पानी पर चलने वाले सिद्ध संत देवरहा बाबा, जिनकी आयु का कोई नहीं लगा सका थाह

भारतवर्ष त्याग और तपस्या की भूमि है, ऋषियों की भूमि है। यहां बहुत से ऐसे संत हुए हैं जिन्होंने हजार हजार वर्ष तक तपस्या की है। कठिन तपस्या और साधना से सिद्ध संत तक की यात्रा तय की 

भारतवर्ष त्याग और तपस्या की भूमि है, ऋषियों की भूमि है। यहां बहुत से ऐसे संत हुए हैं जिन्होंने हजार हजार वर्ष तक तपस्या की है। कठिन तपस्या और साधना से सिद्ध संत तक की यात्रा तय की है। कठोर तपस्या से उनके अंदर ऐसी सिद्धियां प्राप्त हुई हैं की जिनके माध्यम से वह जल पर भी आराम से चल सकते हैं। एक साथ कई कई स्थानों पर दर्शन भी दे सकते हैं, उनमें से ही तपोनिष्ठ संत पूजनीय देवरहा बाबा जी हैं। देवरहा बाबा की उम्र का आज तक कोई थाह नहीं लगा सका है। पूर्व राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद ने तो यहां तक कहा कि वह बचपन में अपने पिताजी के साथ बाबा जी के दर्शन करने आते थे, तब भी बाबा जी की उम्र उतनी थी और जब डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद बड़े हुए तब भी बाबाजी उसी उम्र के लग रहे थे। बाबाजी की सिद्धियों का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वह पानी पर भी पैदल चलते थे। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेई, पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और उनके पुत्र पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी समेत तमाम देश के दिग्गज नेता बाबा जी के दर्शन को लालायित रहते थे। दुनिया के तमाम देशों से भी भक्तगण बाबा जी के दर्शन को आया करते थे। बाबा जी एक मचान पर आसन जमाए रहते थे। और वहीं से आशीर्वाद दिया करते थे। वृंदावन में बाबाजी का समाधि स्थल है, आइए आप सबको दर्शन कराते हैं।

एक साथ तीन तीन स्थानों पर देते थे दर्शन

तपोनिष्ठ संत पूजनीय देवराहा बाबा मूलतः उत्तर प्रदेश जिले के देवरिया के रहने वाले बताए जाते हैं। देवरिया में गंगा नदी के किनारे उनका आश्रम बना हुआ है। इसीलिए पूज्य बाबा जी को देवरिया बाबा के नाम से भी जाना जाता है। बाबाजी के भ्रमण की इच्छा सदैव बनी रहती थी। इसीलिए माघ मेले में बाबा जी प्रयागराज के किनारे पहचान बनाकर दर्शन दिया करते थे तो कुछ महीने वृंदावन में यमुना उस पार मचान पर दर्शन दिया करते थे। कुछ महीने बाबाजी उत्तराखंड के पहाड़ों पर चले जाया करते थे और वहीं, साधना और तपस्या किया करते थे। ऐसा बताया जाता है कि बाबा जी को एक बार में तीन तीन स्थानों पर लोगों ने दर्शन किया है। बाबाजी की यही सिद्धियां लोगों को आश्चर्य में डालती हैं। 

वृंदावन में यमुना किनारे है बाबाजी की समाधि स्थल

वृंदावन में बाबाजी का आना भक्तों को आश्चर्य में डालता है। क्योंकि अक्सर बाबा जी देवरिया और प्रयागराज में रहा करते थे। लेकिन यह भक्तों का सौभाग्य रहा की देवरहा बाबा ने वृंदावन में भी मचान बनाकर भक्तों को आशीर्वाद दिया। वृंदावन में बाबा जी की समाधि स्थल और आश्रम ठीक यमुना जी के किनारे है। यदि वृंदावन से आप बाबाजी के आश्रम में पहुंचना चाहते हैं, तो आश्रम पहुंचने के कई मार्ग हैं।  परिक्रमा मार्ग पर टटिया स्थान के ठीक सामने से रास्ता जा रहा है। एक विशाल गेट देवराहा बाबा के नाम से बना हुआ है। उसी गेट से प्रवेश करते हुए आप आगे बढ़ेंगे तो यमुना जी मिलेंगी। यमुना जी पर पीपे वाला पुल बना हुआ है, उस पुल को पार करते ही आप बाबा जी के आश्रम में पहुंच जाएंगे। हालांकि, कार और चार पहिया वाहन से आप इस मार्ग से बाबा जी के आश्रम तक नहीं पहुंच पाएंगे। क्योंकि पुल पर बैरियर लगा हुआ है। इसलिए बड़े वाहन नहीं जा पाते। सिर्फ पैदल और दोपहिया वाहन ही बाबा जी के आश्रम तक पहुंच पाते हैं। दूसरा मार्ग पानी गांव होते हुए है। पानी गांव से आप डांडौली गांव की ओर मुड़ेंगे तो आप बाबा जी के आश्रम पहुंच जाएंगे। मांट से भी एक मार्ग जाता है, जो डांडौली गांव होते हुए बाबा जी के आश्रम की ओर जाता है। वृंदावन से केसी घाट से पुल के माध्यम से आप गाड़ी से भी बाबा जी के आश्रम पहुंच सकते हैं।


सिद्धियों से परिपूर्ण हैं देवरहा बाबा 

पूज्य देवराहा बाबा सिद्धियों से परिपूर्ण हैं। उन्होंने योगाभ्यास, साधना से तमाम सिद्धियां प्राप्त की थी। इसीलिए तमाम भक्त बताते हैं कि बाबा जी जल पर पैदल ही चलते थे और किसी भी नदी को पार कर लिया करते थे। उन्हें प्रयागराज, वृंदावन और उत्तराखंड की पहाड़ियां बेहद पसंद थी। इसीलिए तीन स्थानों पर प्रमुख रूप से रहा करते थे। बहुत से भक्तों का कहना है कि इन तीनों स्थानों पर कई बार बाबाजी एक समय में देखे गए हैं, जिससे लोग आश्चर्य में पड़ गए। वृंदावन में बाबा जी जमुना जी के किनारे मचान पर रहा करते थे। यहां पर बाबा जी से मिलने के लिए पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी, पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेई, विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष रहे अशोक सिंघल जैसे तमाम दिग्गज आया करते थे।…