दुनिया की सबसे लंबी परिक्रमा है नर्मदा मैया की, इन बातों का रखना चाहिए विशेष ध्यान

 मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र से होकर निकल रही नर्मदा मैया आस्था के अथाह प्रवाह की गवाह हैं। दुनिया की सबसे लंबी परिक्रमा नर्मदा मैया के किनारे से होकर लगाई जाती है। करीब 3600 किलोमीटर

मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र से होकर निकल रही नर्मदा मैया आस्था के अथाह प्रवाह की गवाह हैं। दुनिया की सबसे लंबी परिक्रमा नर्मदा मैया के किनारे से होकर लगाई जाती है। करीब 3600 किलोमीटर पर्वत और पहाड़ों से होकर यह परिक्रमा गुजरती है। इस परिक्रमा मार्ग में तमाम तरह की मुश्किलें आती हैं। घने जंगल और ऊंचे पहाड़ रास्ते में मिलते हैं, मगर आस्था के सामने यह सब बौने साबित होते हैं। संत और साधक लगातार परिक्रमा लगाते निकलते रहते हैं। बहुत से संत और साधक तो ऐसे हैं जो दंडवती परिक्रमा लगा रहे हैं। लेट कर मां नर्मदा को प्रणाम करते हुए परिक्रमा में आगे बढ़ते हैं। वह, वर्षों वर्ष से परिक्रमा लगा रहे हैं। 20 से 25 वर्ष तक का समय लग गया है। मगर उनकी परिक्रमा निरंतर जारी है। फिर भी संतों और साधकों का धैर्य जवाब नहीं देता। उत्साह और असीम भक्ति के साथ उनका सैलाब आगे बढ़ता जाता है। आइए मां नर्मदा के दर्शन के साथ परिक्रमा की पौराणिक बातें जानने की कोशिश करते हैं।

अमरकंटक से निकलती हैं नर्मदा मैया

मां नर्मदा अमरकंटक के पठार से होकर निकलती हैं। यह मध्य प्रदेश के अनूपपूर जिले में पड़ता है। मां नर्मदा भारत की पांच सबसे बड़ी नदियों के अंतर्गत आती हैं। पहाड़ों के बीच से निकलने के चलते नदी का जल एकदम स्वच्छ है। यदि आप नदी के अंदर पहुंचकर सतह को देखना चाहेंगे तो आराम से देख सकते हैं। बहुत सारे भक्त नदी में सिक्के डालते हैं तो वो सिक्के साफ चमकते हुए दिखाई देते हैं। परिक्रमा लगाने वाले संत और साधक बहुत ही आराम से नर्मदा मैया के जल को ग्रहण करते हैं। आसपास बसे तमाम लोग भी नदी के जल का प्रयोग बहुत आसानी से करते हैं। 


दो प्रांतों की जीवन रेखा हैं नर्मदा मैया

नर्मदा मैया मध्यप्रदेश और गुजरात दोनों प्रांतों की जीवन रेखा मानी जाती हैं। यह दोनों प्रांतों के बीच से होकर निकलती हैं। मध्यप्रदेश में नरसिंह पुर, रायसेन, जबलपुर आदि जिले से होकर निकलती हैं। हालांकि, नर्मदा का अधिकांश हिस्सा मध्य प्रदेश के अंतर्गत आता है, जबकि महाराष्ट्र के बड़ोदरा जिले से होकर यह नदी निकलती है। मां नर्मदा के किनारे इन दोनों प्रांतों के कई बड़े शहर बसे हुए हैं। साथ ही गांव से होकर निकलने के चलते तमाम लोगों की प्यास बुझाने का भी काम नदी करती है। इसके अलावा फसलों की सिंचाई आदि के काम में भी नदी का जल प्रयोग में आता है। चूंकि नर्मदा मैया की लंबाई काफी है इसलिए नदी के किनारे सैकड़ों आश्रम बने हुए हैं। नदी के किनारे मेले आदि लगते हैं, तमाम दुकानें हैं, जिससे सैकड़ों की संख्या में दुकानदारों को रोजगार भी मिलता है।

पूरब से पश्चिम की तरफ बहने वाली एकमात्र नदी

भारत की सभी नदियां पश्चिम से पूरब की ओर बहती हैं। मां नर्मदा एकमात्र ऐसी नदी है, जो पूरब से पश्चिम की ओर बहती है। हालांकि इसका प्रमुख कारण अमरकंटक से पश्चिम की ओर बहाव को माना जाता है, मगर एक पौराणिक कथा भी है। ऐसा बताया जाता है कि सोनभद्र और मां नर्मदा के बीच विवाद होने के बाद मां नर्मदा ने जीवन पर्यंत कुंवारी रहने का संकल्प ले लिया। इसके बाद से उन्होंने तय किया कि अब वह पूरब से पश्चिम की ओर निरंतर बहेंगी। इसीलिए यह नदी पूर्व से पश्चिम की ओर बहती हुई दिखाई देती हैं। आज भी यह शोध का विषय है कि आखिर कैसे जब सभी नदियां पश्चिम से पूरब की ओर बहती हैं तो नर्मदा मैया पूर्व से पश्चिम की ओर बह रही हैं?

सबसे बड़ी है परिक्रमा, अटूट है आस्था

नर्मदा मैया की परिक्रमा दुनिया की सबसे बड़ी परिक्रमा मानी जाती है। भारत में एकमात्र ऐसी नदी है जिसकी परिक्रमा होती है। वैसे देखा जाए तो भारत मंदिरों और धार्मिक स्थलों की 
परिक्रमाओं का प्रमुख केंद्र है। देश के तमाम धार्मिक स्थलों पर परिक्रमा का महत्व है। ब्रज में अगर आएंगे आप तो आपको सबसे बड़ी ब्रज की 84 कोसी परिक्रमा की जानकारी मिलेगी। साथ ही गोवर्धन की 21 किमी, वृंदावन की 12 किमी और बरसाने में राधा रानी मंदिर के निकट भी परिक्रमा स्थल है। वहीं, प्रभु श्रीराम की नगरी अयोध्या में भी 84 कोसी परिक्रमा का बहुत बड़ा महत्व है। मगर मां नर्मदा की 3600 किमी की परिक्रमा सबसे बड़ी मानी जाती है। इतनी लंबी परिक्रमा देश में कहीं और नहीं है। इसलिए यह आस्था और विश्वास के अटूट संगम की परिक्रमा मानी जाती है।


परिक्रमा में इन बातों का रखना चाहिए ध्यान

नर्मदा मैया की परिक्रमा यदि आप पहली बार लगा रहे हैं तो कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए। क्योंकि परिक्रमा काफी लंबी है। इसलिए परिक्रमा के समय अधिक वजन का सामान नहीं लेकर चलना चाहिए। खाने पीने का सामान बहुत कम मात्रा में रखना चाहिए। क्योंकि परिक्रमा मार्ग पर जगह-जगह आश्रम बने हुए हैं, वहां प्रसाद आदि की व्यवस्था रहती है। कई जगह पर्वत, पहाड़ और घने वन मिलते हैं। ऐसे में आपको घबराने की जरूरत नहीं है। तमाम जगहों पर आदिवासी आपको परिक्रमा का मार्ग बताते हुए दिखाई दे जाएंगे। छोटे-छोटे बच्चे भी आपको बड़े सहज और सरल तरीके से परिक्रमा का मार्ग बता देते हैं। इसलिए उनके लिए बिस्किट आदि खाने-पीने की सामग्री जरूर रखनी चाहिए। कई बार परिक्रमा लंबी होने के कारण रात में कुछ अनजान जगह भी रुकना पड़ता है। इसलिए टॉर्च जरूर साथ में रखें। साथ ही एक छड़ी भी लिए रहें, जिससे आपको चलने में दिक्कत नहीं होगी। यदि आप पैदल परिक्रमा लगा रहे हैं तो कोशिश करिए कि सुबह और शाम को मां नर्मदा के दर्शन जरूर हों, इससे आपकी सभी मनोकामना पूर्ण होगी।

राज नारायण सिंह