यहीं पर रूठ कर राधा रानी बैठ गईं थीं, ठाकुरजी ने रखा था मान
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- May 20, 2023
वृंदावन में यदि आप आए तो मानसरोवर के दर्शन जरूर करिए यहां पर राधा रानी रूठ कर बैठ गई थीं। उन्होंने अपने आंसुओं से तालाब को भर दिया था। भगवान श्रीकृष्ण को जब पता चला तो वह यमुना पार पहुंच गए और राधा रानी के चरणों में अपने मुकुट और वंशी को रख दिया। फिर भगवान श्रीकृष्ण ने राधा रानी
वृंदावन में यदि आप आए तो मानसरोवर के दर्शन जरूर करिए यहां पर राधा रानी रूठ कर बैठ गई थीं। उन्होंने अपने आंसुओं से तालाब को भर दिया था। भगवान श्रीकृष्ण को जब पता चला तो वह यमुना पार पहुंच गए और राधा रानी के चरणों में अपने मुकुट और वंशी को रख दिया। फिर भगवान श्रीकृष्ण ने राधा रानी से क्षमा मांगा और उनके वियोग को दूर किया। आज भी वृंदावन के निकट यमुना उस पार विशाल सरोवर है, जो जल से लबालब है। माना जाता है कि इसी सरोवर को राधा रानी ने अपने आंसुओं से भर दिया था। मंदिर में एक ऐसा चित्र भी है जहां पर ठाकुर जी राधा रानी को मनाते हुए दिखाई दे रहे हैं।

महारास में सखियों संग नृत्य करने पर रूठ गई थी राधा जी
एक बार भगवान श्रीकृष्ण ने महारास रचाया। महारास में राधा रानी के साथ उनकी सखियां भी शामिल हुईं। दिव्य महारास में हर कोई भाव के सागर में डूब गया।नृत्य करते हुए भगवान श्रीकृष्ण राधा रानी की सखियों के पास पहुंच गए। यहां भक्ति और प्रेम का अनूठा संगम देखने को मिला। भावविभोर होकर श्रीकृष्ण राधा रानी की सखियों के साथ नृत्य करने लगे। यह देख राधा रानी का मन व्याकुल हो गया और अचानक महारास को छोड़कर वह वृंदावन में यमुना के उस पार एक निर्जन स्थान पर पहुंच गईं। कुछ देर बाद जब भगवान श्रीकृष्ण ने देखा कि राधा रानी नहीं है तो वह व्याकुल हो गए। और उन्हें ढूंढने के लिए निकल पड़े।

सांसुओं से भर दिया सरोवर
यमुना उस पार राधा रानी जिस स्थान पर बैठी थीं। वहां उनके लगातार आंसू बह रहे थे, बस उनके मन में यह बात थी कि श्रीकृष्ण उनकी सखियों के साथ क्यों रास रचाने लगे। क्योंकि राधा जी भगवान श्रीकृष्ण पर अपना पूर्ण अधिकार मानती थीं। राधारानी के आंसुओं से पूरा सरोवर लबालब हो गया। आज भी यमुना उस पार मांट तहसील के अंतर्गत मानसरोवर के रूप में यह स्थान जाना जाता है। चारों तरफ घना वन है और उसी के बीच में सरोवर बना हुआ है। यहां भव्य राधारानी और ठाकुर जी का मंदिर भी है, जहां बड़ी संख्या में भक्त दर्शन करने के लिए आते हैं।
राधा रानी को मानने पहुंचे ठाकुरजी
महारास में राधा रानी को ना देख अंत में भगवान श्रीकृष्ण उन्हें खोजने लगे। खोजते खोजते हुए यमुना उस पार घने वन में पहुंच गए, जहां पर राधा जी रूठ कर बैठी हुई थीं। भगवान श्रीकृष्ण ने देखा कि राधा रानी के आंसुओं से नजदीक एक सरोवर लबालब हो गया है। श्रीकृष्ण जान गए कि राधा रानी महारास से रूठ कर आईं हैं। इसलिए उन्होंने उन्हें खूब मनाया और कहा कि आगे से इस प्रकार की गलती नहीं होगी। फिर राधा रानी के चरणों में अपनी वंशी और मुकुट रख दिया। इस पर राधारानी भावुक हो गईं और बोलीं कि कन्हैया तुमने यह क्या किया? भगवान श्रीकृष्ण ने कहा कि नहीं राधे मुझसे गलती हुई है इसलिए मैं उसका पश्चाताप कर रहा हूं।

यहां आने पर पूर्ण होती है मनौती
ऐसी मान्यता है कि मानसरोवर पर जो भी भक्त भाव और भक्ति से आता है, उसकी मनौती राधारानी जरूर पूर्ण करती हैं इसीलिए देशभर के कोने-कोने से भक्त राधा रानी के मंदिर में पहुंचते हैं। यहां विशाल मंदिर बना हुआ है, जिसमें राधा रानी विराजमान हैं। एक प्राचीन मंदिर भी है, जिसमें राधा रानी का वह चित्र है, जहां पर भगवान श्रीकृष्ण राधा रानी के चरणों में वंशी और अपना मुकुट रखते हुए दिखाई दे रहे हैं। मंदिर के चारों तरफ घना वन है, इसमें मोर और तमाम तरह के पक्षी दिखाई देते हैं। यहां का वातावरण बहुत ही शांति और सुकून देने वाला है। इसलिए यहां बैठने पर ऐसा लगता है कि जैसे साक्षात राधा रानी के दर्शन हो रहे हैं।

इस प्रकार पहुंचे मानसरोवर
मानसरोवर मथुरा जिले के मांट तहसील के अंतर्गत आता है। वृंदावन से इसकी दूरी बमुश्किल आठ से दस किलोमीटर है। मानसरोवर पहुंचने के दो प्रमुख मार्ग हैं। पहला मथुरा रेलवे स्टेशन से वृंदावन पानी गांव होते हुए मानसरोवर पहुंचा जा सकता है। दूसरा मार्ग वृंदावन में केसी घाट पार करते हुए बाईपास रोड से भी मानसरोवर पहुंचा सकते हैं। पानी गांव से जब मांट के लिए आगे बढ़ेंगे तो घना वन दिखाई देगा और एक मोड़ पड़ेगा उसी से आप पहचान सकते हैं यह मानसरोवर है। बाईपास से उतरते ही एक विशाल गेट बना हुआ है। उसी रास्ते से आप मंदिर पहुंच सकते हैं।

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