द्वादश ज्योतिर्लिंग की स्थापना से जीवन में बनते हैं ये काम
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- June 5, 2023
श्री काशी सुमेरु पीठाधीश्वर अनन्त श्री विभूषित पूज्य जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी नरेन्द्रानन्द सरस्वती जी महाराज ने कहा कि हमारी पूजा पद्धति हमें हमारे धर्म और संस्कृति के प्रति
महाराज के पावन सानिध्य में श्री काशी सुमेरु पीठाधीश्वर अनन्त श्री विभूषित पूज्य जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी नरेन्द्रानन्द सरस्वती जी महाराज ने कहा कि हमारी पूजा पद्धति हमें हमारे धर्म और संस्कृति के प्रति सशक्त करती है। इसलिए वर्षों से विधि विधान से पूजा पाठ होते आ रहे हैं और भारत में पीढ़ी दर पीढ़ी यह परंपरा लगातार बढ़ती जा रही है। उन्होंने कहा की द्वादश ज्योतिर्लिंगों की स्थापना से जीवन के हर कार्य पूर्ण होते हैं। भगवान भोलेनाथ जीवन को भी सफल बनाते हैं। पूज्य महाराज बलिया जिले के ढूहा बिहरा गांव में सरयू तट पर स्वामी ईश्वर दास ब्रह्मचारी “मौनी बाबा" की ओर से आयोजित नव कुण्डीय अद्वैत शिवशक्ति अति महायज्ञ में शामिल होने पहुंचे थे। द्वादश ज्योतिर्लिंग की स्थापना स्वामी ईश्वर दास जी महाराज “मौनी बाबा" द्वारा पूज्य शंकराचार्य जीकी गई।
जीवन के सभी कष्ट होते हैं दूर
पूज्य शंकराचार्य जी महाराज ने कहा कि हमारी पौराणिक मान्यता के अनुसार भगवान शिवजी जहां जहां स्वयं प्रकट हुए, उन्हीं द्वादश स्थानों पर स्थित शिवलिंगों को पवित्र ज्योतिर्लिंगों के रूप में पूजा जाता है। इन द्वादश ज्योतिर्लिंगों के न सिर्फ दर्शन करने पर शिव भक्त को विशेष फल की प्राप्ति होती है, अपितु इनका प्रतिदिन नाम लेने मात्र से जीवन के सभी दु:ख दूर हो जाते हैं। ज्योतिर्लिंग अर्थात् 'व्यापक ब्रह्मात्मलिंग' जिसका अर्थ है 'व्यापक प्रकाश'। जो शिवलिंग के बारह खण्ड हैं। शिवपुराण के अनुसार- ब्रह्म, माया, जीव, मन, बुद्धि, चित्त, अहंकार, आकाश, वायु, अग्नि, जल और पृथ्वी को ज्योतिर्लिंग कहा गया है। भगवान शिव के आठ द्वारपाल हैं- नन्दी, स्कन्द, रिटी, वृषभ, भृंगी, गणेश, उमामहेश्वर और महाकाल। इसी अनुसार आठ गण भी हैं- नन्दी, श्रृंगी, भृगिरिटी, शैल, गोकर्ण, घण्टाकर्ण, वीरभद्र और महाविकट हैं।
प्रकृति के पुजारी हैं सनातनी
पूज्य महाराज जी ने कहा कि प्रत्येक देवी-देवताओं की प्रिय वनस्पतियां होती हैं, उन्हीं से अपने-अपने आराध्य की पूजा की जाती है। इससे साफ पता चलता है कि हम प्रकृति के भी पुजारी हैं। भगवान शिवजी की प्रिय वनस्पतियां -रुई, पीला कनेर, बिल्वपत्र, शमी पत्र, कमल, बकुल, धतूरा सभी तरह के सुगंधित फूलों के साथ नीलकमल विशेष प्रिय हैं। इन्हीं वनस्पतियों से भगवान शिव की पूजा करनी चाहिए। विधि अनुसार पूजन से इच्छित फल की प्राप्ति निश्चित रूप से होती है। मौनी बाबा ने द्वादश ज्योतिर्लिंग की स्थापना करके भक्तों के लिए द्वादश ज्योतिर्लिंगों के दर्शन-पूजन को शिवभक्तों के लिए बहुत ही सुगम कर दिया है। भगवान शिव सभी भक्तों एवम् श्रद्धालुओं की हर मनोकामना पूर्ण करेंगें।
धर्म के प्रति और प्रतिबद्ध हों
स्वामी बृजभूषणानन्द सरस्वती ने कहा की आज धर्म के प्रति हमें और सशक्त होने की जरूरत है। क्योंकि विधर्मी धर्म के खिलाफ कुप्रचार करने की कोशिश करते रहते हैं। कुछ अपने लोग भी हैं, जो रामचरित मानस तक को जलाने का काम करते हैं, ऐसे में हम सबको अपने धर्म के प्रति प्रतिबद्ध होना चाहिए। नई पीढ़ी को भी पूजा पाठ, यज्ञ हवन आदि के बारे में जानकारी देनी चाहिए। कार्यक्रम में यज्ञाचार्य पंडित रेवती रमण तिवारी, मान्धाता जी, अमरीश तिवारी, मधुप पाण्डेय आदि सनातनधर्मी उपस्थित थे।




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