नाचार्य महाराज ने कहा कि बाबा जी कहते थे कि जो भी भक्त भगवान का सच्चे मन से स्मरण करता है,वह सभी संकटों से मुक्त हो जाया करता है।
शरणागत आश्रम के बिहारी दास महाराज ने कहा भारत भूमि के दिव्य संत ने धरती को धन्य कर दिया। देवरहा बाबा संपूर्ण विश्व के कल्याण की कामना करते थे। पूज्य संत महाराज ने कहा कि देवरहा बाबा के आश्रम में आने मात्र से ही जीवन धन्य हो जाता है। देवरहा बाबा युग दृष्टा, युग ऋषि हैं।

मन की इच्छा को जान लेते थे पूज्य महाराज
पूज्य संत महाराज ने कहा कि ये युग संस्कृति के क्षरण का युग है। उससे निकलने की जरूरत है। इससे सिर्फ संत समाज निकाल सकता है। इसलिए समाज में धर्म और संस्कृति को बचाने का कार्य कीजिए। भजन सम्राट ने कहा कि 1974 में बाबाजी का दर्शन करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ था। उन्होंने कहा कि संतों के आत्म स्वरूप से कोई परिवर्तन नहीं होता है। भगवान भी संतों को पूज्य मानते हैं। संत कभी अपने ऊपर कुछ करते। सबकुछ लोककल्याण के लिए करते हैं।
पूज्य संत महाराज ने कहा की देवरहा बाबा सरकार की कृपा उन्हें मिलती रही है। जो भक्तगण आश्रम में आए हैं, वह भी बहुत सौभाग्यशाली हैं। गणेश महाराज ने कहा कि बाल्यकाल्य से बाबाजी का दर्शन किया है। जब आश्रम में आते थे तो पूज्य भगवान दास महाराज का सानिध्य मिलता था। संत कभी नहीं जाते हैं। जब उनकी लीला नित्य है, रहन सहन नित्य है तो वो कैसे हम सभी के बीच से जा सकते हैं? यदि अंतर्मन से ध्यान करेंगे तो बाबाजी का दर्शन जरूर होगा। जो हमें चाहिए था वो पूज्य बाबाजी दे देते थे। मन की इच्छा को जान लेते थे।

धरा को धन्य कर दिया
महोत्सव में पूज्य संत महाराज ने कहा कि देवरहा बाबा जब यमुना किनारे विराजते थे तो वह सुदामा कुटी में रहते थे। वह बाबा जी से मिलने आया करते थे। पास ही सुदामा कुटी में दाल बाटी चूरमा बनी तो वृंदावन के कई पूज्य संत आए। सभी ने देवरहा बाबा सरकार के दर्शन का निर्णय लिया। बाबा जी के पास पहुंचे तो उन्होंने कहा क्यों एकादशी के दिन क्या बैगन खाना चाहिए? तो कुछ संतों ने कहा कि नहीं। इस पर निर्णय हुआ की अब मंदिरों में एकादशी के दिन बैगन नहीं बनेगा। सिद्ध संत इस प्रकार से समाज के हित का भी कार्य करते हैं। मलूक पीठ के संत महाराज ने कहा कि इस धरती पर अवतरित होकर देवरहा बाबा ने इस धरा को धन्य कर दिया।

आखिर वृंदावन को क्यों चुना
देवरहा बाबा आश्रम के बड़े सरकार ने कहा कि संत हमेशा सभी को एक दृष्टि से देखते हैं। परंतु मनुष्य जब संत का सानिध्य पाता है तो दैहिक, दैविक और भौतिक तीनों ताप नष्ट हो जाते हैं। बाबा 1932 से वृंदावन आया करते थे। बाबाजी ने अंतिम समय के लिए वृंदावन को क्यों चुना? यह भी एक विचारणीय प्रश्न है। माघ में प्रयाग, चैत्र में काशी, फागुन में वृंदावन और फिर हिमालय में भी रहा करते थे।1985 में देवरिया से चलने लगे तो बोलें बच्चा तुम मेरे साथ प्रयागराज चलो। बाबा ने एक महीने प्रयाग में वास किया। फिर फागुन में वृंदावन आ गए। बड़े सरकार ने कहा कि पूज्य बाबा सरकार का मन हिमालय के लिए था, मगर राधा रानी और भगवान श्रीकृष्ण ने कहा की बाबा ब्रज को छोड़ कर कहीं मत जाओ। फिर यहां रह गए। इसलिए हम अनुभव कर रहे हैं की वृंदावन को सीधे राधा रानी और ठाकुर जी की कृपा प्राप्त हुई है।

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