90 साल से लगातार दौड़ रहे हैं यह संत, 24 घंटे में एक मिनट के लिए भी नहीं करते हैं शयन

प्रेम और भक्ति की नगरी वृंदावन सारे जगत से अनुपम है। यहां की हवा, यहां के रज में ऐसी शक्ति है कि कोई भी साधारण सा व्यक्ति परम भक्ति को प्राप्त कर सकता है। उसके ऊपर साक्षात राधा रानी

प्रेम और भक्ति की नगरी वृंदावन सारे जगत से अनुपम है। यहां की हवा, यहां के रज में ऐसी शक्ति है कि कोई भी साधारण सा व्यक्ति परम भक्ति को प्राप्त कर सकता है। उसके ऊपर साक्षात राधा रानी और ठाकुर  की जी कृपा बरसती है। प्रभु उसे अजेय बना देते हैं। आज एक ऐसे ही संत की कथा आप सबको बताने जा रहा हूं जो वृंदावन में 90 वर्ष से भी अधिक समय से लगातार दौड़ते हुए परिक्रमा लगाते हैं। पूज्य महाराज जी का शरीर भले ही दुबला पतला हो मगर उन्हें लगातार दौड़ते देखकर हर कोई आश्चर्य में पड़ जाता है। जहां आज 30 व 35 वर्ष की उम्र के लोग दो सीढियां चढ़ते ही हांफ जाते हैं। वहीं, पूज्य महाराज जी अनवरत दौड़ते हुए करीब 12 किलोमीटर की परिक्रमा प्रतिदिन लगाते हैं। राधा रानी और ठाकुर जी की ऐसी कृपा कि 90 वर्ष से उनका यह क्रम अभी तक अनवरत चल रहा है। बाबा जी को वृंदावन में लाल बाबा जी के नाम से जाना जाता है। वह एकदम यमुना जी के किनारे इमली तला के निकट एक आश्रम में रहते हैं। करीब 50 वर्ष से बाबा जी को आज तक किसी ने सोते हुए नहीं देखा है।


         बचपन से ही भक्ति में रम गए

पूज्य लाल बाबा जी बचपन से ही भक्ति में रम गए। वृंदावन के लोग बताते हैं कि वह प्रतिदिन यमुना स्नान करते, राधा रानी और ठाकुर जी का पूजन करते यही उनकी दिनचर्या में शामिल हो गया। बालपन से ही उन्होंने वृंदावन की परिक्रमा प्रारंभ कर दी। पहले वह तेज गति से परिक्रमा लगाते थे। मगर फिर बाबा जी दौड़कर परिक्रमा लगाने लगे। इसके बाद से पूज्य लाल बाबा का यह क्रम जारी हो गया और करीब 90 वर्ष से वह दौड़कर परिक्रमा लगाते हैं।


           मंदिरों में करते हैं विशेष पूजन

पूज्य लाल बाबा वृंदावन की परिक्रमा लगाते हैं तो परिक्रमा मार्ग में पड़ने वाले मंदिरों में पूजन भी करते हैं हाथ में उनके त्रिशूल और दूसरे हाथ में पूजन सामग्री रहती है और तेज गति से दौड़ते हुए चले जाते हैं। परिक्रमा मार्ग पर चामुंडा देवी मंदिर पर पहुंचकर पूज्य लाल बाबा वहां मंदिर में करीब 15 मिनट तक पूजन अर्चन करते हैं। वर्षों से उनके पूजन करने से आसपास के लोग बाबा जी को देखने के बाद हट जाते हैं और उसके बाद बाबा जी मंदिर कपाट बंद करके करीब 15 मिनट तक ध्यान साधना में लीन हो जाते हैं। माता चामुंडा देवी का आह्वान करते हुए बाबाजी सभी के कल्याण की कामना करते हैं। पूजन करने के बाद फिर दौड़ते हुए उनकी परिक्रमा शुरू हो जाती है और उसके बाद यमुना जी के सामने इमलीतला के जिस निकट आश्रम पर उनकी परिक्रमा पूर्ण होती है।


बाबाजी को कभी सोते हुए नहीं देखा

पूज्य लाल बाबा को कभी किसी ने सोते हुए नहीं देखा। वो, लगातार 24 घंटे जगे रहते हैं। प्रतिदिन तड़के तीन बजे से वह परिक्रमा की तैयारी करते हैं। स्नान, ध्यान करने के बाद ठाकुर जी को भोग लगाकर करीब 4:30 बजे परिक्रमा के लिए निकल जाते हैं। लगातार दौड़ते हुए परिक्रमा पूर्ण करने के बाद फिर अपने आश्रम पहुंचते हैं और यहां पर पूजन ध्यान साधना शुरू हो जाती है। बाबाजी का एक छोटा सा कमरा है। उसमें कहीं पर भी बिस्तर नहीं लगा हुआ है। भोजन आदि की थोड़ी व्यवस्था है। बाकी बाबाजी किसी से कुछ लेते देते नहीं है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बाबा जी रात में सोते नहीं है। शाम होते ही फूल आदि तोड़ कर ले आते हैं और पूजा की तैयारी में जुट जाते हैं। 12:00 बजे पूजन की सामग्री तैयार करते हैं। फिर तड़के 2:00 बजे के बाद से परिक्रमा की तैयारी में लग जाते हैं। ऐसे में उन्हें ना दिन में ना रात में किसी ने सोते हुए नहीं देखा। इसीलिए बाबा जी के दर्शन करने को भक्तगण भी लालायित रहते हैं।

            निश्चल और निर्मल है भाव

पूज्य लाल बाबा का निश्चल और निर्मल भाव है। यदि उनसे कोई पूछता है कि बाबा जी इतनी कठिन साधना कैसे करते हैं। 90 वर्ष की उम्र में कैसे दौड़ते हुए परिक्रमा लगा लेते हैं या फिर बाबा जी कैसे बिना सोए हुए पूरी तरह स्वस्थ रह लेते हैं तो बाबा जी बस एक ही शब्द कहते हैं कि यह सब राधा रानी और ठाकुर जी की कृपा है। उनका ही आशीर्वाद है, उन्हीं की बदौलत यह सब कर पा रहे हैं, उनमें कोई ऐसी सामर्थ नहीं है। बाबाजी एक विरक्त संत की तरह रहते हैं। भीड़ भाड़ और भक्तों से घिरे रहना उन्हें पसंद नहीं है। उनका कहना है इससे साधना में दिक्कत होती है। इसलिए कोई भी उनके साधना की चर्चा करता है तो तुरंत मना कर देते हैं। कहते हैं कि उनकी भक्ति और साधना कि कहीं कोई चर्चा नहीं होनी चाहिए। यह सब राधारानी और ठाकुर जी की कृपा से संभव हो पा रहा है। वह कुछ भी…