बरसाने के रमेश बाबा की अनूठी भक्ति, 60 हजार से अधिक गोमाता की कर रहे हैं सेवा
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- April 30, 2023
वैसे तो पूरा ब्रज ही त्यागी, तपस्वी संत महात्माओं से भरा पड़ा है, मगर बरसाने के महान संत रमेश बाबा का त्याग और समर्पण अनुकरणीय है। पूज्य रमेश बाबा की अखंड साधना पूरे देश भर में वंद
वैसे तो पूरा ब्रज ही त्यागी, तपस्वी संत महात्माओं से भरा पड़ा है, मगर बरसाने के महान संत रमेश बाबा का त्याग और समर्पण अनुकरणीय है। पूज्य रमेश बाबा की अखंड साधना पूरे देश भर में वंदनीय है। वह सिर्फ गौ माताओं की सेवा ही नहीं करते बल्कि पहाड़, पर्वत, पेड़, पौधे की भी रक्षा करते हैं। इसीलिए पहाड़ों को काटने से बचाने के लिए रमेश बाबा ने लंबी लड़ाई लड़ी। उनकी इस साधना से प्रसन्न होकर भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री दिया। मगर 84 कोसी परिक्रमा के बाहर रमेश बाबा ने आज तक कभी कदम नहीं रखा। इसलिए सरकार को स्वयं उनके पास चलकर आना पड़ा और उन्होंने रमेश बाबा को पद्मश्री का पुरस्कार दिया। आइए जानते हैं कैसे पूज्य रमेश बाबा पूरे ब्रज में ख्याति प्राप्त हुए...

पहाड़ों पर बनाई कुटिया, बना दिया स्वर्ग
पूज्य रमेश बाबा आजादी के समय बरसाना आ गए थे। राधा रानी की भक्ति में इतने लीन हुए कि मान मंदिर के पास ही भक्ति के रंग में रंग गए। उस समय पूरा बरसाना जंगल ही था। तलहटी के नीचे कुछ मकान बने थे। जहां लोग रहते थे। बाबाजी पहाड़ों पर ही पूजा-पाठ करते थे। चोर और डाकू बदमाशों का उस समय पूरी तरह से भय व्याप्त था। दिनदहाड़े लोगों को यह लूट लिया करते थे। मगर पूज्य रमेश बाबा भक्ति में ऐसे लीन हुए धीरे-धीरे उसी स्थान को स्वर्ग बनाते चले गए। मान मंदिर के निकट पहाड़ों पर बाबा जी ने कुटिया बनाई और भक्तों को दर्शन देने लगे। धीरे-धीरे बाबा जी की ख्याति चारों तरफ फैल गई। 50=60 के दशक में तो बाबाजी के दर्शन को बड़ी संख्या में श्रद्धालु आने लगे। भले ही रास्ता दुर्गम था, तब साधन बहुत कम थे, मगर बाबाजी के दर्शन और उनसे आशीर्वाद लेने के लिए भक्तों के आने का क्रम बंद नहीं हुआ।

गौ सेवा से मिली ख्याति और पूरे ब्रज में प्रसिद्ध हो गए
पूज्य रमेश बाबा को गौ सेवा से खासी ख्याति प्राप्त हुई और पूरे ब्रज में प्रसिद्ध हो गए। पूज्य बाबा जी निराश्रित गौ माताओं को लाकर अपने आश्रम में सेवा करने लगे। बहुत सारी ऐसी गौ माता थी जो कट्टी घरों में भेजी जाती थीं। गौरक्षक उन्हें छुड़ाकर लाते और बाबा जी के आश्रम में रख देते। धीरे-धीरे गौ माताओं की संख्या बढ़ने लगी। कुछ गौ माताओं से शुरू हुई यह सेवा हजारों की संख्या में पहुंच गई। वर्तमान में बाबा जी की गौशाला में करीब 65000 गोवंश हैं। गौशाला पूज्य रमेश बाबा जी की माताजी के नाम से है। बड़े परिसर में बाड़ा बनाए गए हैं, जिनमें गौ माताओं को रखा जाता है। उनके चारे पानी की भी सुविधाएं हैं। बड़ी-बड़ी मशीनें लगी हुई है। जिनसे चारा आदि तैयार किया जाता है। गौ माताओं को नाद में चारा डालने के लिए भी मशीनें लगी हुई है। क्योंकि इतनी बड़ी संख्या में बिना मशीन के कार्य करना संभव नहीं है। पूज्य रमेश बाबा की भक्ति को देखकर हर कोई आश्चर्यचकित रह जाता है। इतनी बड़ी संख्या में गौ माता की सेवा करना आसान काम नहीं है। प्रतिदिन करीब 20 लाख रुपए से अधिक का खर्च है। मगर रमेश बाबा की भक्ति अनंत है, जिसे देश नहीं दुनिया भर से भक्त सेवा करने के लिए आतुर रहते हैं।

हरिनाम संकीर्तन का भी कर रहे हैं प्रचार
पूज्य रमेश बाबा गौ माता की सेवा के साथ ही हरि नाम संकीर्तन का भी प्रचार कर रहे हैं। प्रतिदिन शाम को मान मंदिर के निकट एक बड़े परिसर में हरि नाम संकीर्तन होता है। सखियों के स्वरूप में आई बालिकाएं नृत्य करती हैं। भजन कीर्तन के साथ पूरा माहौल भक्ति मय हो जाता है। भाव में आकर पूज्य रमेश बाबा भी नृत्य करने लगते हैं। साथ ही रमेश बाबा की शिष्या मुरलिका और श्रीजी श्रीमद्भागवत कथा का वाचन करतीं हैं। उनकी कथा विदेशों में भी होती है, जिन स्थानों पर मुरलिका और श्रीजी कथा कहती हैं वहां पर वह हरिनाम संकीर्तन की शुरुआत करती हैं। पूज्य रमेश बाबा जी का कहना है कि कथा के साथ ही हरिनाम संकीर्तन भी होना चाहिए। धीरे-धीरे यह श्रृंखला 50 हजार गांव तक पहुंच गई है। यहां प्रतिदिन लोग सुबह और शाम को हरीनाम संकीर्तन करते हैं। मुरलिका जी का कहना है कि यह सब बाबा महाराज जी की कृपा है उनके आशीर्वाद से इतनी बड़ी श्रंखला चल रही है।

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