हित प्रेमानंद महाराज के दर्शन करने पैदल ही तय की 370 किमी यात्रा

वृंदावन परिक्रमा मार्ग पर स्थित केलीकुंज में इन दिनों भक्ति रस बरस रहा है। पूज्य हित प्रेमामंद महाराज जी के एक एक शब्द भक्तों पर अमृत की बारिश कर रहे हैं। महाराज जी के रस से भरे

वृंदावन परिक्रमा मार्ग पर स्थित केलीकुंज में इन दिनों भक्ति रस बरस रहा है। पूज्य हित प्रेमामंद महाराज जी के एक एक शब्द भक्तों पर अमृत की बारिश कर रहे हैं। महाराज जी के रस से भरे शब्दों में वो जादू है, जिससे देश ही नहीं बल्कि विदेश से भी भक्त खींचे चले आते हैं, तमाम ऐसे साधक हैं, जिन्होंने अपना पूरा जीवन ही पूज्य महाराज जी के चरणों में समर्पित कर दिया है। ऋषिकेश के एक परम साधक पूज्य महाराज जी से इतने प्रभावित हुए की उत्तराखंड के ऋषिकेश से पैदल ही वृंदावन चल पड़े। भीषण गर्मी में वह करीब 12 दिन की यात्रा तय करके वृंदावन पूज्य महाराज जी केली कुंज स्थित आश्रम पहुंचे।  महाराज जी का दर्शन कर आशीर्वाद लिया। प्रेमानंद महाराज जी के लिए उन्होंने शब्दों में अपने भाव भी प्रकट किए। पूज्य महाराज जी ने साधक के लिखे भाव को सहर्ष स्वीकार किया और अनंत आशीर्वाद की बारिश कर दी। ये साधक ऋषिकेश निवासी नकुल पंत हैं। जिन्होंने ऋषिकेश से करीब 370 किमी दूर वृंदावन की यात्रा कैसे तय की। आइए जानते हैं, नकुल पंत की इस भक्तिमय पूर्ण यात्रा के बारे में...

जीवन की सच्चाई बताते हैं प्रेमानंद महाराज 

ऋषिकेश निवासी नकुल पंत उच्च शिक्षा प्राप्त हैं। त्यागी और तपस्वी संतो की धरती पर रहने के चलते नकुल पंत का भी मन बचपन से धर्म और अध्यात्म की ओर था। शिक्षा प्राप्त करने के बाद उन्होंने पत्रकारिता की और एक प्रतिष्ठित समाचार पत्र से जुड़ गए। मगर धर्म की ओर उनका लगाव धीरे-धीरे बढ़ता ही चला गया। नकुल पंत बताते हैं कि इसी बीच उन्होंने एक दिन सोशल मीडिया पर हित प्रेमानंद महाराज जी का प्रवचन सुना, उन्हें पूज्य महाराज जी के शब्दों में भक्ति के साथ सच्चाई दिखाई दी। प्रवचन में कहीं कोई लाग लपेट नहीं था। पूज्य महाराज जी सीधी सरल बातों से भक्तों को समझा रहे थे। नकुल पंत को लगा की उनकी तलाश पूरी हो गई। अब उन्हें कहीं भटकने की जरूरत नहीं है।  और मन ही मन उन्होंने प्रेमानंद महाराज जी को अपना गुरु स्वीकार कर लिया। बस तभी से महाराज जी के दर्शन को मन लालायित हो गया। फिर नकुल पंत का मन कहीं और नहीं लगता।

तय किया पैदल चलकर दर्शन करने का लक्ष्य

नकुल पंत ने एक दिन तय कर लिया जब गुरुदेव महाराज जी के दर्शन को आस लगी है तो क्यों न त्याग और समर्पण के साथ दर्शन किया जाए? इसीलिए उन्होंने ऋषिकेश से वृंदावन तक पैदल यात्रा तय करने का निर्णय लिया। करीब 370 किलोमीटर की दूरी कोई आसान बात नहीं थी। नकुल पंथ बताते हैं कि पहले वे इतना कभी नहीं चले। इसलिए मन में थोड़ी घबराहट थी। मगर जब गुरुदेव महाराज जी का मुस्कुराता हुआ चेहरा उनके सामने आता  तो फिर लक्ष्य कोई दूर नहीं दिखाई देता था। इस प्रकार नकुल पंत ने जून 2023 के पहले सप्ताह में यात्रा की शुरुआत कर दी। ऋषिकेश से जब पैदल चले उनकी भक्ति और साहसिक यात्रा देखकर तमाम लोगों के मन में शंकाएं थी। उन्हें लग रहा था कि नकुल यात्रा पूरी नहीं कर पाएंगे। मगर, महाराज जी के प्रति अगाध प्रेम और भक्ति ने उनकी इस यात्रा को पूर्ण करा दिया। उन्होंने 12 जून को महाराज का भावपूर्ण दर्शन किया और दंडवत हो गए। 


प्रेम प्रतीक स्वीकार किया जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि

नकुल पंत की भक्ति तो देखिए वृंदावन पहुंचते ही वह भाव से भर गए अपने गुरुदेव महाराज जी के दर्शन को इतना लालायित हुए श्रीधाम में प्रवेश करते ही अपनी पद्मेश को छोड़ दिया उन्होंने निर्णय लिया कि वह नंगे पांव ही कड़ी धूप में पूज्य महाराज जी के आश्रम पहुंचेंगे और दर्शन करेंगे 11 जून को नकुल पंत वृंदावन पहुंचे और 12 की तड़के पूज्य महाराज जी उन्हें दर्शन और आशीर्वाद प्राप्त हुआ नकुल बंद पंत कुछ पंक्तियां लिख कर ले गए थे जिन्हें महाराज जी को समर्पित कर दिया नकुल बताते हैं कि उनके भाव भक्ति और प्रेम किस शब्द के जो उन्होंने अपने गुरुदेव महाराज जी की भक्ति में लिखे थे उन्होंने कहा कि दर्शन करके मानव जीवन धन्य हो गया इतनी सहजता और सरलता देखकर गदगद हो गए उन्हें तनिक भी आभास नहीं लग रहा था कि और पैदल 370 किलोमीटर की दूरी तय करके केली कुंज पहुंचे हैं।


दुनिया में सबसे श्रेष्ठ है भारत

नकुल पंत कहते हैं कि दुनिया में सबसे श्रेष्ठ भारत है। आने वाली सदी में दुनिया को भारत की संस्कृति से जुड़ना होगा। उन्होंने कहा कि ऋषिकेश से उन्होंने यात्रा प्रारंभ की तो रास्ते में तमाम लोग जुड़ते चले गए। उनकी पैदल यात्रा को देखकर लोग उनके आदर सत्कार के लिए जुट जाते। 
 कहीं प्रसाद ग्रहण कराया जाता तो कहीं फल फूल देते थे। रात…

राज नारायण सिंह