श्रीकृष्ण को बुलाने नंदगांव पहुंचे अक्रूर महाराज, साक्षात नारायण के रूप में प्रगट हुए कन्हैया

ब्रज भगवान श्री कृष्ण की लीलाओं से भरा पड़ा है। बहुत सी  लीलाएं हैं, जिसके बारे में हम नहीं जानते हैं। यदि आप सनातनी हैं तो आपको इन लीलाओं के बारे में जरूर जानना चाहिए। 

ब्रज भगवान श्री कृष्ण की लीलाओं से भरा पड़ा है। बहुत सी  लीलाएं हैं, जिसके बारे में हम नहीं जानते हैं। यदि आप सनातनी हैं तो आपको इन लीलाओं के बारे में जरूर जानना चाहिए। अवसर मिले तो उन स्थानों पर दर्शन करने आना भी चाहिए। हमारा प्रयास है कि आप संपूर्ण ब्रज की लीलाओं से अवगत हों। एक ऐसी ही लीला नंदगांव से जुड़ी हुई है। कंस ने भगवान श्रीकृष्ण के चाचा अक्रूर महाराज को नंदगांव भेजा। कंस ने बोला कि श्रीकृष्ण को धनुष यज्ञ के बहाने बुलाकर ले आओ और फिर धोखे से उनका वध कर दिया जाएगा। मगर श्रीकृष्ण साक्षात भगवान विष्णु के अवतारी थे, वध किसका होता है यह सभी को पता है। अक्रूर महाराज नंदगांव कैसे पहुंचे और भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें साक्षात नारायण के दर्शन दिए इसकी लीला का वर्णन आज सुनिए...


नारद जी ने कंस को धनुष भंग की लीला के बारे में बताया

मथुरा का राजा कंस भगवान श्रीकृष्ण का वध करने की तरह तरह जुगत लगाया करता था। कंस ने भगवान श्रीकृष्ण का वध करने के लिए पूतना, व्योमासुर, वकासुर आदि राक्षसों को भेजा मगर श्रीकृष्ण ने सभी राक्षसों का वध कर दिया। इससे कंस परेशान हो गया, उसने सोचा की आखिर कृष्ण को कैसे मारा जाए। तभी नारद जी आते हैं, कंस से कहते हैं कि श्रीकृष्ण को यदि मारना है तो धनुष यज्ञ की लीला करो। इस बहाने श्रीकृष्ण को बुलाओ वो धनुष ज्ञय की लीला में जरूर आयेंगे। यह बात कंस मान लेता है और श्रीकृष्ण के चाचा अक्रूर महाराज से कहता है कि नंदगांव जाओ और श्रीकृष्ण को बुला कर लाओ। 


कृष्ण को लेने अक्रूर महाराज पहुंचे नंदगांव 

नारद जी के आदेश के बाद कंस ने श्रीकृष्ण के चाचा अक्रूर महाराज को आदेश दिया और कहा कि नंदगांव जाओ श्रीकृष्ण को लेकर आओ। कंस के आदेश के बाद अक्रूर महाराज नंदगांव पहुंचते हैं और श्रीकृष्ण को मथुरा चलने के लिए कहते हैं, भगवान श्रीकृष्ण की मुलाकात अक्रूर महाराज से नंदगांव के पास ही होती है। श्री कृष्ण कहते हैं की यदि तुम एकाएक मुझे नंदगांव से मथुरा चलने के लिए कहोगे तो सभी ब्रजवासी नाराज हो जाएंगे। फिर मुझे जाने नहीं देंगे। ऐसा करना कि पहले तुम कहना की कंस का निमंत्रण लेकर आया हूं। मैं फिर तैयारी में जुट जाऊंगा और सुबह तुम चलने के लिए कहना। फिर मैं ब्रजवासियों के साथ चलने को तैयार हो जाऊंगा। इस पर अक्रूर महाराज तैयार हो गए और उन्होंने उसी प्रकार से श्री कृष्ण को आमंत्रित किया।


कन्हैया को जाते देख रो उठा नंदगांव

दूसरे दिन सुबह के समय अक्रूर महाराज ने नंदबाबा और सभी ग्रामवासियों से मथुरा धनुष यज्ञ लीला में चलने के कहा। यह कंस का बुलावा था इसलिए पूरे बृजवासी भयभीत हो जाते हैं। मगर भगवान श्रीकृष्ण मथुरा चलने को तैयार हो जाते हैं और बाल सखाओं से भी कहते हैं कि तुम सब भी मेरे साथ मथुरा चलो। यह देखकर माता यशोदा बेसुध हो जाती हैं। वह कहती हैं कि कंस बहुत क्रूर है। उसने मेरे कन्हैया को किसी प्रयोजन से बुलाया होगा। इसलिए वह कन्हैया को भेजने को तैयार नहीं होती हैं। भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं कि मैया मैं बस जाकर आ जाऊंगा। कंस मेरा कुछ भी बिगाड़ नहीं पाएगा। मेरे साथ तो नंदबाबा भी जा रहे हैं। इसलिए मुझे वहां ठहरना तो है नहीं।

     नंदगांव से मथुरा को चले श्रीकृष्ण

काफी मान मनुव्वल के बाद श्रीकृष्ण अक्रूर महाराज के साथ मथुरा के लिए चल पड़ते हैं। उनके साथ बाल सखा भी होते हैं। सभी के मन में यह उत्सुकता होती है कि मथुरा में पहुंचकर धनुष यज्ञ की लीला देखेंगे। मगर श्रीकृष्ण को साथ में जाता देख पूरा नंदगांव व्याकुल हो जाता है। बरसाने तक खबर पहुंच जाती है। राधा रानी और उनकी सखियां व्याकुल हो जाती हैं, सभी को यह लगता है कि जिस कन्हैया से इतना मोह हो गया वह हम सब को छोड़ कर जा रहा है। मनभाव होकर आंखों से झर झर नीर बहते हैं। मगर कन्हैया परसों की आने को कहकर नंदगांव से चल पड़ते हैं।

 अक्रूर महाराज के मन में बैठी शंका को मिटाया

अक्रूर महाराज भगवान श्री कृष्ण को रथ पर बिठाकर मथुरा के लिए चल पड़ते हैं, मगर उनके मन में शंका रहती है कि कहीं कंस ने श्रीकृष्ण का वध कर दिया तो यह पाप उन पर लग जाएगा। वह अपने आप को कभी माफ नहीं कर पाएंगे। इसलिए अक्रूर महाराज भावुक हो जाते हैं, उनका मन द्रवित हो जाता है। मन ही मन पछताते हैं कि आखिर क्यों आएं? और नंदगांव से कन्हैया को लेकर क्यों चल पड़े। यह बात भगवान श्रीकृष्ण जान लेते हैं और वह अक्रूर महाराज की शंका का समाधान करते हैं। यमुना जी के किनारे पहुंचकर अक्रूर महाराज श्रीकृष्ण से स्नान करने को कहते हैं। श्रीकृष्ण कहते हैं कि ठीक है चाचा आप स्नान करो तब तक मैं रथ पर बैठा हूं अक्रूर महाराज यमुना जी में डुबकी लगाते हैं तो देखते हैं उन्हें जल के अंदर भगवान श्रीकृष्ण दिखाई दे रहे हैं ज्यों ही वह बाहर निकलते हैं तो दूसरी तरफ देखते हैं की श्रीकृष्ण बैठे हैं, वह चकित हो जाते हैं। फिर अक्रूर महाराज डुबकी लगाते हैं तो जल के अंदर देखते हैं क्षीर सागर में भगवान विष्णु विराजमान हैं। यह देख अक्रूर महाराज भाव से भर जाते हैं। समझ जाते हैं कि उन्हें  साक्षात नारायण के दर्शन हो गए। अब उनका जीवन धन्य हो गया।