जानिए, किन चीजों से भगवान शिव का पूजन करने से क्या क्या मिलता है लाभ

श्री काशी सुमेरु पीठाधीश्वर अनन्त श्री विभूषित पूज्य जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी नरेन्द्रानन्द सरस्वती जी महाराज सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार में  आन्ध्र प्रदेश पहुंचे। 

श्री काशी सुमेरु पीठाधीश्वर अनन्त श्री विभूषित पूज्य जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी नरेन्द्रानन्द सरस्वती जी महाराज सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार में  आन्ध्र प्रदेश पहुंचे। राष्ट्र की समृद्धि एवम् विश्व मांगल्य की कामना से श्रीशैलम् मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग का वैदिक विधि-विधान से अभिषेक एवम् श्री भ्रमराम्बिका माता का दर्शन पूजन किया। पूज्य शंकराचार्य  महाराज ने कहा कि रुद्रार्चन और रुद्राभिषेक से व्यक्ति की कुण्डली से पातक कर्म एवं महापातक भी जलकर भस्म हो जाते हैं। साधक में शिवत्व का उदय होता है । भगवान शिव का शुभाशीर्वाद भक्त को प्राप्त होता है और उनके सभी मनोरथ पूर्ण होते हैं । एकमात्र सदाशिव रुद्र के पूजन से सभी देवताओं की पूजा स्वत: हो जाती है। पूज्य शंकराचार्य जी महाराज ने कहा कि भगवान शिव का भिन्न-भिन्न प्रकार से किये गये अभिषेक से भिन्न-भिन्न प्रकार के कामनाओं की पूर्ति सुनिश्चित होती है

महत्वपूर्ण है जल से अभिषेक

भगवान शिव का जल से अभिषेक करने पर वर्षा होती है । असाध्य रोगों के शमन हेतु कुशोदक से रुद्राभिषेक करना चाहिए। भवन-वाहन के लिए दही से रुद्राभिषेक करना चाहिए । लक्ष्मी प्राप्ति के लिए गन्ने के रस से रुद्राभिषेक करने का विधान है। धनवृद्धि के लिए शहद एवं घृत से अभिषेक किया जाता है  और तीर्थ के जल से अभिषेक करने पर मोक्ष की प्राप्ति होती है। इत्र मिश्रित जल से अभिषेक करने से बीमारी नष्ट होती है। पूज्य शंकराचार्य जी महाराज ने कहा कि यदि पुत्र प्राप्ति के लिए अभिषेक करना है तो दुग्ध से करना चाहिए। इस प्रकार के रुद्राभिषेक से योग्य तथा विद्वान संतान की प्राप्ति होती है। ज्वर की शान्ति हेतु शीतल जल या गंगाजल से रुद्राभिषेक करने का विधान है। सहस्रनाम मन्त्रों का उच्चारण करते हुए घृत की धारा से रुद्राभिषेक करने पर वंश विस्तार का फल प्राप्त होता है । प्रमेह रोग की शान्ति भी दुग्धाभिषेक से हो जाती है । शक्कर मिले दूध से अभिषेक करने पर जड़बुद्धि वाला व्यक्ति भी विद्वान हो जाता है। शत्रुओं से परेशान व्यक्ति यदि सरसों के तेल से अभिषेक करे तो वह शत्रुओं को पराजित करने में निश्चित रूप से सफल हो जाता है। शहद के द्वारा अभिषेक करने पर यक्ष्मा (तपेदिक) दूर हो जाती है और पातकों को नष्ट करने की कामना होने पर भी शहद से ही रुद्राभिषेक किया जाता है । गोदुग्ध से तथा शुद्ध घृत द्वारा अभिषेक करने से व्यक्ति को आरोग्यता प्राप्त होती है। 

भगवान शिव कल्याण के देवता हैं

पूज्य शंकराचार्य जी महाराज ने कहा कि वैसे भी सर्वविदित है कि “सर्व कल्याणम् करोति, इति शंकर: ", भगवान शिव कल्याण के देवता हैं, आशुतोष-अर्थात् शीघ्र प्रसन्न होने वाले देवता हैं । भगवान शिव की पवित्र मन एवम् श्रद्धा से की गई पूजा सदा कल्याणकारी ही होती है।

नई पीढ़ी भी शिव की करे पूजा

 स्वामी बृजभूषणानन्द सरस्वती ने कहा नई पीढ़ी को भी भगवान शिव की पूजा करनी चाहिए अक्सर देखा जाता है कि बच्चे पढ़ाई लिखाई के चलते पूजा-पाठ से दूर रहते हैं मगर भगवान से जुड़े रहते हैं और पूजा पाठ करते हैं तो उन्हें हर क्षेत्र में सफलता मिलेगी इसलिए बच्चों को भी भगवान शिव का पूजन जरूर करना चाहिए जिससे वह अपने भारतीय संस्कृति से भी जुड़े रहेंगे। 
 नरेशानन्द ने कहा कि नई पीढ़ी भारतीय संस्कृति की अपेक्षा भाषा संस्कृति से तेजी से प्रभावित हो रही है जबकि दुनिया भारतीय संस्कृति की ओर आंखें गड़ाए हुए बैठी हैं उन्हें पता है कि भारतीय संस्कृति ही एकमात्र ऐसी संस्कृति है जो दुनिया में सुख और शांति ला सकती है इसलिए नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति से प्रभावित होना चाहिए। ठा. जयपाल सिंह नयाल, गोविन्द राठी, डा. मोहन गुप्ता आदि ने भी दर्शन-पूजन कर पूज्य महाराज जी से आशीर्वाद प्राप्त किया।