भतरौड़ बिहारी के रूप में दिया दर्शन, यहां कन्हैया ने खाया था दही भात

भगवान सिर्फ भाव के भूखे होते हैं। प्रेम से उन्हें कुछ भी दिया जाए तो वो ग्रहण कर लेते हैं।  खासकर ब्रजवासियों के हाथ का तो कन्हैया कुछ भी खा लेते हैं। 

भगवान सिर्फ भाव के भूखे होते हैं। प्रेम से उन्हें कुछ भी दिया जाए तो वो ग्रहण कर लेते हैं।  खासकर ब्रजवासियों के हाथ का तो कन्हैया कुछ भी खा लेते हैं। एक बार कन्हैया को बहुत जोरों की भूख लगी तो उन्होंने ब्रजवासियों के हाथ से जूठा भात और दही खाया। कन्हैया की इस लीला को देखकर ब्रजवासी निहाल हो गए, जिस स्थान पर भगवान श्रीकृष्ण ने भात और दही खाया वह स्थान आज भतरौड़ बिहारी के नाम से प्रसिद्ध है। भतरौड़ बिहारी के दर्शन को  काफी दूर-दूर से भक्तगण आते हैं। आइए सुनते हैं इस कथा को...

मथुरा जिले में है यह मंदिर

मथुरा से करीब 12 किलोमीटर की दूरी पर वृंदावन में एक निर्जन स्थान है। मथुरा की ओर से आने से भी मंदिर पहुंचा जा सकता है। दूसरा रास्ता पानी गांव से हाईवे से होते हुए है, सब्जी मंडी से कुछ पहले हाईवे से बाएं तरफ से यह  रास्ता मुड़ जाता है, जो सीधे मंदिर को जाता है।

गौ चारण के समय कन्हैया को लगी थी भूख

ऐसी कथा है कि एक बार कन्हैया गाय चरा रहे थे। ग्वाल वालों के साथ वृंदावन में यमुना नदी के किनारे पहुंच गए, तभी कन्हैया को बहुत जोरों की भूख लगी। मगर वहां कहीं भोजन नहीं था
 उन्होंने देखा कुछ ही दूर पर ब्रजवासी भात और दही खा रहे हैं। कन्हैया को यह देख लालच आ गया। उन्होंने अपने सखाओं को भेजा और कहा कि ब्रजवासियों से भात और दही मांग कर लाओ, वह खाएंगे।


भात और दही मांगने पहुंच गए ब्रजवासी

कन्हैया के निर्देश पर उनके सखा ब्रजवासियों से भात और दही मांगने पहुंच गए, मगर तब तक ब्रजवासियों ने खाना शुरू कर दिया उन्होंने सखाओं से कहा कि अब तो भात और दही झूठा हो गया है। वह कन्हैया को कैसे दें? उन्हें बहुत शर्म महसूस हो रही है।

सखाओं ने कन्हैया को बताई सारी बात

ब्रजवासियों की बात को सुनकर कृष्ण के सखा लौट आए और उन्होंने कृष्ण को बताया कि ब्रजवासी भात और दही खाना प्रारंभ कर दिए हैं। इसलिए उनका कहना है कि अब तो जूठा हो गया है। कन्हैया को कैसे जूठा भात और दही दें। इसपर कन्हैया स्वयं ब्रजवासियों के पास पहुंच गए।

भाव में आकर खाया जूठा दही और भात

कन्हैया अपने सखाओं के साथ ब्रजवासियों के पास पहुंच गए और भाव में आकर ब्रजवासियों के साथ बैठकर झूठा भात और दही खाने लगे। यह देखकर ब्रजवासी दंग रह गए। उनकी आंखों से आंसू आने लगे
 ब्रजवासियों ने कहा वाह रे कन्हैया तू भाव में आ गया तो हम सबका जूठा भात और दही ग्रहण कर रहा है, तेरे इस निश्चल भाव से हम निहाल हो गए

भतरौड़ बिहारी के रूप में विराजमान हैं कन्हैया

कन्हैया की इस लीला को देखकर ब्रजवासियों की आंखें छलक आईं। उन्होंने भतरौड़ बिहारी के रूप में कन्हैया का दर्शन किया और पूजा प्रारंभ कर दी। आज भी मथुरा जिले के वृंदावन में हाईवे के निकट भतरौड़ बिहारी का विशाल मंदिर बना हुआ है
 एक ऊंचे टीले पर कन्हैया भतरौड़ बिहारी के रूप में दर्शन दे रहे हैं, बहुत सारे भक्तगण मंदिर में आते हैं और प्रसाद तैयार करके कन्हैया को पहले भोग लगाते हैं और फिर ग्रहण करते हैं। ऊपर मंदिर पर विशाल बरामदा है यहां नीम का पेड़ भी है। उसी के नीचे भजन कीर्तन करते हुए भाव से प्रसाद ग्रहण करते हैं। ऐसी मान्यता है कि भतरौड़ बिहारी जी को प्रसाद ग्रहण कराने पर सभी मनोकामना पूर्ण होती है।