सनातन धर्म की रक्षा के लिए मां काली की भी पूजा है जरूरी : पूज्य स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती
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- June 9, 2023
श्री काशी सुमेरु पीठाधीश्वर अनन्त श्री विभूषित पूज्य जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी नरेन्द्रानन्द सरस्वती जी महाराज सनातन धर्म, संस्कृति और भारतीय परम्परा के प्रचार-प्रसार के लिए देशव्यापी भ्रमण कर रहे हैं।
श्री काशी सुमेरु पीठाधीश्वर अनन्त श्री विभूषित पूज्य जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी नरेन्द्रानन्द सरस्वती जी महाराज सनातन धर्म, संस्कृति और भारतीय परम्परा के प्रचार-प्रसार के लिए देशव्यापी भ्रमण कर रहे हैं। इस अभियान में पूज्य महाराज जी ने झारखण्ड प्रदेश के गिरिडीह जनपद के बागोडीह (सरिया) में आयोजित माता काली के प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम में सभी से सनातन धर्म की रक्षा की अपील की। उन्होंने कहा की दुनिया की सबसे प्राचीन संस्कृति पर तमाम तरह से हमले किए जा रहे हैं। हमें सतर्क रहने की जरूरत है। जीवन में कुछ भी करने के लिए शक्ति की आवश्यकता होती है। शक्ति के बिना कोई क्रिया सम्भव नहीं । सौभाग्य की बात है कि यहां माता काली प्रतिष्ठित हो रही हैं।

मां काली सभी का करती हैं कल्याण
माता कालिका के अनेक रूप हैं, जिनमें से प्रमुख हैं- (1) दक्षिण काली, (2) श्मशान काली, (3) मातृ काली और (4) महाकाली।
इसके अलावा श्यामा काली, गुह्य काली, अष्ट काली और भद्रकाली आदि अनेक रूप भी हैं। सभी रूपों की अलग अलग पूजा और उपासना पद्धतियां है। यहां सनातनधर्मी यदि विधि-विधान से माता काली की पूजा आराधना करेंगे तो निश्चित रूप से उनका कल्याण और मंगल होगा।

दक्षिण काली क्या है और क्या है उनका मंत्र
(1) दशमहाविद्यान्तर्गत भगवती दक्षिणा काली (दक्षिण काली) की उपासना की जाती है। सनातन धर्म ग्रन्थों की मान्यता के अनुसार महाकाल की प्रियतमा काली ही अपने दक्षिण और वाम रूप में प्रकट हुईं और दस महाविद्याओं के नाम से विख्यात हुईं ।बृहन्नीलतन्त्र में कहा गया है कि रक्त और कृष्णभेद से काली ही दो रूपों में अधिष्ठित है। कृष्णा का नाम दक्षिणा और रक्तवर्णा का नाम सुंदरी है। (2) दक्षिण काली का मंत्र है--ॐ हूं ह्रीं दक्षिण कालिके खड्गमुण्ड धारिणी नम:।। (3) इसके अतिरिक्त भी माता काली के अनेक मन्त्र हैं, जिनमें से किसी भी मंत्र का जाप तब किया जा सकता है, जब इसकी पूजा पद्धति और विधिवत जाप की विधि ज्ञात हो। इसके बाद ध्यान, स्तुति और प्रार्थना के श्लोक भी होते हैं।

राक्षसों का विनाश करती हैं मां काली
पूज्य शंकराचार्य जी महाराज ने कहा कि काली' का अर्थ है समय और काल। काल, जो सभी को अपने में निगल जाता है । भयानक अंधकार और श्मशान की देवी। वेद अनुसार 'समय ही आत्मा है, आत्मा ही समय है '। मां कालिका की उत्पत्ति धर्म की रक्षा और पापियों-राक्षसों का विनाश करने के लिए हुई है। माता काली जगदम्बा की महामाया हैं । मां ने सती और पार्वती के रूप में जन्म लिया था। माता कालिका 10 महाविद्याओं में से एक हैं ।
मां काली के 4 रूप हैं- दक्षिणा काली, शमशान काली, मातृ काली और महाकाली। माता ने महिषासुर, चण्ड, मुण्ड, धूम्राक्ष, रक्तबीज, शुम्भ, निशुम्भ आदि राक्षसों का वध किया था।

सनातन धर्म में सबसे जाग्रत देवी हैं मां काली
कलियुग में तीन देवता जाग्रत कहे गए हैं-श्री हनुमान जी, माता कालिका और बाबा भैरव जी। कालिका की उपासना जीवन में सुख, शांति, शक्ति, विद्या देने वाली है। माता कालिका की भक्ति का प्रभाव व्यावहारिक जीवन में मानसिक, शारीरिक और सांसारिक बुराइयों का अन्त कर देती है, जिससे किसी भी व्यक्ति का तनाव, भय और कलह नष्ट हो जाता है। सनातन धर्म में सबसे जागृत देवी हैं मां कालिका हैं। 'काली' शब्द का अर्थ काल और काले रंग से है। 'काल' का अर्थ होता है- समय। माता काली देवी दुर्गा जी की 10 महाविद्याओं में से एक हैं। स्वामी बृजभूषणानन्द सरस्वती ने कहा कि पूज्य गुरुदेव महाराज पूरे देश में सनातन के प्रचार प्रसार में निकलें हैं। हिंदू समाज को जागना होगा, अपनी शक्ति का प्रदर्शन करना होगा। क्योंकि भय बिनु होय न प्रीत। सचिन्द्र सिंह, अमरीश तिवारी, मधुप पाण्डेय सहित हजारों सनातनधर्मी उपस्थित थे।


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