इस स्थान पर यदि कर लिया स्नान तो मिलता है सभी तीर्थों का पुण्य
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- April 30, 2023
भारत तीर्थों का देश हैं। यहां पग पग पर मंदिर, मठ, देवालय आदि हैं। जिनके दर्शन करने के लिए बड़ी संख्या में भक्त आते हैं। ब्रज में मानसी गंगा भी एक ऐसा ही तीर्थ स्थल है,
भारत तीर्थों का देश हैं। यहां पग पग पर मंदिर, मठ, देवालय आदि हैं। जिनके दर्शन करने के लिए बड़ी संख्या में भक्त आते हैं। ब्रज में मानसी गंगा भी एक ऐसा ही तीर्थ स्थल है, यहां एक बार जो भी आ जाता है उसे सभी तीर्थों का पुण्य मिलता है। ऐसा बताया जाता है कि मानसी गंगा स्वयं भगवान श्री कृष्ण के मन से उत्पन्न हुई हैं। इसीलिए यहां का दर्शन करना और स्नान करना बहुत पुण्य माना जाता है। मानसी गंगा उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले के गोवर्धन में स्थित है। यह परिक्रमा मार्ग से एकदम सटी हुई हैं। मानसी गंगा के ही निकट गोवर्धन भगवान जी का विशाल मंदिर भी है, जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन करने आते हैं।

नंदबाबा को गंगा स्नान की इच्छा जागृत हुई
ऐसा बताया जाता है कि एक बार नंदबाबा, माता यशोदा और ब्रजवासियों को गंगा स्नान की इच्छा जागृत हुई। नंदबाबा सभी ब्रजवासियों के साथ गंगा स्नान के लिए चल पड़े। रास्ते में शाम हो गई और अंधेरा छाने लगा। नंद बाबा ने सभी से कहा कि अंधेरा हो गया है। इसलिए अब आगे चलना ठीक नहीं है। क्यों ना रात्रि विश्राम यहीं कर लिया जाए। सुबह फिर हम सब गंगा स्नान के लिए चलेंगे। जिस स्थान पर नंद बाबा ब्रजवासियों के साथ रुके वह स्थान गोवर्धन था।
भगवान के मन से प्रगट हुई मानसी गंगा
जब सभी ब्रजवासी सो गए तो भगवान श्री कृष्ण के मन में एक विचार आया। उन्होंने सोचा कि जब सभी तीर्थ ब्रज में ही हैं तो क्यों ना गंगा को भी यही प्रगट कर लिया जाए। ब्रजवासियों को गंगा स्नान के लिए यात्रा करनी पड़ेगी तो उन्हें दिक्कत होगी। इसलिए गंगा को यही बुला लिया जाए। भगवान श्रीकृष्ण के मन में यह प्रश्न आते ही गंगाजी स्वयं अवतरित हो गईं और गोवर्धन में परिक्रमा मार्ग के निकट एक ही स्थान पर वह प्रवाहित होने लगी।

गंगा को देख आश्चर्य में पड़ गए सभी बृजवासी
दूसरे दिन जब सुबह ब्रजवासियों की निद्रा टूटी तो उन्होंने गंगा स्नान की तैयारी शुरू कर दी। सभी गंगा स्नान के लिए चलने को तैयार हो गए, मगर तभी उन्होंने देखा उनके पास ही गंगाजी बह रही हैं। यह देखकर बृजवासी आश्चर्यचकित हो गए। नंद बाबा भी आश्चर्य में पड़ गए कि आखिर गंगा मैया यहां कैसे आ गईं? ब्रजवासियों ने जान लिया यह कन्हैया की लीला है। कन्हैया की लीला अपरंपार है, वह कुछ भी कर सकते हैं। इसलिए सभी ब्रजवासियों ने आस्था के साथ मानसी गंगा में डुबकी लगाई। मनौती मानी,पूजन किया और दीपदान किया।

आज भी बड़ी संख्या में लोग करते हैं दीपदान
मानसी गंगा में आज भी भक्तगण आस्था की डुबकी लगाकर परिक्रमा की शुरुआत करते हैं। ऐसी मान्यता है कि यहां से स्नान करने के बाद परिक्रमा प्रारंभ करने से मानसी गंगा सभी मनोकामना पूर्ण करती हैं। इसलिए मानसी गंगा पर स्नान की काफी अच्छी सुविधा की गई है। साथ ही कार्तिक मास में यहां पर बड़ी संख्या में दीपदान किया जाता है। पूरी मानसी गंगा दीपों से नहा उठती हैं। पूरी मानसी गंगा दीपों से जगमग हो जाती है। कार्तिक मास में भक्तों का यहां सैलाब उमड़ता है और भक्तगण भी दीपदान करके मानसी गंगा का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। यहां चारों तरफ सीढ़ियां बनी हुई है और कई स्थानों पर स्नान के लिए स्थान निर्धारित किया गया है। इसलिए आप कभी भी जाएं तो निर्धारित स्थान पर ही स्नान करें क्योंकि मानसी गंगा की गहराई काफी है। इसलिए सावधानी रखना बहुत जरूरी है।

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