नमक रोटी खाते हैं संत महाराज, कुटिया स्पर्श करने आती हैं यमुनाजी
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- May 21, 2023
वृंदावन संतों की नगरी भी है। आज भी यहां त्यागी, तपस्वी संत ठाकुरजी की भक्ति में लीन रहते हैं। एक ऐसे ही संत हैं, जो नमक रोटी बाबा के नाम से जाने जाते है। वर्षों से सिर्फ नमक रोटी
वृंदावन संतों की नगरी भी है। आज भी यहां त्यागी, तपस्वी संत ठाकुरजी की भक्ति में लीन रहते हैं। एक ऐसे ही संत हैं, जो नमक रोटी बाबा के नाम से जाने जाते है। वर्षों से सिर्फ नमक रोटी का प्रसाद ग्रहण करके रह रहे हैं। 93 वर्ष की उम्र में आज भी संत महाराज जी नित्य यमुनाजी स्नान करने जाते हैं। यमुनाजी के किनारे बनी झोपड़ी में रहते हैं। यहीं भक्ति और साधना में लीन रहते हैं। यमुनाजी से इतना स्नेह है कि संत महाराज बाद के समय भी अपनी झोपड़ी छोड़कर नहीं जाते हैं, जबकि यमुनाजी के जल से झोपड़ी चारों ओर घिर जाती है। मगर, बाबाजी की एक प्रार्थना पर यमुनाजी स्थान छोड़ कर पीछे सरक जाती हैं।
40 साल से रह रहे हैं वृंदावन में
नमक रोटी बाबा 40 साल से वृंदावन में रह रहे हैं। बाबाजी ने कभी कोई मठ, मंदिर और आश्रम नहीं बनाया। उनका कहना है कि यदि वो मठ और मंदिर बनाते तो इन्हीं में उलझ कर रह जाते इसलिए उन्होंने कभी इस और ध्यान नहीं दिया। सिर्फ राधा रानी और ठाकुरजी की भक्ति करते रहते हैं। सुबह प्रतिदिन चार बजे उठकर भजन कीर्तन शुरू कर देते हैं। फिर पांच बजे यमुनाजी स्नान के लिए निकल जाते हैं।

संत महाराज का सादगी भरा है जीवन
नमक रोटी बाबा जी का जीवन सादगी से भरा हुआ है। संत महाराज के पास सिर्फ एक अचला है। स्नान करते समय पहले उसे धुल कर सुखाते हैं, फिर जब वह सूख जाता है तो उसे पहन लेते हैं। संत महाराज का कहना है कि संत को वस्त्र, भोजन, ठाठ बाट से क्या मतलब। वह यदि इन सब चीजों में रह जाएगा तो उसकी भक्ति नहीं हो पाएगी। संत को सादगी भरा जीवन जीना चाहिए। इसलिए कई बार तो संत महाराज किसी झाड़ी और रज में लेटे हुए मिलते हैं,उनका कहना है कि प्रभु की असली भक्ति यहीं मिलती है। महलों में रहने से प्रभु की भक्ति नहीं मिल सकती है।
कुटिया को स्पर्श करके निकल गईं यमुना मैया
सावन भादों के समय वृंदावन में भी यमुनाजी खूब उफान में रहती हैं। कई बार तो यमुनाजी परिक्रमा मार्ग तक आ जाती हैं। सुदामा कुटी के सामने से निकल रहे परिक्रमा मार्ग पर जल ही जल दिखाई देता है। जुलाई 2022 में यमुनाजी का जल संत महाराज जी की कुटिया तक आ गया। ऐसा लगा कि अब कुटिया डूब जाएगी। ऐसे में बाबाजी का यहां रहना सुरक्षित नहीं था। कई संत कुटिया छोड़ कर चले गए, मगर नमक रोटी वाले संत महाराज छोड़कर नहीं गए। उनका कहना था कि इतना सुंदर अवसर है, जब यमुना मैया उनसे स्वयं मिलने आईं हैं, ऐसे में वो कुटिया छोड़ कर कैसे जा सकते हैं। जबकि यमुना मैया का उफान लगातार बढ़ता जा रहा था। मगर, देखने में आया की यमुना मैया संत महाराज जी की कुटिया को स्पर्श करके चली गईं। संत महाराज ने कहा कि यह उनका सौभाग्य है कि यमुना मैया उन्हें आशीर्वाद देने आईं थीं।



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