भगवान श्रीकृष्ण ने खाई यहां माटी, धन्य हो गई वो धरती
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- May 1, 2023
भगवान श्रीकृष्ण की अद्भुत और अलौकिक लीलाओं के दर्शन कई जगह मिलते हैं। उन्होंने ब्रज में लीला के माध्यम से सभी को रस से भर दिया। श्रीकृष्ण की लीलाएं भाव से भरने वाली हैं फिर चाहे वह
भगवान श्रीकृष्ण की अद्भुत और अलौकिक लीलाओं के दर्शन कई जगह मिलते हैं। उन्होंने ब्रज में लीला के माध्यम से सभी को रस से भर दिया। श्रीकृष्ण की लीलाएं भाव से भरने वाली हैं फिर चाहे वह पड़ोस के घर में मटकी तोड़कर माखन चुराने की हो या फिर स्नान करती गोपियों से वस्त्र चुराना हो इन सभी लीलाओं में कुछ ना कुछ भाव था।
श्रीकृष्ण की अलग-अलग लीलाओं के कारण ही उन्हें कई नाम भी मिले। श्रीकृष्ण की लीलाओं में एक अद्भुत लीला से मैय्या यशोदा भी चकित रह गई थीं। जानिए जब यशोदा मैय्या ने कान्हा को माटी खाते हुए पकड़ लिया, तब क्या हुआ था? सुनिए गोकुल की यह अनुपम लीला।

कन्हैया ने चोरी छिपे खाई माटी
कान्हा बचपन में केवल माखन-मिश्री ही नहीं बल्कि माटी भी खाते थे। एक बार यशोदा मैय्या से किसी ने शिकायत कर दी कि तुम्हारा लल्ला माटी खा रहा है। यह सुनकर यशोदा मैय्या तुरंत कान्हा के पास पहुंची और कान्ह को धमकाते हुए कहा, लल्ला तूने माटी खाई है।

पूरे ब्रह्माण्ड का कराया दर्शन
कन्हैया के मुख में माटी थी। वह थोड़ा सकोचाए, मगर कान्हा ने गर्दन हिलाकर बड़े ही भाव से कहा कि मैया मैने माटी नहीं खाई है। तब मैया यशोदा कन्हैया की सत्यता जानने को उत्सुक हो गईं।
वो जानना चाह रही थीं कि आखिर कान्हा सत्य बोल रहे हैं या झूठ। माता यशोदा ने जबरदस्ती कान्हा से मुंह खोलने को कहा। जैसे ही कान्हा ने अपना मुंह खोला, मैया यशोदा को पूरे ब्रह्मांड के दर्शन हो गए।

मैया यशोदा चकित होकर गिर पड़ीं
कान्हा के छोटे से मुंह में अंतरिक्ष, दिशाएं, द्वीप, पर्वत, समुद्र समेत पूरा ब्रह्मांड नजर आ रहा था. कान्हा के मुंह में ऐसा दृश्य देख एक बार तो मैया यशोदा भी यह सोचने लगी कि कहीं यह स्वप्न तो नहीं है और चकित होकर वहीं गिर पड़ीं.

शक्ति से यशोदा मैया सबकुछ भूल गईं
इधर श्रीकृष्ण भी समझ गए कि मैया उनके तत्व और अलौकिक शक्तियों से अवगत हो गई हैं। तब श्रीकृष्ण ने तुरंत अपनी शक्ति रूप माया विस्तृत कर दी, जिससे क्षणभर में मैया यशोदा सबकुछ भूल गईं और उन्होंने कान्हा को उठाकर अपनी गोद में बिठा लिया।

श्रीकृष्ण को लगता है माटी का भोग
श्रीकृष्ण की इस बाल लीला के कारण उन्हें माखन-मिश्री के साथ ही माटी का भोग भी लगाया जाता है। मथुरा जनपद के महावन क्षेत्र में स्थित श्रीकृष्ण के एक मंदिर में भगवान को माटी का भोग लगाया जाता है. इस मंदिर के समीप ही यमुना नदी है।
भगवान के प्रसाद के लिए पेड़े का भोग तैयार करने के लिए यमुना से मिट्टी निकाली जाती है और पेड़े का भोग बनाया जाता है। जन्माष्टमी के साथ ही सामान्य दिनों में भी यहां भक्तों की भारी भीड़ होती है। कहा जाता है कि यमुना नदी के इसी घाट के पास भगवान कृष्ण के मुख में मैया यशोदा को ब्रह्मांड के दर्शन हुए थे। इसलिए इसे ‘ब्रह्मांड घाट’ कहा जाता है और यहां स्थित भगवान को ‘ब्रह्मांड में हरी’ के नाम से जाना जाता है।

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