कागज पर लिखते ही बता देते हैं भविष्य 20 साल से खा रहे हैं सिर्फ केवल कच्ची सब्जी

ब्रज की भूमि प्रेम और भक्ति से पूरी तरह से सराबोर है।वहीं तपोनिष्ठ संतों की त्याग और तपस्या से भी यह धरती पावन और पुनीत हो गई है।आज भी बहुत सारे ऐसे संत हैं, जो कठोर साधना करते हैं

ब्रज की भूमि प्रेम और भक्ति से पूरी तरह से सराबोर है। वहीं तपोनिष्ठ संतों की त्याग और तपस्या से भी यह धरती पावन और पुनीत हो गई है। आज भी बहुत सारे ऐसे संत हैं, जो कठोर साधना करते हैं। ब्रज के एक ऐसे ही संत जो कागज पर लिखते ही आपका भविष्य बता देंगे। आपके अंतर्मन में क्या चल रहा है, उसे भी बता देंगे। महाराज जी 20 साल से सिर्फ कच्ची सब्जी खा रहे हैं, उन्होंने मौन व्रत धारण कर रखा है। इसलिए बोलते नहीं है। पूज्य महाराज जी त्याग और तपस्या की साक्षात प्रतिमूर्ति हैं। एक बार यदि जिसे भी मन से आशीर्वाद दे देते हैं तो उसका जीवन बदल जाता है। 

सतों के चरणों का मिलता है आशीर्वाद 

वृंदावन में परिक्रमा मार्ग संतो के चरणों से पावन पुनीत है। हजारों संतों के चरण प्रतिदिन परिक्रमा मार्ग पर पड़ते हैं, इसलिए परिक्रमा मार्ग का एक बार यदि स्पर्श हो जाए तो समझ लीजिए भाग्य बदल जाएगा। परिक्रमा मार्ग पर श्याम कुटी के निकट ही तपस्वी नगर है, यहां त्याग और तपस्या में लीन रहने वाले संत महापुरुष के दर्शन होते हैं। आज भी यहां पर घासफूस की झोपड़ी देखने को मिल जाएगी। संतों और भक्तों के लिए चूल्हे पर ही प्रसाद तैयार किया जाता है। और कच्ची मिट्टी में ही संत महाराज विश्राम करते हैं।

तपस्वी नगर में होते हैं मौनी बाबा के दर्शन

तपस्वी नगर में संतो के बीच में एक ऐसे संत हैं, जो 20 साल से मौन धारण किए हुए हैं। उनके सहज और सरल स्वभाव से कोई भी नहीं पता कर सकता कि वह इतने बड़े त्यागी और तपस्वी हैं। मौन धारण करने से उनका नाम मौनी बाबा पड़ गया है। 20 साल से बाबा जी केवल कच्ची सब्जी खाते हैं, मौन धारण करने के कारण किसी से भी कोई बातचीत नहीं करते हैं। कागज पर लिखने पर वह जवाब देते हैं।

कद्दू, लौकी, करेला है आहार

मौनी बाबा का कद्दू, लौकी, करेला, शिमला मिर्च बंद गोभी, कच्चा केला आदि आहार है। पूज्य मौनी बाबा साधना और पूजा करने के बाद सुबह करीब 10 बजे प्रसाद के लिए बैठते हैं। फिर कच्ची सब्जियों का प्रसाद ग्रहण करते हैं। आलू भी कच्चा ही ग्रहण कर लेते हैं, उनके प्रसाद ग्रहण को देखकर हर कोई आश्चर्यचकित में रह जाता है। अभी के मन में विचार उठता है कि कैसे पूज्य महाराज जी कच्ची सब्जियों को प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं। पूज्य मौनी बाबा जी के सामने यदि कोई भी अच्छा से अच्छा पकवान रख दिया जाए मगर वह ग्रहण नहीं करते हैं।

पढ़ लेते हैं मन की बात, लिख देते हैं भविष्य

पूज्य मौनी बाबा किसी के भी मन की बात को पढ़ लेते हैं और उसके अनुसार उसका भविष्य लिख देते हैं। बहुत सारे भक्त उनके पास पहुंचते हैं, कागज पर लिखकर उनसे प्रश्न करते हैं, मन की बात जानने की कोशिश करते हैं, पूज्य महाराज प्रश्न आते ही, उसका जवाब दे देते हैं। हालांकि सहज और सरल होने के कारण पूज्य महाराज जी के पास भक्तों का ताता तो नहीं लगता है, मगर उनकी एक एक बात सिद्ध होती है। उनके भक्तों का कहना है कि महाराज कठिन साधना करते हैं, मौन व्रत धारण करते हैं, इसलिए उन पर साक्षात ठाकुर जी की कृपा है और इसीलिए वह मन की बात को जान लेते हैं।

अग्नि के बीच में तपते हैं मौनी बाबा

पूज्य मौनी बाबा की गर्मी में भी अग्नि के बीच में तपते हैं, उनकी इस कठिन साधना को देखकर साफ अंदाजा लगाया जा सकता है कि परमपिता परमेश्वर का उनके ऊपर आशीर्वाद है। इस गर्मी में जहां एक पल भी धूप में बैठना मुश्किल होता है, वहीं पर पूज्य तपस्वी बाबा चारों तरफ कंडे की अग्नि को प्रज्वलित कर लेते हैं और उसके बाद उसके बीच में बैठकर घंटों तपस्या करते रहते हैं। पूज्य मौनी बाबा जी की कठिन साधना और तपस्या की चर्चाएं पूरे देश भर में हैं। प्रयागराज, हरिद्वार, नासिक उज्जैन में होने वाले कुंभ में भी महाराज जी का दर्शन करने के लिए भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ता है।