वृंदावन के संतों ने सिंगोल का किया स्वागत, बोलें अब ये नहीं होगा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा संसद में सिंगोल की स्थापना को लेकर वृंदावन के संतो ने भी सराहना की है। उनका कहना है कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के मंदिर संसद में सिंगोल स्थापि

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा संसद में सिंगोल की स्थापना को लेकर वृंदावन के संतो ने भी सराहना की है। उनका कहना है कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के मंदिर संसद में सिंगोल स्थापित करना राष्ट्र गौरव की बात है। इससे सारी दुनिया भारतीय संस्कृति के बारे में जान सकेगी कि हम शासन सत्ता सिर्फ राज करने के लिए करते हैं, इसे धर्म स्वरूप मानते हैं। हमारे धर्म में सत्ता सिर्फ लोक कल्याण का ही पर्याय है। इसलिए सिंगोल हमें धर्म और अपने कर्तव्य पर चलने के लिए प्रेरित करता है। अनादि काल से भारतवर्ष में सिंगोल की परंपरा चली आ रही है। हमारे ऋषिगण राजाओं को सिंगोल प्रदान किया करते थे। उन्हें यह बताते थे कि यह धर्म दंड है। यदि सत्ता में कहीं भी कुछ गलत किया तो धर्म दंड तुम्हें रोकने का काम करेगा। यदि इसके बाद भी नहीं सुधरे तो परिणाम भुगतना ही पड़ेगा। वृंदावन के पूजनीय संतो ने कहा कि दुनिया में ऐसा कहीं नहीं है सत्ता के समय धर्म दंड स्थापित किया जाए, जिससे न्याय पूर्ण तरीके से सत्ता को संचालित किया जा सके, यह सिर्फ भारतवर्ष में है। 

 पूरी दुनिया में मोदी ने भारत का परचम फहराया : सुतीक्ष्ण दास महाराज 

सुदामा कुटी के महंत एवं नाभा पीठा द्वाराचार्य पूज्य प्रातः स्मरणीय सुतीक्ष्ण दास महाराज ने कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी ने भारत का परचम सारी दुनिया में फहराने का काम किया है। उन्होंने सिंगोल जो हमारे सनातन संस्कृति में धर्म दंड के रूप में माना जाता है, उसकी संसद में स्थापना करके यह बताने का काम किया है कि भारत सनातनी है। भारत का गौरव ऋषिगण हैं। हमारे यहां राजा से भी बड़ी उपाधि ऋषि मुनियों की होती है। इसीलिए बड़े-बड़े राजा और महाराजा ऋषि-मुनियों को देखते ही राजगद्दी छोड़ दिया करते थे। यह परंपरा भारतवर्ष की राजनीति में करीब-करीब समाप्त हो रही थी, परंतु पीएम नरेंद्र मोदी ने इसे पुनः प्रारंभ किया। संसद भवन में ऋषिगणों को देखकर मन गदगद हो गया। ऐसा लगा भारत का प्राचीन गौरव पुनः लौट आया। सुतीक्षण दास महाराज ने कहा जैसे लग रहा था कि हमारे राघव अयोध्या के सिंहासन पर विराजमान हो रहे हों। ऋषिगण मंत्रों का उच्चारण कर रहे हों। उन्होंने कहा की पीएम मोदी जब संतों से आशीर्वाद ले रहे थे तो दुनिया भी यह दृश्य देखकर आश्चर्यचकित रह गई। पूज्य सुतीक्षण दास महाराज ने कहा कि आने वाली सदी सनातन की है। सनातन धर्म ही एक ऐसा मार्ग है जो विश्व में सुख और शांति ला सकता है। क्योंकि हमारे पास सर्वे भवंतु सुखिनः का मूल मंत्र है हम विश्व के कल्याण की कामना करते हैं, जबकि अन्य देशों में ऐसा नहीं हैं। इसीलिए विश्व के तमाम देश धीरे-धीरे भारतीय संस्कृति की ओर लौट रहे हैं। इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का बहुत बड़ा योगदान है। पूज्य सुतीक्ष्ण दास महाराज ने कहा कि संसद में संतों को देखकर मैं भी अभिभूत हो उठा। 

मोदी न्याय के प्रतीक हैं : फूलडोल महाराज

वृंदावन में चारों संप्रदायों के प्रमुख पूज्य संत फूलडोल महाराज ने कहा कि सिंगोल की स्थापना करके पीएम नरेंद्र मोदी ने धर्म की स्थापना की है। पहली बार ऐसा हुआ कि संसद में जब धर्म गुरुओं का जमावड़ा लगा। शिखा, तिलक और भगवा वस्त्र धारण करके जब संत संसद में पहुंचे तो ऐसे लगा कि मानों ऋषिगण साक्षात भगवान राम का राज्याभिषेक कर रहे हों। भारतवर्ष के लोगों ने यह दृश्य तो देखा ही देखा दुनिया भी यह देखकर आश्चर्यचकित रह गई। फूलडोल महाराज ने कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी न्याय के प्रतीक हैं और उन्होंने सारी दुनिया में सनातन का मान बढ़ाया है। अभी तक जितने भी प्रधानमंत्री हुए वह धर्मनिरपेक्ष बनने की कोशिश करते थे, जिसके चलते हमारी संस्कृति गर्त में जा रही थी। मगर मोदी ने सारी दुनिया में भारतीय संस्कृति का एक बार फिर से गौरव बढ़ा दिया है। फूलडोल महाराज ने कहा कि संतों के चरण पड़ने से लोकतंत्र का मंदिर भी पवित्र हो गया। उन्होंने दावा किया कि भारतवर्ष दुनिया की सबसे बड़ी शक्ति बनकर उभरेगा। हमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर गर्व है।

राज नारायण सिंह