गोकुल में भगवान श्रीकृष्ण ने रची ऐसी लीला, वृक्षों का इस प्रकार किया उद्धार
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- April 30, 2023
गोकुल में भगवान श्रीकृष्ण की अद्भुत लीलाएं रही हैं। बाल रूप में भगवान श्रीकृष्ण ने अनेक राक्षसों का वध किया है। गोकुल में ही भगवान श्रीकृष्ण ने यामला अर्जुन के वृक्ष का भी उद्धार कि
गोकुल में भगवान श्रीकृष्ण की अद्भुत लीलाएं रही हैं। बाल रूप में भगवान श्रीकृष्ण ने अनेक राक्षसों का वध किया है। गोकुल में ही भगवान श्रीकृष्ण ने यामला अर्जुन के वृक्ष का भी उद्धार किया था, जो नारद जी के श्राप से श्रापित थे। यामला अर्जुन के वृक्ष जो वृक्ष के रूप में गोकुल में आए। आइए गोकुल की लीलाओं के बारे में जानते हैं।

वृक्षों का भी भगवान श्रीकृष्ण करते हैं उद्धार
कथा में ऐसा वर्णन है कि यामला अर्जुन अपने वृक्ष योनि से उद्धार चाह रहे थे। नारद जी ने कहा था कि जिस दिन भगवान श्रीकृष्ण से तुम्हारा स्पर्श होगा उसी दिन तुम्हारा उद्धार हो जाएगा। फिर वृक्ष योनि से यानी की जड़ योनि से तुम्हारी मुक्ति हो जाएगी और तुम पुनः गंधर्व बन जाओगे। उन दोनों भाइयों का उद्धार करने के लिए भगवान श्री कृष्ण ने एक लीला रची।

मैया से भगवान श्रीकृष्ण ने मांगा माखन
भगवान श्रीकृष्ण जोर जोर से रोने लगे । वो कहने लगे मैया मुझे माखन चाहिए। वो बस एक ही रट लगाए थे कि मैया मुझे माखन चाहिए। उस समय यशोदा मैया चूल्हे पर दूध गर्म कर रही थीं। यशोदा मैया ने कहा कि बेटा पहले दूध गर्म हो जाए तो मैं तुझे माखन दूंगी, लेकिन कन्हैया रोते जा रहे थे। कन्हैया को जब माखन नहीं मिला तो वो गुस्से में आ गए। कन्हैया ने छड़ी उठाई और माखन की मटकी फोड़ दी। यह देख माता यशोदा को गुस्सा आ गया। बोलीं, कन्हैया तू हर दिन मटकी फोड़ता है। माता यशोदा कन्हैया की पीछे डंडा लेकर भागने लगी। कन्हैया तेज तेज भागने लगे। मैया कन्हैया को पकड़ने के लिए दौड़ने लगी। किसी तरह से मैया ने कन्हैया को पकड़ लिया।

कन्हैया को ओखल में बांध दिया
मैया ने गुस्से में आकर कन्हैया को ओखल से बांधा दिया। मैया ने कहा की अब कहीं जाकर तू दिखा तब मैं जानू। कन्हैया को बांधकर मैया चली जाती हैं। फिर मैया काम में व्यस्त हो जाती हैं।
उन्हें ध्यान ही नहीं रहता है कि कन्हैया को वो ओखल से बांधकर आई हैं। शाम हो गई कन्हैया ने सोचा कि अब मुझे लीला करनी चाहिए।

फिर कन्हैया ने रची लीला
फिर कन्हैया उस ओखल को धीरे-धीरे सरकाने लगे। फिर, वो ओखल को यामला अर्जुन के दोनों वृक्ष के बीच में ले गए। उन्होंने जानबूझकर दोनों वृक्ष के बीच में ओखल को फंसा दिया।
फिर, कन्हैया जोर-जोर से हंसने लगे और हंसते-हंसते उन्होंने दोनों पक्षों को काट कर फेंक दिया। जैसे ही यामला अर्जुन के दोनों वृक्ष गिरते हैं उनमें से दो पुरुष देवरूप में प्रकट होते हैं और भगवान से प्रार्थना करते हैं प्रभु आपने हमें इस वृक्ष योनि से मुक्ति कराई है। हमारा जीवन धन्य हो गया। हे प्रभु अब हमें आप ऐसा आशीर्वाद दें जिससे कि दोबारा हमसे यह गलती ना हो और हम आपका नाम जाप करते रहें। तब बाल रूप भगवान श्रीकृष्ण ने कहा ध्यान रखना आगे से किसी ऋषि का अपमान मत करना, बड़ों का सम्मान करना और किसी भी प्रकार से कोई भी आपके कार्य से दुखी ना हो। भगवान ने उन्हें आशीर्वाद दिया और अपने चतुर्भुज रूप का दर्शन कराया।
अपने धाम विरजामान हो गए
इसके बाद यामला वृक्ष अपने धाम में विराजमान हो गए और भगवान श्रीकृष्ण के बाल रूप में आकर फिर वृक्षों से बंध जाते हैं। सारे गोकुलवासी आते हैं। वो कहते हैं की यह क्या हुआ? अर्जुन वृक्ष कैसे उखड़ गए? फिर सभी गोकुल वासी जान लेते हैं कि यह प्रभु की लीला है और हाथ जोड़कर भगवान श्री कृष्ण के सामने खड़े हो जाते हैं।

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