आखिर बरसाना में क्यों होली पर बरसते हैं लठ्ठ, क्या है मान्यता
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- April 30, 2023
ब्रज की होली सारी दुनिया में प्रसिद्ध है। यहां 40 दिन पहले से ही होली प्रारंभ हो जाती है। मगर लट्ठमार होली तो सबसे निराली और अनूठी है। इसे देखने के लिए दुनिया के तमाम देशों से
ब्रज की होली सारी दुनिया में प्रसिद्ध है। यहां 40 दिन पहले से ही होली प्रारंभ हो जाती है। मगर लट्ठमार होली तो सबसे निराली और अनूठी है। इसे देखने के लिए दुनिया के तमाम देशों से पर्यटक आते हैं। आखिर क्या कारण है नंदगांव से कन्हैया जब अपने सखाओं के साथ बरसाने में होली खेलने आते हैं तो उनके ऊपर लठ्ठ बरसाया जाता है।

क्या है परंपरा, क्यों बरसते हैं लठ्ठ
होली से करीब एक हफ्ते पहले बरसाने की सखियां नंदगांव जाती हैं और वहां पर भगवान श्रीकृष्ण और उनके सखाओं को होली खेलने के लिए आमंत्रित करती हैं। क्योंकि बरसाना राधा रानी का घर है, इसलिए नंदगांव के हुरियारे राधा रानी की सखियों से हंसी ठिठोली करते हैं। इसलिए बरसाने की सखियां लट्ठ लेकर तैयार रहती हैं और नंदगांव के हुरियारों पर जमकर लठ्ठ बरसाती हैं।

पूरी तैयारी से आते हैं हुरियारे
नंदगांव के हुरियारे भी बरसाने में होली खेलने के लिए पूरी तैयारी से आते हैं। सिर पर पगड़ी बांधे रहते हैं, जिससे उनके सिर पर कहीं चोट ना आए। साथ ही ढाल भी लिए रहते हैं, जिससे बचाव किया जा सके। नंदगांव से आने के बाद हुरियारों की जमकर खातिरदारी की जाती है। उन्हें ठंडाई के साथ पकौड़ी आदि खिलाई जाती है। उसके बाद हुरियारे तैयार होकर पहले राधा रानी के मंदिर में दर्शन करने के लिए जाते हैं।

जमकर होती है लठ्ठ की बारिश, हुरियारों का बचना होता है मुश्किल
राधारानी के मंदिर के दर्शन करने के बाद नंदगांव के हुरियारे बरसाना के रंग में सराबोर हो जाते हैं। राधा रानी के मंदिर में उनपर जमकर रंगों की बारिश की जाती है। जिससे हुरियारे रंग से पूरी तरह से तरबतर हो जाते हैं। इसके बाद हुरियारे मंदिर से सीढ़ियों के रास्ते नीचे उतरते हैं। नीचे उतरते ही सकरी गलियों पर गुर्जरों पर लट बरसना शुरू हो जाता है। राधा रानी की सखियां घरों से निकल निकल कर नंद गांव के हुरियारों पर जमकर लट बरसाना शुरू कर देती हैं। चारों तरफ से घेराबंदी कर लेती हैं। किसी भी तरह से हुरियारों को जाने नहीं देती हैं। हुरियारे भी जमकर हंसी और ठिठोली करते हैं। शाम पांच बजे से यह लट्ठमार होली प्रारंभ हो जाती है और शाम सात बजे तक जमकर लठ्ठों की बारिश होती है। यह दृश्य देखते ही बनता है।

उमड़ पड़ता है आस्था का सैलाब
लट्ठमार होली बरसाने की रंगीली गली में होती है। इस गली में लट्ठमार होली देखने के लिए आस्था का सैलाब उमड़ पड़ता है। लाखों की संख्या में भक्तों का सैलाब हिलोरें मारता है। बरसाने में बस स्टैंड से लेकर चौक तक हर तरफ पर्यटक और श्रद्धालु दिखाई देते हैं। सभी एक झलक लट्ठमार होली का दर्शन करना चाहते हैं। दोपहर बाद 3:00 से रंगीली गली पूरी तरह से भर जाती है और यहीं पर लट्ठमार होली का भावपूर्ण दर्शन होता है। बरसाने की सखियां पूरी तैयारी से आती है और नंदगांव के हुरियारों पर जमकर लठ्ठ की बारिश करती हैं। प्रेम, भाव, श्रद्धा का यह रस देखते ही बनता है। सारी दुनिया आप घूम लीजिए मगर बरसाने की लट्ठमार होली अगर आपने नहीं देखा तो फिर आप ने कुछ भी नहीं देखा। इसलिए एक बार जरूर लट्ठमार होली देखने आइए।

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