निर्जला एकादशी पर वृंदावन में आखिर क्यों दिखता है यह दृश्य?
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- May 31, 2023
ज्येष्ठ मास की शुक्ल पक्ष की निर्जला एकादशी पुण्य फल प्राप्त करने वाली होती है। इस दिन निर्जला व्रत रखने से भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं और सभी मनोकामना पूर्ण होती है।इसलिए इस दिन
ज्येष्ठ मास की शुक्ल पक्ष की निर्जला एकादशी पुण्य फल प्राप्त करने वाली होती है। इस दिन निर्जला व्रत रखने से भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं और सभी मनोकामना पूर्ण होती है। इसलिए इस दिन पूरे देश में साधक निर्जला व्रत रखते हैं। घड़े, पंखे और खरबूज, तरबूज आदि का दान भी करते हैं। शास्त्रों में बताया गया है कि इस एकादशी का व्रत करने से 12 एकादशी व्रत के बराबर फल की प्राप्ति होती है। मगर, निर्जला एकादशी के दिन वृंदावन का दर्शन अभिभूत करने वाला होता है। श्री बांके बिहारी जी की अनोखी छटा देखने को मिलती है। परिक्रमा मार्ग भक्ति के डोर से बंध उठता है। भक्तों का आस्था का सैलाब देखते बनता है। कड़ी धूप में भी श्रद्धालु नंगे पांव परिक्रमा लगाते हैं। बहुत से तो भक्त दंडवती लगाते हैं।
आस्था के सैलाब में परिक्रमा मार्ग
वैसे तो वृंदावन में एकादशी के दिन बड़ी संख्या में भक्त परिक्रमा लगाते हैं, मगर निर्जला एकादशी के दिन भक्तों के आस्था का सैलाब उमड़ पड़ता है। इस बार बुधवार को तड़के चार बजे से परिक्रमा शुरू हो गई। बहुत से भक्त ब्रह्म मुहूर्त में परिक्रमा लगाते हैं। इसलिए परिक्रमा मार्ग राधे राधे के कीर्तन से गूंज उठता है। कन्हैया के भजन के रस में अभी डूब जाते हैं। सूर्यदेव की किरणें जैसे जैसे धरती को प्रकाश से भरना शुरू करती हैं, परिक्रमा की पंक्तियां और गहरी होती जाती हैं। सुबह आठ बजे तो यह स्थिति हो जाती है कि परिक्रमा मार्ग भक्तों के सैलाब से भर जाता है। भक्ति के रस की बारिश होने लगती है। जो भक्त पहली बार यह दृश्य देखते हैं वह अभिभूत हो जाते हैं।
दान पुण्य का है विशेष महत्व
निर्जला एकादशी के दिन दान पुण्य का भी विशेष महत्व होता है। इस दिन दान किए हुए वस्तु का कई गुना फल मिलता है। इसलिए वृंदावन में सभी आश्रमों में सुबह से ही सेवा प्रारंभ हो जाती है। दिल्ली, गुड़गांव, फरीदाबाद, गाजियाबाद, नोएडा आदि स्थानों से आए भक्त भी पुण्य कमाना चाहते हैं। इसलिए बड़ी संख्या में वह सेवा करते हैं। आश्रमों में फल, मिष्ठान आदि का वितरण कराया जाता है। विशेष प्रसाद की व्यवस्था की जाती है। भजन कीर्तन भी होता है। पूरा वृंदावन भक्तिमय हो जाता है। देशभर में तमाम जगहों पर भक्त घड़े, पंखे, फल, वस्त्र आदि दान के देते हैं। बड़ी संख्या में भक्त गंगा स्नान को भी जाते हैं।
प्रसन्न होते हैं भगवान विष्णु पूरी होती है सभी मनोकामना
निर्जला एकादशी पर व्रत व पूजन करने से भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं। मां लक्ष्मी का भी आशीर्वाद मिलता है। इस दिन सुबह स्नान करके भगवान विष्णु को पीले वस्त्र, पुष्प और मिष्ठान अर्पित करना चाहिए। इससे वह प्रसन्न होते हैं और मनवांक्षित फल की प्राप्ति होती है। प्रभु सभी मनोकामना को पूर्ण करते हैं। पूरे दिन निर्जला व्रत रखना चाहिए। शाम को माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु की आरती करनी चाहिए।
त्याग और समर्पण सिखाता है व्रत
हमारे देश में सभी तीज त्योहारों का प्रकृति और मानव कल्याण से जुड़ाव है। चूंकि ज्येष्ठ मास को भीषण गर्मी पड़ती है। ऐसे में पल पल में कंठ सूखता है। सबसे अधिक दिक्कत राहगीरों को होती है। इसलिए निर्जला एकादशी पर भक्त प्याऊ की व्यवस्था करते हैं। जगह जगह जल से भरे घड़े भी रखते हैं। जिससे राहगीरों को दिक्कत ना हो। तमाम जगहों पर तो परिवार के साथ सभी सेवा में जुट जाते हैं। हमें भी अपनी सनातन संस्कृति को युवाओं तक पहुंचाने का काम करना चाहिए, उन्हें इस पुण्य कार्य में लगाना चाहिए, जिससे अपनी प्राचीन परंपरा से जुड़ सकें। यह परंपरा सिर्फ भारत में है, अन्य देश में लोक कल्याण और प्रकृति के पूजन की परपंरा नहीं है।





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